उज्जैन जिले में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के अंतर्गत कार्यरत संविदा अधिकारी, कर्मचारी और उपयंत्री लंबे समय से वेतन नहीं मिलने से आक्रोशित हो गए हैं। अपनी मांगों को लेकर जिले के समस्त तकनीकी अमले और कर्मचारियों ने 16 और 17 अप्रैल को दो दिवसीय सामूहिक अवकाश पर जाने का निर्णय लिया है। इससे मनरेगा के कई कार्य प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। मनरेगा अभियंता संघ मध्यप्रदेश की ओर से जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को अवगत कराया गया है कि जनपद पंचायतों में कार्यरत उपयंत्रियों को पिछले 8 माह से वेतन नहीं मिला है। वेतन न मिलने के कारण कर्मचारियों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। परिवार के दैनिक खर्च, बच्चों की स्कूल फीस और इलाज जैसे जरूरी खर्च पूरे करना मुश्किल हो गया है। लगातार आर्थिक अस्थिरता के चलते कर्मचारियों में मानसिक तनाव भी बढ़ रहा है, जिससे उनकी कार्यक्षमता प्रभावित हो रही है। कर्मचारियों का कहना है कि वेतन न मिलने के बावजूद उन्होंने जलगंगा संवर्धन योजना सहित शासन की अन्य महत्वपूर्ण योजनाओं में लगातार काम किया और जिले को बेहतर प्रदर्शन दिलाने में योगदान दिया। इस आंदोलन में जिले के प्रमुख उपयंत्री और समन्वयक—इंजी. गजेन्द्र कुमार कठाने, इंजी. शेख सिद्दीक कुरैशी, इंजी. सुमित प्रताप सिंह, इंजी. अनिल पांडे, इंजी. विनय जायसवाल, इंजी. कुंदन मुकाती और इंजी. आर.डी. किरार शामिल हैं। वहीं प्रांतीय स्तर पर संघ का नेतृत्व अध्यक्ष इंजी. सतीश समेले, उपाध्यक्ष इंजी. राघवेन्द्र शर्मा और सचिव इंजी. अनुराग राजपूत कर रहे हैं। संघ के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि वेतन भुगतान नहीं होने की स्थिति में सभी संविदा अधिकारी और कर्मचारी सामूहिक अवकाश पर रहेंगे, जिससे मनरेगा के कार्यों पर व्यापक असर पड़ सकता है।
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