टिकोले झड़ने की टेंशन खत्म! ये छिड़काव करेगा कमाल, दोगुनी होगी आम की पैदावार

टिकोले झड़ने की टेंशन खत्म! ये छिड़काव करेगा कमाल, दोगुनी होगी आम की पैदावार


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टिकोले झड़ने की टेंशन खत्म! ये छिड़काव करेगा कमाल, दोगुनी होगी आम की पैदावार

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Agriculture News: डॉ शैलेंद्र गौतम ने किसानों को सलाह दी है कि वे एनपीके (19:19:19) का एक फीसदी घोल तैयार करें. इसका अर्थ है कि 10 ग्राम उर्वरक को प्रति लीटर पानी में मिलाएं.

सीधी. मध्य प्रदेश में आम की बागवानी करने वाले किसानों के लिए अप्रैल का महीना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. इस समय आम के पेड़ों में बौर से फल बनने की प्रक्रिया चल रही है, जिसे बघेली भाषा में टिकोरी बोलते हैं. हालांकि इसी दौरान कई किसानों को फल गिरने और छोटे आकार की समस्या का सामना करना पड़ता है, जिससे उत्पादन और गुणवत्ता दोनों प्रभावित होते हैं. सीधी कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक प्रमुख डॉ शैलेंद्र गौतम ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए बताया कि टिकोला आने के बाद आम के फलों के समुचित विकास के लिए पोषक तत्वों का संतुलित उपयोग बेहद जरूरी है. विशेष रूप से एनपीके (नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश), जिंक और बोरॉन का संतुलित छिड़काव करने से फल गिरने की समस्या कम होती है और फलों का आकार भी बेहतर होता है. ये सभी तत्व पौधे की वृद्धि, फूल से फल बनने की प्रक्रिया और फल के समुचित विकास में अहम भूमिका निभाते हैं.

डॉ गौतम ने किसानों को सलाह दी है कि वे एनपीके (19:19:19) का एक प्रतिशत घोल तैयार करें. इसका मतलब है कि 10 ग्राम उर्वरक को प्रति लीटर पानी में मिलाएं. इसके साथ जिंक सल्फेट 0.5 प्रतिशत (पांच ग्राम प्रति लीटर) और बोरॉन 0.2 प्रतिशत (दो ग्राम प्रति लीटर) मिलाकर एक मिश्रण तैयार करें. इस घोल का छिड़काव टिकोला आने के 10 से 15 दिन बाद करना चाहिए. यदि जरूरत हो तो 10 से 12 दिन के अंतराल पर दोबारा छिड़काव भी किया जा सकता है.

खत्म होगी फल गिरने की समस्या
इस पोषक घोल के उपयोग से न केवल फलों का आकार बढ़ता है बल्कि उनकी गुणवत्ता भी बेहतर होती है. फल अधिक चमकदार, मजबूत और बाजार में बेहतर कीमत देने वाले बनते हैं. खासतौर पर बोरॉन तत्व की मौजूदगी से फल गिरने की समस्या पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है. वैज्ञानिक शैलेंद्र गौतम ने छिड़काव के सही समय को भी बेहद महत्वपूर्ण बताया है. किसानों को सलाह दी गई है कि वे सुबह या शाम के समय ही छिड़काव करें ताकि दवा का असर अधिकतम हो और पत्तियों को नुकसान न पहुंचे. साथ ही दवाओं की निर्धारित मात्रा का ही उपयोग करें क्योंकि अधिक मात्रा नुकसानदायक हो सकती है.

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Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.



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