बालाघाट के लालबर्रा में 19 अप्रैल को होने वाले सामूहिक विवाह कार्यक्रम को लेकर सियासी घमासान शुरू हो गया है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि इस योजना में पात्र कन्याओं के बजाय भाजपा से जुड़े जनपद सदस्यों के चहेतों को ज्यादा तवज्जो दी जा रही है। यह पूरा विवाद सोमवार को एक ऑडियो क्लिप सामने आने के बाद बढ़ा। इस ऑडियो में कनकी गांव की सरपंच दुर्गा पगरवार और विवाह प्रभारी आकाश बोकड़े के बीच बातचीत हो रही है। इसमें प्रभारी यह कहते सुनाई दे रहे हैं कि तय लक्ष्य से कहीं ज्यादा फॉर्म जमा हो चुके हैं और जनपद सदस्यों ने भारी संख्या में आवेदन भिजवाए हैं। कांग्रेस का पक्ष और सरपंच के आरोप कांग्रेस नेता और सरपंच दुर्गा पगरवार का कहना है कि सामूहिक विवाह योजना का लाभ उन गरीब बेटियों को नहीं मिल पा रहा है जो वाकई इसकी हकदार हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के जनपद सदस्यों ने अपने खास लोगों के फॉर्म भरवा दिए हैं, जिससे असली जरूरतमंद बाहर हो रहे हैं। उन्होंने इस पूरे मामले की ऊंचे स्तर पर जांच कराने की मांग की है। जनपद अध्यक्ष की सफाई इन आरोपों के बाद जनपद अध्यक्ष देवीलता ग्वालवंशी ने शाम 5 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाकर अपनी बात रखी। उन्होंने साफ कहा कि ये सारे आरोप गलत हैं और अगर किसी को शक है तो वह जांच करवा सकता है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि लालबर्रा के बीपीएल कार्ड धारक परिवारों की बेटियों को ही प्राथमिकता दी जाएगी। 400 आवेदनों की हो रही है जांच विवाह प्रभारी आकाश बोकड़े ने बताया कि कार्यक्रम के लिए 200 शादियों का लक्ष्य था, लेकिन आवेदन 400 आ गए हैं। अब इन सभी फॉर्मों की बारीकी से जांच की जा रही है। उन्होंने माना कि जनपद सदस्यों ने अपने-अपने इलाकों की लड़कियों के फॉर्म जमा किए हैं, लेकिन शादी सिर्फ उन्हीं की होगी जो जांच में सही पाए जाएंगे। प्रशासन का कहना है कि 26 मार्च को जारी नियमों के हिसाब से ही पूरी प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
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