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आईपीएल 2026 ने इस विडंबना को और भी उजागर कर दिया है. जहां 10 में से 7 टीमों के कप्तान ऐसे हैं जो भारत की टी20 स्कीम का हिस्सा ही नहीं हैं. और यही इस कहानी का सबसे दिलचस्प. और शायद सबसे असहज पहलू भी है. यह सिर्फ एक संयोग नहीं. बल्कि एक ढर्रा है और वो कभी झूठ नहीं बोलते. दबी जुमान में सही लोग ये बोलने लगे है कि फ्रेंचाइज क्रिकेट ही अब खेल का फ्यूचर तय करेगा.
IPL 2026 में 7 ऐसे कप्तान जो भारत की टी-20 टीम का हिस्सा नहीं हैं
नई दिल्ली. भारतीय क्रिकेट की चमक-दमक के बीच एक ऐसा सच भी छिपा है. जिस पर शायद ही कभी खुलकर बात होती है. और वो है आईपीएल और टीम इंडिया के बीच बढ़ती दूरी. एक तरफ आईपीएल में कप्तानी कर रहे खिलाड़ी अपनी-अपनी फ्रेंचाइज़ी को जीत दिला रहे हैं. रणनीति बना रहे हैं और दबाव में फैसले ले रहे हैं. वहीं दूसरी तरफ वही खिलाड़ी जब भारतीय टी20 टीम की बात आती है तो मानो चयनकर्ताओं की सूची से गायब हो जाते हैं.
आईपीएल 2026 ने इस विडंबना को और भी उजागर कर दिया है. जहां 10 में से 7 टीमों के कप्तान ऐसे हैं जो भारत की टी20 स्कीम का हिस्सा ही नहीं हैं. और यही इस कहानी का सबसे दिलचस्प. और शायद सबसे असहज पहलू भी है. यह सिर्फ एक संयोग नहीं. बल्कि एक ढर्रा है और वो कभी झूठ नहीं बोलते. दबी जुबान में सही लोग ये बोलने लगे है कि फ्रेंचाइज क्रिकेट ही अब खेल का फ्यूचर तय करेगा.
फ्रेंचाइज ने लगाया दांव, टीम इंडिया में नहीं कोई भाव
आरसीबी के कप्तान रजत पाटीदार. जो मौजूदा चैंपियन टीम का नेतृत्व कर रहे हैं. अब भी टीम इंडिया के दरवाज़े पर दस्तक दे रहे हैं. श्रेयस अय्यर. जो मिडिल ऑर्डर के सबसे भरोसेमंद बल्लेबाजों में गिने जाते हैं. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आते ही जैसे रडार से बाहर हो जाते हैं. वहीं अजिंक्य रहाणे. जिन्होंने कभी विदेशी पिचों पर भारत को ऐतिहासिक जीत दिलाई. अब आईपीएल में अनुभव का खजाना बनकर रह गए हैं. शुभमन गिल का मामला भी दिलचस्प है. 2025 में हर फॉर्मेट में सबसे ज्यादा रन बनाने के बावजूद. उनकी आईपीएल कप्तानी कहीं न कहीं एक ‘कंसोलेशन प्राइज’ जैसी लगती है. और फिर आते हैं रियान पराग. घरेलू क्रिकेट में धमाल. आईपीएल में कप्तानी. लेकिन टीम इंडिया के लिए ‘अभी तैयार नहीं’ की लाइन उनका पीछा नहीं छोड़ रही.
आईपीएल कप्तानी का “ट्रेनिंग कैंप”
ऋषभ पंत की कहानी तो और भी पेचीदा है. टेस्ट क्रिकेट में मैच विनर. आईपीएल में कप्तान. लेकिन टी20 टीम में जगह की बात आते ही वह एक लंबी ‘कमबैक स्टोरी’ का हिस्सा बन जाते हैं. ऐसा लगता है जैसे बीसीसीआई के लिए आईपीएल कप्तानी एक “ट्रेनिंग कैंप है. जबकि भारतीय टीम में चयन के लिए कोई अलग ही सिलेबस चलता है. जिसके नियम कभी सार्वजनिक नहीं किए जाते. सबसे दिलचस्प बात यह है कि इस पूरे सिस्टम को जिस आत्मविश्वास के साथ चलाया जा रहा है. वह अपने आप में हैरान करने वाला है. रुतुराज गायकवाड़ को चेन्नई की कमान संभालते हुए. पाटीदार को ट्रॉफी उठाते हुए और पराग को राजस्थान को लीड करते हुए देखने के बाद भी यह मान लेना कि ये खिलाड़ी टी20 इंटरनेशनल के लिए फिट नहीं हैं. यह अपने आप में एक अलग ही सोच को दर्शाता है.
भारतीय क्रिकेट में टैलेंट की कमी कभी नहीं रही है. बल्कि समस्या हमेशा टैलेंट की अधिकता की रही है. और इसका समाधान भी उतना ही पारंपरिक रहा है. इंतज़ार. खिलाड़ियों को आईपीएल में मौका दो. उन्हें कप्तानी दो. उन्हें चमकने दो. और फिर देखो कि कब चयनकर्ताओं का दरवाज़ा खुलता है. तब तक ये खिलाड़ी अपनी फ्रेंचाइजी को मैच जिताएंगे और भारतीय टीम में अपनी जगह का इंतजार करेंगे.