ग्वालियर शहर के बीचों-बीच और हाईवे पर बिना नंबर के डंपर बेखौफ दौड़ रहे हैं। ये डंपर लोगों को कुचलकर जान ले रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार अफसर इन पर मेहरबान हैं। न डंपर पकड़े जा रहे और न ही मालिकों पर सख्त कार्रवाई हो रही है। दैनिक भास्कर ने डंपर हादसों म
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रात 11:30 से 3:30 बजे तक शहर और हाईवे के 14 स्थानों पर 2302 डंपरों का पीछा किया। 48% यानी 1115 डंपर बिना नंबर के थे। हैरानी की बात यह है कि इतने डंपर खुलेआम सड़कों पर दौड़ते रहे, लेकिन कहीं कोई रोकने वाला नहीं दिखा।
इन डंपरों ने किसी का पिता, किसी का पति और किसी का बेटा छीना है। पीड़ित परिवारों का कहना है कि अब सड़क पर डंपर दिखते ही रूह कांप जाती है। हमारे अपने तो वापस नहीं आएंगे, लेकिन इन डंपरों और मालिकों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए ताकि आगे और परिवार उजड़ने से बच सकें।
पुलिस-प्रशासन की मिलीभगत के बिना संभव नहीं यह पूरा खेल
ग्वालियर में अवैध खनन का कारोबार में लगे डंपर रात-दिन बिना नंबर और दस्तावेज के दौड़ते हैं। इनका आरटीओ रिकॉर्ड भी नहीं होता। इतना बड़ा काला कारोबार पुलिस-प्रशासन की मिलीभगत के संभव नहीं हो सकता। ज्यादा चक्कर लगाने के लिए तेज रफ्तार से चलते हैं और लोगों को कुचल देते हैं। अधिकांश मामलों में डंपर पकड़े नहीं जाते। यदि विवाद बढ़ने पर पकड़े भी जाते हैं तो कुछ ही घंटों में दूसरी वैध गाड़ी के कागज लगाकर छुड़ा लिया जाता है।
ये हैं जिम्मेदार… सब मौन
हमारा विभाग खनिज की रॉयल्टी जांचने अधिकृत
बिना नंबर के चल रहे खनिज से भरे वाहनों के खिलाफ कार्रवाई का अधिकार परिवहन विभाग का है। हमारा विभाग उसमें भरे खनिज की रॉयल्टी जांचने ही अधिकृत है। -जीएस यादव, खनिज अधिकारी
खनिज व पुलिस के साथ मिलकर कार्रवाई करेंगे
सड़कों पर बिना नंबर प्लेट के डंपरों का संचालन गैर-कानूनी है। रात के समय रेत परिवहन में लगे इन डंपरों के खिलाफ खनिज व पुलिस के साथ मिलकर कार्रवाई करेंगे। -विक्रमजीत कंग, आरटीओ
माफिया का वैध व अवैध दो तरह का सिस्टम..!
- अवैध गाड़ियां: इन डंपरों पर न नंबर होते हैं, न बीमा और न ही कोई दस्तावेज। इन्हें अवैध खनन और ढुलाई में लगाया जाता है।
- वैध गाड़ियां: जब कोई अवैध डंपर पकड़ा जाता है या हादसा हो जाता है तो उसी पर वैध गाड़ी के दस्तावेज लगाकर छुड़ा लिया जाता है।