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Khandwa News: खेड़ापति हनुमान मंदिर के पुजारी संतोष शुक्ला ने कहा कि मंदिर में अर्जी लगाने से शनि, राहु और केतु जैसे ग्रहों के दुष्प्रभावों से राहत मिलती है. इसी वजह से काफी भक्त विशेष रूप से अपनी कुंडली के दोष दूर करने के लिए यहां आते हैं.
खंडवा. मध्य प्रदेश के खंडवा शहर के गणेश तलाई क्षेत्र में स्थित खेड़ापति हनुमान मंदिर न सिर्फ शहर बल्कि पूरे निमाड़ क्षेत्र में आस्था का बड़ा केंद्र माना जाता है. यह मंदिर अपनी प्राचीनता, चमत्कारिक मान्यताओं और अनोखी परंपराओं के कारण लोगों के बीच विशेष पहचान रखता है. यहां रोजाना बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते हैं और अपनी मनोकामनाएं लेकर भगवान के दरबार में हाजिरी लगाते हैं. इस मंदिर की सबसे बड़ी और खास बात यह है कि यहां स्थापित हनुमान जी की प्रतिमा स्वयंभू मानी जाती है. मान्यता है कि बजरंगबली पीपल के पेड़ के खोड़ यानी तने से स्वयं प्रकट हुए थे. इसी चमत्कारिक घटना के कारण इस स्थान को ‘खोड़या हनुमान’ के नाम से भी जाना जाता है. यह बात भक्तों के विश्वास को और मजबूत बनाती है और मंदिर की महत्ता को बढ़ाती है.
इस मंदिर में अर्जी लगाने की एक अनोखी परंपरा है, जो इसे अन्य मंदिरों से अलग बनाती है. भक्त यहां श्रीफल यानी नारियल चढ़ाकर अपनी मनोकामना भगवान के सामने रखते हैं. माना जाता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से यहां अर्जी लगाता है, उसकी हर इच्छा जरूर पूरी होती है.
मनोकामना पूरी होने पर चोला पूजन और भंडारा
जब भक्तों की मनोकामना पूरी हो जाती है, तो वे हनुमान जी का चोला पूजन कराते हैं. इसके साथ ही कई श्रद्धालु सवामणी या भंडारे का आयोजन भी करते हैं. मंदिर में सालभर यह परंपरा लगातार चलती रहती है, जिससे यहां हमेशा भक्तों की भीड़ बनी रहती है.
शनि और राहु-केतु दोष से मुक्ति की मान्यता
मंदिर के पुजारी संतोष शुक्ला के अनुसार, इस मंदिर में अर्जी लगाने से शनि, राहु और केतु जैसे ग्रहों के दुष्प्रभाव से राहत मिलती है. इसी कारण कई लोग विशेष रूप से अपनी कुंडली के दोष दूर करने के लिए यहां आते हैं. चोला पूजन के बाद भक्तों को मानसिक शांति और कष्टों से मुक्ति मिलने की मान्यता है.
मंगलवार और शनिवार को उमड़ती है भीड़
मंदिर में हर मंगलवार और शनिवार को विशेष पूजा-अर्चना की जाती है. इन दिनों दूर-दूर से श्रद्धालु यहां दर्शन करने पहुंचते हैं. हनुमान जयंती के मौके पर मंदिर को भव्य तरीके से सजाया जाता है, जहां दर्शन के लिए लंबी कतारें लग जाती हैं. भक्त नौकरी, व्यापार, स्वास्थ्य और पारिवारिक समस्याओं को लेकर भगवान के सामने अर्जी लगाते हैं. भक्तों का कहना है कि यहां से कोई भी खाली हाथ नहीं लौटता.
वर्षों पुरानी परंपरा और मजबूत विश्वास
यह मंदिर वर्षों पुराना है और इसकी परंपराएं आज भी उसी श्रद्धा के साथ निभाई जा रही हैं. स्थानीय लोगों के साथ-साथ बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं का भी इस मंदिर पर गहरा विश्वास है. यही वजह है कि यह मंदिर आज भी आस्था का बड़ा केंद्र बना हुआ है.
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राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.