गर्भवती महिला के पति के 760 रुपये भी नहीं छोड़े, ट्रैफिक पुलिस पर गंभीर आरोप

गर्भवती महिला के पति के 760 रुपये भी नहीं छोड़े, ट्रैफिक पुलिस पर गंभीर आरोप


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Bhopal News: शिकायत के अनुसार, मौके पर मौजूद ट्रैफिक पुलिस टीम का नेतृत्व एक सब-इंस्पेक्टर द्वारा किया जा रहा था. पीड़ित ने कहा कि जब उन्होंने चालान काटने की बात कही, तो पुलिसकर्मियों ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया और बार-बार पैसे देने का दबाव बनाया.

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पीड़िता ने डीसीपी ट्रैफिक से शिकायत की है.

रिपोर्ट- वासु चौरे, भोपाल. मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में ट्रैफिक पुलिस पर रिश्वतखोरी के आरोप लगे हैं. एक गर्भवती महिला ने भोपाल ट्रैफिक पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं. पीड़िता ने वीडियो जारी कर इंसाफ मांगा है. उसने रिश्वतखोर पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है. पीड़िता ने अवैध वसूली को लेकर ट्रैफिक पुलिस के डीसीपी से शिकायत की है. पीड़िता ने ट्रैफिक पुलिसकर्मियों पर दुर्व्यवहार और अवैध वसूली के गंभीर आरोप लगाए हैं. फिलहाल ट्रैफिक पुलिस की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.

मिली जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता आयुष श्रीवास्तव निवासी नीलबड़ क्षेत्र, ने अपने आवेदन में बताया कि 30 मार्च 2026 की दोपहर करीब 12:45 बजे वह अपनी पत्नी और पांच वर्षीय बेटे के साथ कार से AIIMS भोपाल जा रहे थे. उनकी पत्नी गर्भवती है और पेट में दर्द होने के कारण उन्हें अस्पताल ले जाया जा रहा था. उनका आरोप है कि रास्ते में ट्रैफिक पुलिसकर्मियों ने उनकी गाड़ी रोकी और ओवरस्पीडिंग का आरोप लगाते हुए पांच हजार रुपये की मांग की.

पुलिसकर्मियों ने किया अभद्र व्यवहार
शिकायत के अनुसार, मौके पर मौजूद पुलिस टीम का नेतृत्व एक सब-इंस्पेक्टर द्वारा किया जा रहा था. पीड़ित का कहना है कि जब उन्होंने चालान काटने की बात कही, तो पुलिसकर्मियों ने कथित तौर पर अभद्र व्यवहार किया और बार-बार पैसे देने का दबाव बनाया.

पुलिसकर्मियों ने ले लिए 760 रुपये
आयुष श्रीवास्तव ने बताया कि उन्होंने अपनी पत्नी की स्थिति का हवाला देते हुए जल्द जाने की गुहार लगाई लेकिन इसके बावजूद उनसे एक हजार रुपये की मांग की गई. उनके पास उस समय 760 रुपये ही थे, जो पुलिसकर्मियों ने लेकर बिना कोई रसीद या चालान दिए जाने दिया. शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि जब उन्होंने अपने भाई को फोन कर पैसे मंगाने की कोशिश की, तो पुलिसकर्मी और आक्रामक हो गए और उन्हें अपशब्द कहे.

अस्पताल पहुंचने में देरी हुई
इस घटना के कारण पीड़ित और उनके परिवार को मानसिक तनाव का सामना करना पड़ा और अस्पताल पहुंचने में देरी हुई. उन्होंने अपने आवेदन में संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है. फिलहाल इस मामले में पुलिस विभाग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला ट्रैफिक पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है.

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Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.



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