न नीतियों का इंतजार, न फंड की तलाश, नाना की सोच और फिर पोते ने बदला 280 स्कूलों का चेहरा

न नीतियों का इंतजार, न फंड की तलाश, नाना की सोच और फिर पोते ने बदला 280 स्कूलों का चेहरा


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Vidyanjali Project: बालाघाट के नक्सल प्रभावित इलाकों के जर्जर स्कूलों को चिन्हित कर उनकी कायाकल्प करने काम किया जा रहा है. लोकल 18 से बातचीत के दौरान एसपी आदित्य मिश्रा ने बताया कि यह प्रोजेक्ट नाना सुरेंद्र नाथ दूबे से प्रेरित होकर शुरू किया गया है. वहीं, उनके नाना ने भी बालाघाट के दो स्कूलों को गोद लिया था. 

Vidyanjali Project: “अगर प्राथमिक स्कूलों में सुधार लाया जाए, तो बच्चों का भविष्य और भी बेहतर होगा. इसलिए समाज को भी आगे आना चाहिए.” यह कहना था वरिष्ठ शिक्षाविद और गांधीवादी विचारक सुरेंद्र नाथ दूबे का, जो अब इस दुनिया में नहीं रहे. मालूम हो कि उनका निधन 8 मार्च की सुबह हुआ. उन्होंने अपना जीवन शिक्षा के क्षेत्र में समर्पित कर दिया. परलोक सिधारने से पहले भी उन्होंने अपनी पेंशन का चेक स्कूलों के जीर्णोद्धार के लिए समर्पित कर दिया.  दरअसल, बालाघाट जिले के नक्सल प्रभावित इलाकों में विद्यांजलि प्रोजेक्ट के तहत प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों का जीर्णोद्धार हो रहा है. इस प्रोजेक्ट की शुरुआत बालाघाट एसपी आदित्य मिश्रा ने एकल सुविधा केंद्र के तहत की थी. ऐसे में बालाघाट के नक्सल प्रभावित इलाकों के जर्जर स्कूलों को चिन्हित कर उनकी कायाकल्प करने काम किया जा रहा है. लोकल 18 से बातचीत के दौरान एसपी आदित्य मिश्रा ने बताया कि यह प्रोजेक्ट नाना सुरेंद्र नाथ दूबे से प्रेरित होकर शुरू किया गया है. वहीं, उनके नाना ने भी बालाघाट के दो स्कूलों को गोद लिया था.

बालाघाट में बदल रही है स्कूलों की तस्वीर
बालाघाट जिले में पहले हम आपको अक्सर जर्जर और खराब स्कूलों की तस्वीरें दिखाते थे. लेकिन अब हम स्कूलों की बदली तस्वीर दिखा रहे है. सरकार के पास जर्जर स्कूलों के सारे आंकड़े है लेकिन सुधार व्यवस्था लागू करते-करते समय बीत जाता है. लेकिन अब बालाघाट पुलिस ने न किसी योजना का इंतजार किया और न ही किसी फंड की आस रखी. बस लोग आगे आए और स्कूलों का सुधार कार्य होने लगा. एसपी आदित्य मिश्रा का कहना है कि पुलिस प्रशासन और जिला प्रशासन ने मिलकर एक सपना देखा था कि नक्सल प्रभावित क्षेत्र के गांव नक्सल गतिविधियों के कारण कुछ स्कूलों का विकास नहीं हो पाया था. ऐसे में अब उन स्कूलों में सुधार कार्य किए जा रहे है.

जानिए क्या है विद्यांजलि प्रोजेक्ट
जब दिसंबर 2025 में नक्सलवाद खत्म हुआ. इसी के साथ बालाघाट में शिक्षाविद शुरू हुआ. इसमें शुरुआत में 5 स्कूलों के जीर्णोद्धार का काम पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया गया. फिर 280 स्कूलों को चिह्नित किया गया, जिसमें उनकी मरम्मत और रंगाई पुताई का काम किया गया. इस प्रोजेक्ट में आम लोगों ने ही फंड जुटाया है. इस प्रोजेक्ट में तीन करोड़ 90 लाख रुपए जमा हुए. वहीं,  पुलिस के जवान खुद ही स्कूलों के सुधार का काम करते हैं. अब नक्सलवाद के खात्मे की डेडलाइन तक सारे स्कूलों का जीर्णोद्धार होने का दावा किया जा रहा है. वहीं, इस प्रोजेक्ट में पारदर्शिता के लिए एक विद्यांजलि पोर्टल तैयार किया गया है.  अगर कोई इसमें कोई डोनेट करना चाहता है, तो वह भी इस पोर्टल पर जाकर डोनेट कर सकता है.

नाना से हुए प्रेरित हुए एसपी मिश्रा
विद्यांजलि प्रोजेक्ट शुरू होने पर एसपी आदित्य मिश्रा कहते है कि इस प्रोजेक्ट के शुरू होने के पीछे उनके नाना सुरेंद्रनाथ दुबे की सोच को बताते हैं. वह खुद प्राथमिक स्कूल में शिक्षक रहे है. वहीं, जीवन भर वह स्कूलों में सुधार के लिए काम करते थे. ऐसे में उनका मानना था कि प्राथमिक स्कूलों का सुधार करने पर आधार मजबूत होता है. ऐसे में खुद उन्होंने विद्यांजलि प्रोजेक्ट में दान दिया है.

अब एसपी आदित्य मिश्रा का कहना है कि विद्यांजलि प्रोजेक्ट तहत और भी स्कूलों को बेहतर बनाने का काम किया जाएगा. इसके अलावा इस सोसायटी की मदद से और क्या बेहतर किया जा सकता है. इस पर भी काम किया जाएगा.

अब बदल रही स्कूलों की तस्वीर
लोकल 18 ने बालाघाट के कभी नक्सल प्रभावित रहे लौगूर के प्राथमिक स्कूल को देखा. स्कूल की रंगत बदल गई थी. माहौल काफी अच्छा होने लगा. उस स्कूल में पदस्थ शिक्षिका उर्मिला टेकाम का कहना है कि स्कूल की तस्वरी बदली है. ऐसे माहौल में बच्चों का मानसिक विकास बेहतर होता है. इस पहल से स्कूलों में बिजली, पंखे सहित दूसरी सुविधाएं भी बेहतर हुई है.

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Deepti Sharma

Deepti Sharma, currently working with News18MPCG (Digital), has been creating, curating and publishing impactful stories in Digital Journalism for more than 6 years. Before Joining News18 she has worked with Re…और पढ़ें



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