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Ujjain News: चैत्र पूर्णिमा पर पवित्र नदी में दीपदान करना बहुत शुभ माना जाता है. इससे मानसिक अशांति दूर होती है, पितृ दोष खत्म होता है और पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है. ऐसा करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और सुख-समृद्धि आती है.
उज्जैन. हिंदू पंचांग में चैत्र मास को धर्म, दान और पुण्य के लिए सबसे पवित्र समय माना जाता है और इस महीने की पूर्णिमा का विशेष महत्व और भी बढ़ जाता है. यह दिन अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है. मान्यताओं के अनुसार, इस दिन गंगा और अन्य पवित्र नदियों में स्नान करने से पापों का नाश होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. चैत्र पूर्णिमा न केवल आध्यात्मिक उन्नति का अवसर देती है बल्कि भाग्य मजबूत करने और आर्थिक स्थिति सुधारने में भी सहायक होती है. इस वर्ष यह तिथि बेहद शुभ संयोग में आ रही है, जो इसके महत्व को कई गुना बढ़ा देती है. उज्जैन के ज्योतिषाचार्य आनंद भारद्वाज के अनुसार, इस दिन दीपक के अचूक उपाय बरसों से बंद किस्मत का ताला खोल सकते हैं.
वैदिक पंचांग के अनुसार, चैत्र पूर्णिमा की शुरुआत एक अप्रैल को सुबह 07 बजकर 06 मिनट लगभग पर होगी और समापन अगले दिन यानी दो अप्रैल को सुबह 07 बजकर 41 मिनट लगभग पर होगा. ऐसे में दो अप्रैल को चैत्र पूर्णिमा मनाई जाएगी. इस दिन चंद्रोदय शाम 07 बजकर 02 मिनट पर होगा.
चैत्र पूर्णिमा का धार्मिक महत्व
हिंदू नववर्ष की पहली पूर्णिमा को चैत्र पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है, जिसका विशेष धार्मिक महत्व है. इस पावन दिन स्नान और दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और पापों का नाश होता है. मान्यता है कि पवित्र नदी में स्नान के बाद पितरों के लिए तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध करने से पितृ दोष दूर होता है. ये धार्मिक क्रियाएं जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाती हैं.
जरूर करें दीपक के ये उपाय
1. चैत्र पूर्णिमा की रात घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाना चाहिए क्योंकि यहीं से मां लक्ष्मी का आगमन होता है. यह उपाय चुपचाप करें. इस उपाय से आपके घर में मां लक्ष्मी आएंगी. आर्थिक तंगी दूर रहेगी, साथ ही गुरु भी प्रसन्न होंगे.
2. मान्यता है कि रसोई घर का सबसे महत्वपूर्ण स्थान है और इसका स्वास्थ्य पर असर होता है. चैत्र पूर्णिमा को रसोई में दीपक जलाने से देवी अन्नपूर्णा और गुरुदेव प्रसन्न होते हैं, जिससे कभी अन्न की कमी नहीं रहती है.
3. चैत्र पूर्णिमा के दिन पवित्र नदी में दीपदान करना अत्यंत शुभ माना जाता है. इससे मानसिक अशांति दूर होती है, पितृ दोष समाप्त होता है और पूर्वजों का आशीर्वाद मिलता है. यह कर्म जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और सुख-समृद्धि लाता है.
4. मान्यता है कि पूर्णिमा की सुबह स्नान के बाद तुलसी में जल अर्पित करें और घी का दीपक जलाकर आरती करें. इससे मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और धन-संपत्ति की वृद्धि होती है.
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राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.