367.74 लाख का पुल तीन साल बाद भी अधूरा: 28 गांवों को जोड़ने पुल निर्माण में मजदूरों की कमी – Anuppur News

367.74 लाख का पुल तीन साल बाद भी अधूरा:  28 गांवों को जोड़ने पुल निर्माण में मजदूरों की कमी – Anuppur News




अनूपपुर जिले के सामतपुर-हर्री-बर्री गांव से कोलमी-फुनगा को जोड़ने वाला पुल तीन साल बाद भी पूरा नहीं हो सका है। करीब 3 करोड़ 67 लाख रुपये की लागत से बन रहा यह पुल लगभग 28 गांवों के लिए बेहद जरूरी है, लेकिन अब तक इसका आधा काम ही पूरा हो पाया है। धीमी रफ्तार से चल रहा निर्माण कार्य सेतु निगम शहडोल की देखरेख में बन रहे इस पुल का काम मजदूरों की कमी के कारण धीमा बताया जा रहा है। ठेकेदार के अनुसार पुल के पिलर तैयार हो चुके हैं और अब स्लैब डालने का काम चल रहा है। अब तक करीब 42 मीटर तक स्लैब डाला जा चुका है। तीसरा स्लैब भी जल्द पूरा करने की बात कही जा रही है। अगर काम इसी तरह चलता रहा, तो जून तक पुल को बाइक और पैदल चलने के लिए खोलने की उम्मीद जताई जा रही है। बारिश से बढ़ेगी परेशानी बरसात का मौसम नजदीक है और ऐसे में काम पूरा होना बड़ी चुनौती बन गया है। बारिश शुरू होते ही तिपान नदी में पानी बढ़ जाएगा, जिससे निर्माण कार्य रुक जाएगा। अभी गांवों के लोग नदी में बनी अस्थायी पगडंडी से आते-जाते हैं, लेकिन बारिश में यह रास्ता भी बंद हो जाएगा। इससे दर्जनों गांवों का संपर्क टूटने का खतरा है। 28 गांवों को जोड़ता है यह पुल यह पुल सामतपुर, हर्री-बर्री, भगताबांध, पसला, बिजौड़ी, चातरहिया, रक्शा, कोलमी, अमगंवा, छुलकारी और फुनगा समेत करीब 28 गांवों को जोड़ता है। पुल नहीं होने के कारण लोगों को जिला मुख्यालय पहुंचने के लिए करीब 5 किलोमीटर लंबा अतिरिक्त रास्ता तय करना पड़ता है। लोग बोले-निर्माण कार्य में शुरू से हो रही लापरवाही ग्रामीणों का कहना है कि शुरू से ही निर्माण कार्य में लापरवाही बरती गई। अगर इसी तरह काम चलता रहा, तो पुल बनने में अभी एक साल और लग सकता है। यह पुल पहले भी क्षतिग्रस्त हो चुका है। साल 2019 में यह नदी में धंस गया था और 2020 में इसका दूसरा छोर भी खराब हो गया था। इसके बाद नए पुल के निर्माण की मांग उठी थी। सरकार ने 2021 में इसके निर्माण को मंजूरी दी थी, लेकिन अब तक काम पूरा नहीं हो पाया है। विभाग का कहना है कि अगर मजदूरों की कमी नहीं हुई और मौसम ने साथ दिया, तो जून तक पुल का काम काफी हद तक पूरा कर लिया जाएगा। फिलहाल ग्रामीणों को इंतजार है कि यह पुल जल्द बने, ताकि उनकी रोजमर्रा की परेशानी खत्म हो सके।



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