जब आस्था बनी शक्ति! उज्जैन के पाठ और दुनिया में शांति की खबर ने चौंकाया

जब आस्था बनी शक्ति! उज्जैन के पाठ और दुनिया में शांति की खबर ने चौंकाया


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उज्जैन से विश्व शांति के लिए किए गए आध्यात्मिक प्रयास अब चर्चा में हैं. अक्षत व्यास के अनुसार, इस संकल्प का असर मिडिल ईस्ट में 14 दिन के युद्धविराम के रूप में दिखा. उज्जैन को विश्व का नाभि केंद्र मानते हुए शांति की कामना की गई थी.

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उज्जैन : मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और युद्ध जैसे हालात के बीच उज्जैन से विश्व शांति के लिए किए जा रहे आध्यात्मिक प्रयासों ने अब लोगों का ध्यान आकर्षित किया है. ऋषि सांदीपनि की परंपरा से जुड़े पंचांगकर्ता अक्षत व्यास के अनुसार, उज्जैन के प्राचीन बड़ा गणेश मंदिर में लगातार किए जा रहे गणपति अथर्वशीर्ष पाठ और शांति अनुष्ठान का सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलने लगा है. उनका दावा है कि इसी आध्यात्मिक संकल्प के चलते मध्य पूर्व क्षेत्र में 14 दिनों का युद्धविराम लागू हुआ है. इस घटनाक्रम को वे उज्जैन की आध्यात्मिक ऊर्जा और सामूहिक प्रार्थना की शक्ति का परिणाम मानते हैं, जो विश्व में शांति स्थापित करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है.

दरसल धर्म नगरी अवंतिका मे श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग से कुछ ही दूर स्थित बड़े गणेश मंदिर में इन दिनों एक अनोखा आध्यात्मिक दृश्य देखने को मिल रहा था. जहाँ विश्व प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित आनंद शंकर व्यास के मार्गदर्शन में पुजारी अक्षत व्यास और 16 बटुक ब्राह्मण रोज़ शांति पाठ कर रहे थे. यह पाठ सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि विश्व शांति की एक सशक्त प्रार्थना बन चुका था. एक से दो घंटे तक चलने वाला यह अनुष्ठान तब तक जारी रहा, जब तक युद्ध जैसे हालात समाप्त नहीं हो जाते. मंदिर में आने वाले श्रद्धालु भी हाथ जोड़कर विश्व कल्याण की भावना से इस पुण्य कार्य में सहभागी बन रहे थे.

जानिए  कब हुआ था पाठ का शुभारंभ
ऋषि सांदीपनि के वंशज और पंचांग विशेषज्ञ अक्षत व्यास के अनुसार, विश्व में बढ़ते तनाव को ध्यान में रखते हुए उज्जैन के प्राचीन बड़ा गणेश मंदिर में संकष्टी चतुर्थी के अवसर पर विशेष गणपति अथर्वशीर्ष और शांति पाठ का शुभारंभ किया गया, जो निरंतर जारी है. उन्होंने संकल्प लिया था कि जब तक युद्धविराम की घोषणा नहीं होती, तब तक यह अनुष्ठान चलता रहेगा. अब मिडिल ईस्ट में 14 दिनों के युद्धविराम की खबर सामने आने के बाद वे इसे इस आध्यात्मिक प्रयास का सकारात्मक परिणाम मान रहे हैं. उनका कहना है कि उज्जैन, जिसे विश्व का नाभि केंद्र माना जाता है, से किए गए इस शांति संकल्प का प्रभाव व्यापक रूप से देखने को मिल रहा है. उन्होंने आशा जताई कि यह पहल आगे भी विश्व में स्थायी शांति का मार्ग प्रशस्त करेगी.

खुशखबरी आते ही बटी मंदिर मे मिठाई
अक्षत व्यास ने बताया कि युद्धविराम की खबर सामने आईं. तो बटुको ने विशेष रूप से मंत्रो का जाप करके बड़े गणेश को लडू का भोग लगाकर मिठाई बाटी गई. और यह कामना की अब आगे युद्ध ना बड़े जिससे भारत या अन्य देशो की स्थिति बिगड़े भगवान गणेश से यही प्रार्थना है.

पाठ के लिए उज्जैन क्यों है विशेष
ज्योतिषाचार्य पंडित आनंद शंकर व्यास ने बताया कि उज्जैन की पवित्र धरती पर यह पाठ इसलिए चल रहा था. क्युकि उज्जैन को विश्व का नाभि स्थल माना जाता है. उन्होंने एक गहरा संदेश देते हुए कहा कि जैसे शरीर की नाभि से संपूर्ण उपचार संभव होता है, वैसे ही इस धरती से विश्व के दुखों का समाधान निकल सकता है. उनका मानना है कि भारत की संस्कृति, ज्ञान और आध्यात्मिक शक्ति ही दुनिया को शांति की राह दिखा सकती है. यह भूमि केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि मानवता के कल्याण का स्रोत है, जहां से विश्व में शांति का नया प्रकाश फैल सकता है.

About the Author

Amit Singh

7 वर्षों से पत्रकारिता में अग्रसर. इलाहबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स इन जर्नालिस्म की पढ़ाई. अमर उजाला, दैनिक जागरण और सहारा समय संस्थान में बतौर रिपोर्टर, उपसंपादक औऱ ब्यूरो चीफ दायित्व का अनुभव. खेल, कला-साह…और पढ़ें



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