मक्सी रोड फोरलेन निर्माण में बिजली कंपनी ने नई चुनौती खड़ी कर दी। शहरी क्षेत्र की बिजली लाइन अंडरग्राउंड डालने के लिए उन्होंने सड़क निर्माण एजेंसी को 16 करोड़ का एस्टीमेट दिया। इसे देख अपेक्स कंपनी सकते में आ गई। मामले को लेकर एमपीआरडीसी के अफसरों व वरिष्ठ प्रशासनिक अफसरों को हस्तक्षेप करना पड़ा। इधर, बिजली कंपनी का इतना बड़ा एस्टीमेट देखकर कंपनी ने शहरी क्षेत्र में काम ही शुरू नहीं किया। कंपनी ने टेंडर शर्तों को निकालते हुए एमपीआरडीसी अफसरों से चर्चा की। विभागीय अफसरों ने इसे गंभीरता से लेते हुए मामला वरिष्ठ प्रशासनिक अफसरों तक पहुंचाया और वरिष्ठ अफसरों के हस्तक्षेप के बाद बिजली अफसर अपना अंडरग्राउंड केबल डालने का प्लान बदलने की सहमति दी। इसके बाद नए स्तर से अंडरग्राउंड लाइन वाले प्लान को खंभे गाड़कर लाइन शिफ्टिंग में बदल दिया। हालांकि इससे शहरी क्षेत्र में लाइन शिफ्टिंग की लागत घटकर 7 करोड़ के करीब हो गई। तब जाकर कहीं निर्माण एजेंसी शहरी क्षेत्र में काम करने के लिए आगे आई। कंपनी ने सड़क के दोनों तरफ सड़क की बाउंड्री तय करने के लिए नाली बनाने का काम शुरू करा दिया। पूरे फोरलेन की लाइन शिफ्टिंग की लागत भी घटी, 20 से 11.54 करोड़ हुई
शहरी क्षेत्र की लाइन शिफ्टिंग की लागत कम होने से पूरे हाइवे पर बिजली लाइन शिफ्टिंग की लागत भी कम हो गई है। शहरी क्षेत्र के पुराने एस्टीमेट के 16 करोड़ जोड़कर पूरे हाइवे की लागत 20 करोड़ के करीब पहुंच गई थी। यह लागत अब घटकर 11.54 करोड़ रह गई है। इधर, बात बनते ही एमपीआरडीसी विभाग के अफसरों ने 5 प्रतिशत सुपरविजन चार्ज बिजली कंपनी में जमा करवाकर इसकी लाइन शिफ्टिंग के लिए प्रक्रिया भी शुरू करवा दी है। चर्चा से हल निकला, एजेंसी ने शहरी क्षेत्र में काम भी शुरू कर दिया
बिजली कंपनी ने शुरुआत में अंडरग्राउंड लाइन शिफ्टिंग का 16 करोड़ का एस्टीमेट दिया था। इसमें काफी ज्यादा खर्च आता है। इसका असर पूरे प्रोजेक्ट पर पड़ता। इस कारण वरिष्ठ अधिकारियों के माध्यम से हुई चर्चा के बाद कंपनी ने बिजली पोल गाड़कर लाइन शिफ्टिंग का एस्टीमेट दिया है। शहरी क्षेत्र में निर्माण एजेंसी ने काम भी शुरू करा दिया है।
– विजय सिंह, संभागीय प्रबंधक एमपीआरडीसी
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