बालक को मिल गया ICC से बड़ों में घुसकर आफीशियल तोड़-फोड़ का लाइसेंस

बालक को मिल गया ICC से बड़ों में घुसकर आफीशियल तोड़-फोड़ का लाइसेंस


नई दिल्ली. फुटबॉल में लामिन यमाल को जिस तरह ‘जेनरेशन टैलेंट’ कहा जा रहा है, क्रिकेट में भी एक ऐसा ही नाम तेजी से उभर रहा है वैभव सूर्यवंशी बस फर्क इतना है कि यह भारतीय युवा स्टार उनसे भी लगभग चार साल छोटा है. महज 14 साल की उम्र में जिस तरह उसने दुनिया के सामने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया, उसने क्रिकेट जगत को चौंका दिया. अब IPL 2026 की पूर्व संध्या पर, उसके 15 साल पूरे होते ही चर्चा इस बात की है कि क्या वह जल्द ही टीम इंडिया के लिए भी खेलता नजर आएगा.

शार्दुल आज भी उस पल को नहीं भूल पाए हैं, जब उन्होंने पहली ही गेंद पर एक 14 साल 23 दिन के लड़के से छक्का खाया था. वह लड़का कोई और नहीं, बल्कि वैभव सूर्यवंशी था, जिसने अपने डेब्यू से ही सबको हैरान कर दिया. अब जब वह 15 साल का हो चुका है, IPL 2026 से पहले सबसे बड़ा सवाल यही है क्या वह दूसरे सीजन में भी उसी अंदाज में चमक बिखेर पाएगा या फिर गेंदबाज उसकी कमजोरी पकड़ लेंगे. पिछले एक साल में उसके प्रदर्शन ने इन आशंकाओं को काफी हद तक खत्म कर दिया है.

क्या टीम इंडिया में डेब्यू करीब है?

अब जब सूर्यवंशी 15 साल के हो चुके हैं, चर्चा “कब” से आगे बढ़कर “कितनी जल्दी” पर आ गई है. ICC के नियमों के अनुसार, कोई भी खिलाड़ी 15 साल की उम्र पूरी करने के बाद ही अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने के लिए पात्र होता है और अब यह शर्त पूरी हो चुकी है. लेकिन पात्रता और चयन, दोनों अलग बातें हैं. सूर्यवंशी का सफर असाधारण रहा है 12 साल की उम्र से लोकल क्रिकेट में गेंदबाजों पर हावी होना, IPL में 35 गेंदों पर शतक लगाना, और फिर अंडर-19 वर्ल्ड कप में 439 रन बनाना यह दिखाता है कि वह हर स्तर पर तेजी से आगे बढ़े हैं. साथ ही, Ranji Trophy और Vijay Hazare Trophy में भी उनके प्रदर्शन ने यह साबित कर दिया है कि वह सिर्फ टी20 ही नहीं, बल्कि हर फॉर्मेट में दम रखते हैं.

जल्दबाजी या सही समय का इंतजार?

भारतीय क्रिकेट में पहले भी कम उम्र के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को मौका मिला है. सचिन तेंदुलकर ने ने 16 साल की उम्र में टेस्ट डेब्यू किया था, जबकि पाकिस्तान के हसन रजा ने 14 साल में ही अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेल लिया था लेकिन मौजूदा भारतीय टीम में टॉप ऑर्डर पहले से ही बेहद मजबूत है. यहां तक कि यशस्वी जायसवाल जैसे खिलाड़ी को भी टी20 टीम में जगह बनाना आसान नहीं हो रहा है. ऐसे में चयनकर्ताओं के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी सूर्यवंशी को जल्दबाजी में मौका देना या सही समय का इंतजार करना. हालांकि, इस साल होने वाले एशियन गेम्स जैसे टूर्नामेंट युवा खिलाड़ियों को आजमाने के लिए बेहतरीन मंच साबित हो सकते हैं, जहां सूर्यवंशी को मौका मिल सकता है.

अगर नेट्स में ज्योफ्रा ऑर्चर जैसे तेज गेंदबाज की धुनाई करना काफी नहीं था, तो 2026 अंडर-19 वर्ल्ड कप में उसका ‘प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट’ प्रदर्शन किसी करिश्मे से कम नहीं रहा. बिहार के इस युवा बल्लेबाज ने अपने से 4-5 साल बड़े खिलाड़ियों के खिलाफ 62.71 की औसत और 169.50 के स्ट्राइक रेट से 439 रन ठोक दिए जो 50 ओवर फॉर्मेट में लगभग असंभव सा आंकड़ा है.

ICC का नियम क्या कहता है?

आईसीसी के प्लेयर एलिजिबिलिटी नियम (आर्टिकल 4.1) के अनुसार:कोई भी खिलाड़ी तभी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट (ICC इवेंट्स सहित) में भाग लेने के लिए पात्र होगा, जब वह संबंधित टीम के चयन की तारीख या सीरीज/टूर्नामेंट के पहले मैच के दिन कम से कम 15 वर्ष का हो. नवंबर 2020 में ICC ने यह नियम लागू किया था, ताकि कम उम्र के खिलाड़ियों को बहुत जल्दी अंतरराष्ट्रीय स्तर के दबाव में न झोंका जाए. इसका मकसद युवा खिलाड़ियों की सुरक्षा और उनके करियर के संतुलित विकास को सुनिश्चित करना है. वैभव सूर्यवंशी का टैलेंट असाधारण है और वह भारतीय क्रिकेट का भविष्य बन सकते हैं लेकिन उनके करियर को सही दिशा में ले जाने के लिए जल्दबाजी नहीं, बल्कि सही समय पर सही फैसला लेना ज्यादा जरूरी होगा.



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