Last Updated:
Ujjain News: एमपी के उज्जैन में धार्मिक संगठनों को लेकर नई बहस शुरू हुई है. अखिल भारतीय पुजारी महासंघ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर देश में अखाड़ों और अखाड़ा परिषद को खत्म करने की मांग की है. महासंघ के मुताबिक, अखाड़े अब अपने मूल उद्देश्य से भटक चुके हैं और उनकी जरूरत नहीं रही.
Ujjain News: उज्जैन देश में धार्मिक संगठनों को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है. अखिल भारतीय पुजारी महासंघ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर देश में अखाड़ा और अखाड़ा परिषद को समाप्त करने की मांग की है. महासंघ का आरोप है कि अब अखाड़ों की जरूरत नहीं रह गई है और ये अपने मूल उद्देश्य से भटक चुके हैं. अखिल भारतीय पुजारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष महेश पुजारी ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कहा है कि सनातन धर्म में मूल रूप से ऋषि-मुनि परंपरा रही है, न कि अखाड़ों की. उनका दावा है कि अखाड़ों की स्थापना धर्म और देश की रक्षा के लिए की गई थी, लेकिन अब यह जिम्मेदारी भारतीय सेना निभा रही है.
पत्र में यह भी जिक्र किया गया है कि वर्तमान समय में कई अखाड़ों के साधु-संत पद, प्रतिष्ठा और ऐश्वर्य के लिए आपसी विवाद में उलझे हुए हैं. हाल ही में उज्जैन में अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष पद को लेकर हुए विवाद को भी इसका उदाहरण बताया गया है.
महेश पुजारी का बयान
अखाड़ों का मूल उद्देश्य समाप्त हो चुका है, अब ये व्यावसायिक केंद्र बनते जा रहे हैं और इससे सनातन धर्म की छवि को नुकसान हो रहा है. महासंघ ने आरोप लगाया है कि अखाड़ों के आश्रम अब व्यावसायिक गतिविधियों के केंद्र बन गए हैं, जहां गार्डन और यात्री गृह के माध्यम से करोड़ों रुपये की आय अर्जित की जा रही है. साथ ही सिंहस्थ जैसे आयोजनों के नाम पर सरकार से भारी धनराशि की मांग भी की जाती है. महासंघ ने प्रधानमंत्री से अपील की है कि रामराज्य की स्थापना के लिए अखाड़ा परिषद को खत्म कर ऋषि परंपरा को फिर से स्थापित किया जाए. अब देखना होगा कि इस मांग पर सरकार और संत समाज की क्या प्रतिक्रिया सामने आती है.
About the Author
Deepti Sharma, currently working with News18MPCG (Digital), has been creating, curating and publishing impactful stories in Digital Journalism for more than 6 years. Before Joining News18 she has worked with Re…और पढ़ें