Monalisa-Farman Khan POCSO: महाकुंभ वायरल गर्ल मोनालिसा की जिंदगी में भूचाल आ गया है. राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST)की जांच में मोनालिसा नाबालिग पाई गई हैं. वहीं मोनालिसा से निकाह करने वाले फरमान खान पर कानूनी शिकंजा कस गया है. फरमान खान पर पॉक्सो किडनेपिंग और एससी/एसटी एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की गई है.
एनसीएसटी की ओर से की गई जांच में अस्पताल के रिकॉर्ड में मोनालिसा के जन्म की तारीख 30 दिसंबर 2009 होने की पुष्टि हुई है. इस हिसाब से मोनालिस की उम्र अभी 17 साल तीन महीने कुछ दिन है. 18 साल पूरे न करने तक वह नाबालिग है और अब फरमान खान पर पॉक्सो एक्ट के तहत कार्रवाई होगी.
मोनालिसा के निकाह और परिवार के साथ हुए विवाद के बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने स्वतः संज्ञान लिया था और खरगोन एसपी जांच के निर्देश दिए थे. मोनालिसा के पति और मां ने भी नाबालिग लड़की को बहला-फुसलाकर शादी करने और फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल करने के आरोप लगाए थे.परिवार का दावा था कि मोनालिसा को फिल्मों का लालच देकर या ब्रेनवॉश करके शादी कराई गई है.
अब इस मामले में हुई जांच के बाद फरमान की गर्दन पॉक्सो में फंस गई है. आइए जानते हैं कि मोनालिसा को प्यार का पाठ पढ़ाने वाले फरमान खान को कितने साल की सजा हो सकती है? क्या कहता है पॉक्सो एक्ट?
क्या है पॉक्सो एक्ट, कितनी होती है सजा?
बच्चों और नाबालिगों को यौन अपराधों से बचाने के लिए भारत में प्रोटेक्टशन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसेज एक्ट 2012 (Protection of Children from Sexual Offences Act, 2012) लागू है. इसके तहत कम से कम 3 साल और अधिकतम उम्र कैद या फांसी की सजा का प्रावधान है. न्यायालय अलग-अलग मामलों में अपराध की गंभीरता और प्रवृत्ति को देखते हुए सजा को उसके अनुरूप कर सकते हैं.
फरमान को कितनी सजा?
जहां तक मोनालिसा का मामला है और उसकी उम्र 17 साल कुछ महीने है. वहीं उससे निकाह करने के बाद उसके साथ यौन संपर्क यानि पेनिट्रेटिव सेक्सुअल असॉल्ट की पूरी संभावना है, ऐसे में इस मामले में फरमान को कम से कम 10 साल कैद या इससे भी सख्त सजा हो सकती है.
मोनालिसा की सहमति कितनी मान्य होगी?
पॉक्सो के कानूनी प्रावधानों के अनुसार 17 साल की लड़की को POCSO Act के तहत बच्चा माना जाता है, ऐसे में उसके बयान और उसकी सहमति (consent) कानूनी रूप से कोई मायने नहीं रखती.
किस चार्ज में कितनी जेल?
अगर मोनालिसा के साथ यौन संबंध (penetrative sexual assault जैसे penis, object या शरीर के अंग से पेनीट्रेशन) हुआ है, तो यह सेक्शन 3 और 4 के तहत अपराध है. ऐसी स्थिति में सामान्य पेनीट्रेटिव सेक्सुअल असॉल्ट पर फरमान को कम से कम 10 साल की कैद जो आजीवन कारावास (life imprisonment) तक हो सकती है.
पॉक्सों में अगर लड़की 16 साल से कम होती तो न्यूनतम 20 साल, लेकिन 17 साल की होने पर भी 10 साल न्यूनतम सजा लागू होती है.
शादी के नाम पर यौन शोषण में कितनी सजा?
सेक्शन 5 और 6 के अंतर्गत एग्रीवेटेड पेनीट्रेटिव सेक्शुअल असॉल्ट (Aggravated Penetrative Sexual Assault) मोनालिसा वाले मामले में लागू होने की पूरी संभावना है क्योंकि ऐसे मामलों में निकाह के बाद या शादी के नाम पर यौन शोषण कई मामलों में एग्रीवेटेड माना जाता है. खासकर अगर-
- . आरोपी लड़की का रिश्तेदार नहीं भी है, लेकिन विश्वास की स्थिति बनाकर शादी का झांसा देकर शोषण करता है.
- . बार-बार यौन संबंध, गर्भावस्था, या अन्य फैक्टर जैसे जैसे धोखा, जबरदस्ती, धमकी आदि करता है.
- . ऐसी स्थिति में कम से कम 20 साल की सख्त कैद हो सकती है जो आजीवन कारावास या मृत्युदंड और जुर्माने में भी बदल सकती है.
अन्य जुड़े अपराध और सजाएं
भारतीय न्याय संहिता का सेक्शन 376 अगर POCSO के साथ लगाया जाए तो 10 साल से आजीवन तक सजा हो सकती है. वहीं अगर धोखा (cheating), किडनैपिंग, जबरदस्ती या धमकी शामिल हो तो बीपीसी की कुछ अन्य धाराएं 363, 366, 420 आदि भी लग सकती हैं, जिससे कुल सजा और बढ़ सकती है.
ये हैं जरूरी बातें
- पॉक्सो एक्ट में दी गई सजा कम से कम है ऐसे में कोर्ट इसे कम नहीं कर सकता
- . कई हाई कोर्ट केसों में 17 साल की लड़की के मामले में 20 साल की सजा दी गई है, भले ही बाद में शादी हो गई हो या बच्चा हो.
- अगर मामला interfaith (हिंदू-मुस्लिम) है और लव जिहाद या धोखे का तत्व साबित होता है, तो जांच एजेंसी अतिरिक्त धाराएं लगा सकती है, लेकिन सजा मुख्य रूप से POCSO पर निर्भर करती है.
- . अदालत सबूत, गवाही, मेडिकल रिपोर्ट और मामले की परिस्थितियों (consent का दावा, बार-बार संबंध, गर्भावस्था आदि देखकर फैसला कर सकती हैं.