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Jabalpur News: जब इस मशरूम को लेकर रिसर्च की गई, तो बेहद चौंकाने वाले तथ्य सामने आए. इसे ‘बोंडारजेविया बर्कलेई’ कहा जाता है. यह मशरूम मुख्य रूप से अमेरिका में ओक के पेड़ों पर उगता है.
जबलपुर. मध्य प्रदेश की ‘संस्कारधानी’ जबलपुर की पहाड़ियां इन दिनों चर्चा का केंद्र बनी हुई हैं. ऐतिहासिक मदन महल के जंगलों में एक ऐसा दुर्लभ मशरूम मिला है, जिसे देखकर हर कोई दंग है. यह मशरूम आमतौर पर भारत में नहीं बल्कि सात समंदर पार उत्तरी अमेरिका के जंगलों में पाया जाता है. दरअसल जबलपुर शहर के प्रकृति प्रेमी और सिविल इंजीनियर माधव नामदेव को फोटोग्राफी का जुनून है. इसी के चलते वह मदन महल स्थित शैलपर्ण उद्यान में प्रकृति की तस्वीरें ले रहे थे, तभी उनकी नजर एक सूखे पेड़ के तने पर पड़ी. वहां एक विशालकाय मशरूम किसी सफेद छतरी की तरह फैला हुआ था.
माधव नामदेव ने लोकल 18 से बातचीत में कहा कि इस जंगल में 15 से ज्यादा प्रजातियों के मशरूम देखे हैं लेकिन एक फीट से ज्यादा घेरे वाला यह मशरूम उन्होंने पहली बार देखा.
क्या है मशरूम का सच?
उन्होंने बताया कि जब इस मशरूम की फोटो के जरिए रिसर्च की गई, तो बड़े चौंकाने वाले तथ्य सामने आए. इस मशरूम को ‘बोंडारजेविया बर्कलेई’ कहा जाता है. यह मुख्य रूप से अमेरिका में ओक के पेड़ों पर उगता है. यह काफी वजनदार और बड़े छाते जैसा होता है. इसे बर्कले का पॉलीपोर भी कहा जाता है, जिसका घेरा 50 से 100 सेंटीमीटर तक चौड़ा हो सकता है. यह पंखुडियों के गुच्छे के रूप में उगता है, जिसका रंग क्रीम, मटमैला या हल्का भूरा होता है. इस मशरूम के भारत में जानकार कम हैं लेकिन कुछ आदिवासी इसका इस्तेमाल देसी दवाइयां बनाने में करते हैं.
खतरनाक भी हो सकता है यह मशरुम
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, जंगल में मिलने वाले ज्यादातर मशरूम जहरीले होते हैं. मदन महल में मिला यह मशरूम दिखने में तो खूबसूरत है लेकिन यह आम लोगों के लिए खाने योग्य नहीं है. केवल कुछ विशेष जनजातियों के पास ही इसे प्रोसेस करके खाने की पारंपरिक जानकारी होती है.
जबलपुर का खजाना है शैलपर्ण उद्यान
मदन महल किले के पास 1000 एकड़ में फैला शैलपर्ण उद्यान जैव विविधता का खजाना है. विशाल काली चट्टानों के बीच यहां सैकड़ों किस्म के पेड़-पौधे और जीव-जंतु रहते हैं. इस दुर्लभ विदेशी मशरूम के मिलने से अब प्रकृति प्रेमियों और रिसर्च करने वालों की दिलचस्पी इस इलाके में और बढ़ गई है.
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राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.