कभी धूप-कभी बारिश, फसलों पर डबल अटैक! जानें कैसे रोकें मिल्ड्यू और मोजेक का हम

कभी धूप-कभी बारिश, फसलों पर डबल अटैक! जानें कैसे रोकें मिल्ड्यू और मोजेक का हम


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कभी धूप-कभी बारिश, फसलों पर डबल अटैक! जानें कैसे रोकें मिल्ड्यू और मोजेक का हम

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Weather change impact on crops : बालाघाट में मौसम अब अचानक बदल रहा है. कभी गर्मी बढ़ जाती है. तो कभी अचनाक तेज बारिश हो जाती है, जिसके बाद तापमान अचानक से कम हो जाता है. ऐसे में कद्दूवर्गीय फसलों पर प्रभाव पड़ता है. ऐसे में फसलों पर क्या असर पड़ेगा एक्सपर्ट से समझ लीजिए.

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Agri News : गर्मियों के मौसम की बात की जाए तो आम तौर पर कद्दूवर्गीय सब्जियों की खेती की जाती है. वहीं बालाघाट के संदर्भ में देखा जाए, तो यहां पर करेला, ककड़ी, कद्दू और लौकी की खेती की जाती है. लेकिन बीते कुछ दिनों से बार-बार मौसम बदल रहा है. ऐसे में फसल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है. इसके बाद से कद्दुवर्गीय फसलों पर कीट और रोग लगने ककी आशंका है. अगर ऐसा होता है, तो उपज कम होगी और किसान भाई को आर्थिक नुकसान हो सकता है. ऐसे में लोकल 18 उद्यानिकी अधिकारी लेषा सुल्खे से बातचीत की और समझने की कोशिश कि अब फसलों में क्या बदलाव आएंगे और किसान भाई कैसे फसल को बेहतर बना सकते हैं.

अचानक बदल रहा मौसम 
बालाघाट में मौसम अब अचानक बदल रहा है. कभी गर्मी बढ़ जाती है. तो कभी अचनाक तेज बारिश हो जाती है, जिसके बाद तापमान अचानक से कम हो जाता है. ऐसे में कद्दूवर्गीय फसलों पर प्रभाव पड़ता है. ऐसे में फसलों पर क्या असर पड़ेगा जान लिजीए…

जानिए क्या पड़ेगा असर
बारिश से पॉलिनेशन कराने वाले फैक्टर प्रभावित होते हैं. ऐसे में पॉलिनेशन कम होता है, जिससे फ्लॉवरिंग भी कम होती है. ऐसे में उपज भी कम होती है. ऐसे में किसान भाई गर्मी और शीत प्रतिरोधी किस्मों का चयन करना चाहिए.

अचानक बारिश या मौसम बदलने से फसल पर मोजेक का असर 
इसके अलावा फसल पाउडरी मिल्ड्यू और डाउनी मिलड्यू का प्रकोप लग सकते हैं. पाउडरी मिलड्यू में पौधे के पत्ते पर सफेद पाउडर की परत दिखाई पड़ता है. वहीं, डाउनी मिलड्यू में पौधे की पत्तियां ऊपर या फिर नीचे की ओर मूड़ जाती है, जिससे फसल पर असर पड़ता है.

फसलों में रोग न बढ़े इसके लिए करें ये उपाय
दरअसल, रोग और कीट संपर्क से फैलते हैं ऐसे में फसल लगाते समय एक उचित दूरी का पालन करना चाहिए. कद्दुवर्गीय सब्जियों की खेती का बात करें तो औसतन कतार से कतार की दूरी 1.5 से 2.5 मीटर और पौधों के बीच 45 से 60 सेमी की दूरी रखें.

इसके अलावा समय-समय पर आवश्यकतानुसार सिंचाई करना चाहिए. फिर समय पर पोषक तत्वों का भी ध्यान रखना चाहिए. ऐसे में समय-समय पर खाद और उर्वरकों का ध्यान रखना चाहिए. सबसे जरूरी बात किसान भाई को अपनी फसल की नियमित देखरेख करनी चाहिए, जिससे फसल पर रोग और कीट के लक्षण तत्काल नजर आए.

About the Author

Amit Singh

7 वर्षों से पत्रकारिता में अग्रसर. इलाहबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स इन जर्नालिस्म की पढ़ाई. अमर उजाला, दैनिक जागरण और सहारा समय संस्थान में बतौर रिपोर्टर, उपसंपादक औऱ ब्यूरो चीफ दायित्व का अनुभव. खेल, कला-साह…और पढ़ें



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