कौन हैं प्रियंक कानूनगो? भोपाल में अचानक सक्रियता से बढ़ी राजनीतिक हलचल

कौन हैं प्रियंक कानूनगो? भोपाल में अचानक सक्रियता से बढ़ी राजनीतिक हलचल


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भोपाल में प्रियंक कानूनगो की बढ़ती सक्रियता ने राजनीतिक हलचल तेज कर दी है. अलग-अलग मुद्दों पर उनके दौरे और बयान चर्चा में हैं. अब सवाल उठ रहा है कि क्या यह सक्रियता 2028 चुनाव की तैयारी है. सियासी गलियारों में इसे लेकर अटकलें तेज हो गई हैं.

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प्रियंक कानूनगो अपने खास अंदाज के लिए पहचाने जाते हैं.

भोपाल. राजधानी में इन दिनों राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो की बढ़ती सक्रियता ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है. इकबाल मैदान विवाद से लेकर अरेरा कॉलोनी में अवैध शराब दुकानों का विरोध, तालाबों से अवैध कब्जा हटाने और पारंपरिक मछुआरों के अधिकार जैसे मुद्दों पर उनके लगातार दौरे और बयान उन्हें सुर्खियों में बनाए हुए हैं. जिस तरह वे जमीनी स्तर पर सीधे हस्तक्षेप करते नजर आ रहे हैं, उससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या यह सिर्फ एक संवैधानिक पद की जिम्मेदारी है या इसके पीछे कोई बड़ा राजनीतिक संकेत भी छिपा है. क्‍या प्रियंक कानूनगो भोपाल से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं?

भोपाल सहित प्रदेश के कई जिलों में उनके कार्यक्रम, निरीक्षण और सोशल मीडिया एक्टिविटी ने स्थानीय स्तर पर बड़ा असर डाला है. राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं कि यह सक्रियता सामान्य नहीं है. खासकर 2028 विधानसभा चुनाव को देखते हुए यह अटकलें तेज हो गई हैं कि क्या प्रियंक कानूनगो  भोपाल की किसी सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं. उनकी मौजूदगी ने सत्ता और विपक्ष दोनों के लिए नई रणनीतिक स्थिति पैदा कर दी है.

प्रियंक कानूनगो वर्तमान में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य हैं.

कौन हैं प्रियंक कानूनगो
प्रियंक कानूनगो वर्तमान में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य हैं. इससे पहले वे राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सबसे युवा अध्यक्ष रहे. उन्होंने 2018 से 2024 तक लगातार दो कार्यकाल में आयोग का नेतृत्व किया. इससे पहले 2015 से 2018 तक वे सदस्य के रूप में कार्य कर चुके हैं.

भोपाल में क्यों बढ़ी सक्रियता
हाल के महीनों में उन्होंने कई स्थानीय मुद्दों को उठाया. इकबाल मैदान नाम विवाद, अवैध शराब, तालाब अतिक्रमण और मछुआरों के अधिकार जैसे विषयों पर लगातार बयान दिए. उनके दौरे और निरीक्षण ने प्रशासनिक हलकों में भी हलचल बढ़ाई.

पांच बड़ी चर्चित घटनाएं

  • इकबाल मैदान नाम बदलने को लेकर बयान से सियासी विवाद
  • अवैध शराब दुकानों पर सख्ती की मांग
  • तालाबों से कब्जा हटाने को लेकर निर्देश
  • मछुआरों के पारंपरिक अधिकारों पर हस्तक्षेप
  • सोशल मीडिया के जरिए प्रशासनिक मामलों में सक्रियता

मध्‍य प्रदेश से है नाता, विदिशा में हुआ जन्‍म
प्रियंक कानूनगो का जन्म मध्य प्रदेश के विदिशा में हुआ. वे बचपन से ही सामाजिक और वैचारिक गतिविधियों से जुड़े रहे. उन्होंने कम उम्र में ही आरएसएस से जुड़कर सार्वजनिक जीवन की शुरुआत की और बाद में भाजपा के कार्यकर्ता बने. एनसीपीसीआर अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने आठ डिजिटल पोर्टल लॉन्च किए. इनमें बाल स्वराज कोविड केयर, POCSO ट्रैकिंग और MASI ऐप जैसे प्लेटफॉर्म शामिल हैं. इनसे बाल अधिकारों की निगरानी को मजबूत किया गया. उन्होंने माइक्रोबायोलॉजी में बीएससी की पढ़ाई की है. हालांकि उनका कार्यक्षेत्र प्रशासनिक और सामाजिक नीतियों में ज्यादा सक्रिय रहा है.

परिवार, सियासी संकेत और संभावनाएं
वे एक ऐसे परिवार से आते हैं जो शिक्षा और सामाजिक सेवा से जुड़ा रहा है. यही पृष्ठभूमि उनके सार्वजनिक जीवन और कार्यशैली में भी दिखाई देती है. उनकी सक्रियता को लेकर यह चर्चा तेज है कि वे भविष्य में चुनावी राजनीति में कदम रख सकते हैं. हालांकि उन्होंने इस पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है, लेकिन लगातार फील्ड एक्टिविटी इस ओर इशारा जरूर करती है.

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Sumit verma

सुमित वर्मा, News18 में 4 सालों से एसोसिएट एडीटर पद पर कार्यरत हैं. बीते 3 दशकों से सक्रिय पत्रकारिता में अपनी अलग पहचान रखते हैं. देश के नामचीन मीडिया संस्‍थानों में सजग जिम्‍मेदार पदों पर काम करने का अनुभव. प…और पढ़ें



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