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पिता अमर सिंह राजपूत का 2018 में बीमारी की वजह से निधन हो गया था लेकिन वह चाहते थे कि उनकी बेटी पुलिस अफसर बने. पिता की बात ऋषिका के दिल को छू गई. बेटी के पुलिस में सिलेक्शन होने के बाद परिवार में खुशी का माहौल है. मां राजकुमारी राजपूत ने अपनी बेटी पर गर्व जताते हुए उसे बधाई और शुभकामनाएं दी और कहा कि उनके पिता का जो सपना था आज बेटी ने पूरा कर दिया है. हालांकि, ऋषिका की तैयारी यही नहीं रुकने वाली है अब मैं कांस्टेबल की नौकरी के साथ-साथ सब इंस्पेक्टर की तैयारी भी शुरू कर रहे हैं.
सागर. मध्य प्रदेश पुलिस आरक्षक भर्ती की फाइनल सिलेक्शन सूची ने सागर के सैकड़ों बच्चों का वर्दी पहनने का सपना पूरा कर दिया है, हाल ही में जारी हुए रिजल्ट में जिले भर के करीब 400 युवक युवतियों ने पुलिस आरक्षक की नौकरी हासिल कर कमाल कर दिया है. ऐसे ही एक 23 साल की बेटी ने अपने स्वर्गीय पिता का सपना पूरा करने के लिए दिन-रात मेहनत की और अब वह पुलिस कांस्टेबल बन गई हैं.
खास बात यह है कि ऋषिका राजपूत अपने परिवार की पहली ऐसी बेटी बनी है जिन्होंने सरकारी नौकरी पाने में सफलता हासिल की. ऋषिका जिस क्षेत्र से आती हैं वहां आसपास के 10-12 गांव में कोई भी लड़की सरकारी नौकरी में नहीं है. ऐसे क्षेत्र में वह उन बेटियों के लिए भी मिसाल बन गई है जो घर से निकलकर सरकारी नौकरी की तैयारी करना चाहती हैं और आगे बढ़ना चाहती हैं.
दो बार फेल होने के बाद टूटी उम्मीद
बता दें कि पुलिस की नौकरी पाने वाली ऋषिका गंभीरिया हाट राहतगढ़ ब्लॉक की निवासी हैं उनके पिता अमर सिंह राजपूत का 2018 में बीमारी की वजह से निधन हो गया था लेकिन वह चाहते थे कि उनकी बेटी पुलिस अफसर बने. पिता की बात ऋषिका के दिल को छू गई, इसके बाद उन्होंने कॉलेज की पढ़ाई के बाद ही तैयारी शुरू कर दी, 2023 में पहली बार कांस्टेबल की परीक्षा दी लेकिन उसमें सिलेक्शन नहीं हो पाया दूसरी बार आरपीएफ सब इंस्पेक्टर की भर्ती दी और इसमें भी निराशा हाथ लगी, तो ऋषिका को लगा कि उसके पिता का सपना सपना ही रह जाएगा और उसने तैयारी करना भी छोड़ दिया लेकिन जब बड़े भाई अरुण सिंह को पता चला की बहन ने तैयारी बंद कर दी है तब उन्होंने उसको मैदान में रहने के लिए मोटिवेट किया. उन्होंने कहा कि मैदान तो कायर लोग छोड़ते हैं.
इसके बाद किसी गाने कंपटीशन की तैयारी करना
ऋषिका ने बताया कि जब वह दसवीं क्लास में थी तब उनके पिताजी का निधन हो गया था लेकिन उनका सपना था कि वह एमपी पुलिस में जाएं गांव में सरकारी स्कूल में 12th तक की पढ़ाई की फिर ग्रेजुएशन करने के लिए मां के साथ सागर आ गई थी और जैसे ही ग्रेजुएशन हुआ तो पुलिस की तैयारी शुरू कर दी. सुबह 5:00 से 8:00 तक 3 घंटे खुद ही फिजिकल की तैयारी करती थी फिर घर पर आकर सेल्फ स्टडी करती, सुबह शाम 8 घंटे पढ़ाई करती थी इसमें कुछ उन्होंने ऑनलाइन और यूट्यूब वीडियो की भी मदद ली, जिनसे नोट्स तैयार किये, किसके साथ सबसे ज्यादा मॉक टेस्ट लगाए, pyq लगाए. एक और फायदा यह हुआ कि जब पुलिस कांस्टेबल का रिटन एग्जाम चल रहा था तो उन्हें लगभग 20 दिन का एक्स्ट्रा समय मिल गया था क्योंकि अक्टूबर से पेपर शुरू हुए थे और इनका नवंबर में था इस दौरान जो भी पेपर सोशल मीडिया पर अपलोड होते थे वह उनको भी हल करने का प्रयास करती थी जो उनके फाइनल पेपर में मददगार साबित हुए.
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