पहलगाम होमस्टे मालिकों की सरकार से पर्यटन स्थलों को फिर से खोलने की अपील

पहलगाम होमस्टे मालिकों की सरकार से पर्यटन स्थलों को फिर से खोलने की अपील


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पहलगाम होमस्टे मालिकों की सरकार से पर्यटन स्थलों को फिर से खोलने की अपील

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Pahalgam Terror Attack: पिछले साल 22 अप्रैल को पहलगाम के बैसरन घाटी में हुए आतंकी हमले ने एक झटके में राज्य को दसियों साल पीछे धकेल दिया. उस हमले में 26 पर्यटकों की मौत हुई. इसके बाद राज्य में पर्यटन उद्योग बुरी तरह प्रभावित हुआ. कई पर्यटन स्थल बंद कर दिए गए, होमस्टे चलाने वाले युवा कर्ज और बेरोजगारी की बोझ तले दब गए. वे अब सरकार से सुरक्षित ढंग से पर्यटन स्थल खोलने की मांग कर रहे हैं.

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पहलगाम स्थित बैसरन घाटी में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत हो गई थी.

Pahalgam Terror Attack: जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद पर्यटन क्षेत्र में काफी विकास हुआ. युवा उद्यमियों ने सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर अपने घरों को होमस्टे में बदल दिया. ये होमस्टे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और आत्मनिर्भरता का नया माध्यम बने. लेकिन 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम के बैसरन घाटी में हुए आतंकवादी हमले ने इन युवा उद्यमियों की उम्मीदों पर गहरा आघात पहुंचाया. हमले में 26 पर्यटकों की मौत हो गई थी, जिसके बाद सुरक्षा कारणों से कई पर्यटन स्थल बंद कर दिए गए.

हमले का असर और युवाओं की मजबूरी

बैसरन घाटी हमला पर्यटन पर निर्भर स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा झटका साबित हुआ. होटल मैनेजमेंट में डिग्री प्राप्त बशारत नामक एक होमस्टे मालिक ने अपनी व्यथा सुनाते हुए बताया- मैंने अपनी सारी बचत और कर्ज लेकर पैतृक घर को होमस्टे में तब्दील किया था. पिछले साल हुए हमले ने मेरे बिजनेस को बुरी तरह प्रभावित किया. पर्यटकों की संख्या बहुत कम हो गई. गुजारा चलाने के लिए मैं बेंगलुरु चला गया, लेकिन जब पर्यटकों की आवाजाही में धीरे-धीरे सुधार दिखा तो मैं वापस लौट आया.

बशारत ने जम्मू-कश्मीर प्रशासन से अपील की कि सुरक्षा चिंताओं को समझते हुए बैसरन समेत बंद पड़े पर्यटन स्थलों को फिर से खोल दिया जाए. उन्होंने कहा कि हम सुरक्षा एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग करने को तैयार हैं. पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जो भी जरूरी कदम उठाने हों, हम उठाएंगे. हमें सिर्फ अपना रोजगार वापस चाहिए.

फिर गुलजार होने की उम्मीद

अनुच्छेद 370 हटने के बाद केंद्र और राज्य सरकार पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चलाईं. युवाओं को होमस्टे बनाने के लिए वित्तीय सहायता और प्रशिक्षण उपलब्ध कराया गया. इससे पहले पहलगाम जैसे क्षेत्रों में पर्यटन सीजन में होमस्टे पूरी क्षमता से चलते थे. लेकिन अप्रैल 2025 के हमले के बाद पर्यटक आवाजाही में भारी कमी आई. कई होमस्टे मालिकों को लोन चुकाने में मुश्किल हो रही है और परिवारों का गुजारा प्रभावित हुआ है. स्थानीय होमस्टे मालिकों का कहना है कि पर्यटन फिर से पटरी पर लौट रहा है, लेकिन बंद स्थलों के कारण पूरी क्षमता का उपयोग नहीं हो पा रहा. वे सरकार से मांग कर रहे हैं कि सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करते हुए पर्यटन स्थलों को चरणबद्ध तरीके से खोल दिया जाए. बशारत ने कहा कि हम जानते हैं कि सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है, लेकिन अगर पर्यटन रुका रहा तो युवा उद्यमी बर्बाद हो जाएंगे.

सरकार और स्थानीय सहयोग की अपील

जम्मू-कश्मीर सरकार पर्यटन को बढ़ावा देने के प्रयास कर रही है. मुख्यमंत्री ने पहले ही कुछ बंद स्थलों को चरणबद्ध तरीके से खोलने की बात कही है. होमस्टे मालिकों ने आश्वासन दिया है कि वे सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर काम करेंगे और पर्यटकों की सुरक्षा के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेंगे. अनुच्छेद 370 हटने के बाद घाटी में पर्यटन ने रिकॉर्ड स्तर छुआ था, लेकिन एक हमले ने सारी मेहनत पर पानी फेर दिया. स्थानीय युवा अब उम्मीद लगाए बैठे हैं कि सरकार जल्द से जल्द पर्यटन स्थल खोलकर उनकी आजीविका बहाल करेगी.

About the Author

संतोष कुमार

न्यूज18 हिंदी में बतौर एसोसिएट एडिटर कार्यरत. मीडिया में करीब दो दशक का अनुभव. दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, आईएएनएस, बीबीसी, अमर उजाला, जी समूह सहित कई अन्य संस्थानों में कार्य करने का मौका मिला. माखनलाल यूनिवर्स…और पढ़ें



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