कुत्तों की नसबंदी के नाम पर बड़ा खेल, घर से मिले डॉग्स के 795 प्राइवेट ऑर्गन

कुत्तों की नसबंदी के नाम पर बड़ा खेल, घर से मिले डॉग्स के 795 प्राइवेट ऑर्गन


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Mandla News: एजेंसी को कुत्तों के बंध्याकरण का टेंडर मिला हुआ था. एजेंसी के काम शुरू करने से पहले ही उनके द्वारा संदिग्ध गतिविधियां संचालित की जा रही थीं. इसी के संबंध में शिकायत मिली थी.

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पुलिस मामले की जांच कर रही है.

रिपोर्ट- कृष्णा, मंडला. मध्य प्रदेश के मंडला में कुत्तों की नसबंदी के नाम पर बड़ा खेल किया जा रहा था. बिंझिया के शारदा कॉलोनी में स्थित एक घर से कुत्तों के सैकड़ों प्राइवेट अंग बरामद हुए. बंद कमरे से दो डिब्बों में कुत्तों के 795 ऑर्गन जब्त किए गए. इसमें नर कुत्तों के 518 और 217 मादा कुत्तों के ऑर्गन हैं. अंगों को सड़ने से बचाने के लिए ‘फॉर्मेलिन’ नामक केमिकल में डुबोकर रखा गया था. राजस्व, नगरपालिका, वेटनरी विभाग और पुलिस की टीम ने मौके पर पहुंच अंगों को बरामद किया. मंडला नगरपालिका ने जबलपुर की प्राइवेट एजेंसी मां अंबे एंटरप्राइजेज को कुत्तों की नसबंदी का टेंडर दिया था लेकिन हैरानी की बात यह है कि संस्था ने अब तक शहर में कुत्तों का बंध्याकरण शुरू ही नहीं किया था. बिना नसबंदी किए ही उनके पास पाए गए बड़ी मात्रा में कुत्तों के प्राइवेट ऑर्गन से स्थिति संदिग्ध जान पड़ती है. वहीं अब पुलिस-प्रशासन मामले में जांच की बात कह रहा है.

मंडला नगरपालिका के सीएमओ गजानन नाफड़े ने कहा कि हमने कुत्तों के बंध्याकरण के लिए टेंडर जारी किया था. उसमें जबलपुर की फर्म मां अंबे एंटरप्राइजेज द्वारा टेंडर डाला गया था. हमने उन्हें वर्क ऑर्डर जारी किया था. उन्होंने काम शुरू नहीं किया था. आनाकानी की जा रही थी. कई बार पत्राचार और फोन पर कहा गया लेकिन काम शुरू नहीं किया गया. दो अप्रैल को हमारे द्वारा टेंडर निरस्त कर दिया गया. हमें शिकायत मिली कि इनके द्वारा कमरा किराये पर लिया गया था, जहां कुत्तों के अंग रखे गए हैं. टीम ने निरीक्षण किया और शिकायत सही पाई गई. हमारे द्वारा थाने में शिकायत दर्ज कराई गई है. पुलिस मामले की जांच कर रही है.

टीम ने किया सत्यापन
पशु चिकित्सा सेवा के उप-संचालक यूएस तिवारी ने कहा कि एजेंसी को बंध्याकरण का टेंडर मिला हुआ था और एजेंसी के कार्य शुरू करने से पहले ही उनके द्वारा संदिग्ध गतिविधियां संचालित की जा रही थीं. इसी को लेकर शिकायत मिली थी. जिसके बाद पुलिस, राजस्व, पशुपालन, टेक्निकल और नगरपालिका की टीम मौके पर पहुंची. टेक्निकल टीम ने हमें बताया कि वहां जो ऑर्गन रखे हुए मिले, वो मेल और फीमेल डॉग्स के हैं. उन लोगों ने इन्हें फॉर्मेलिन नामक केमिकल में डुबोकर रखा था. टीम ने इसका सत्यापन किया है.

ऑर्गन चेक करने के बाद ही जारी होती है राशि
पशु चिकित्सक सुमित पटेल ने कहा कि एबीसी प्रोग्राम (एनिमल बर्थ कंट्रोल प्रोग्राम) के तहत बंध्याकरण के लिए एजेंसी को टेंडर दिया गया था. नसबंदी कर चुके कुत्तों के ऑर्गन को चेक करने के बाद ही एजेंसी को राशि जारी की जाती है. ऑर्गन कितने पुराने हैं, यह जांच के बाद ही पता चल सकेगा.

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Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.



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