अशोकनगर में रिलायंस स्मार्ट रिटेल लिमिटेड को महज आठ रुपए अधिक वसूलना महंगा पड़ गया है। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग, अशोकनगर ने शुक्रवार को कंपनी को अनुचित व्यापार प्रथा का दोषी मानते हुए उस पर एक लाख रुपए का जुर्माना लगाया है। आयोग ने पीड़ित उपभोक्ता को 20 हजार रुपए मुआवजा देने का भी आदेश दिया है। यह मामला न्यायाधीश आवास कॉलोनी निवासी संजीव सिंघल से जुड़ा है। सिंघल ने 1 अक्टूबर 2024 को रिलायंस स्मार्ट स्टोर से घरेलू सामान खरीदा था। खरीदारी के दौरान, 1 किलो सर्फ एक्सल ईजी वॉश डिटर्जेंट के पैकेट पर 136 रुपए एमआरपी अंकित थी, लेकिन बिल में उनसे 144 रुपए वसूले गए। जब उपभोक्ता ने इस पर आपत्ति जताई, तो स्टोर प्रबंधन ने अतिरिक्त राशि लौटाने से इनकार करते हुए कहा कि “मशीन से निकला बिल ही मान्य होगा”। कैशियर से हुई थी गलती
आयोग में सुनवाई के दौरान, कंपनी ने अपनी सफाई में कहा कि सिस्टम में मल्टीपल एमआरपी फीड होने और भीड़ के कारण कैशियर से गलती हुई थी। हालांकि, आयोग ने इस तर्क को सिरे से खारिज कर दिया। आयोग ने इसे केवल लापरवाही नहीं, बल्कि उपभोक्ता को भ्रमित करने वाली अनुचित व्यापार प्रथा करार दिया। आयोग ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि एमआरपी (अधिकतम खुदरा मूल्य) से अधिक कीमत वसूलना कानूनन अपराध है और यह लीगल मेट्रोलॉजी (पैकेज्ड कमोडिटीज) नियम 2011 का सीधा उल्लंघन है। आयोग ने कहा कि बड़े रिटेल स्टोर्स से यह अपेक्षा की जाती है कि वे अपने बिलिंग सिस्टम को अद्यतन रखें, अन्यथा हजारों उपभोक्ता ठगी का शिकार हो सकते हैं। आयोग ने अपने सख्त आदेश में रिलायंस स्मार्ट को निम्नलिखित भुगतान करने का निर्देश दिया है: आयोग ने यह भी चेतावनी दी कि यदि दो माह के भीतर इन राशियों का भुगतान नहीं किया गया, तो संबंधित राशि पर 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा। फैसले में यह भी उल्लेख किया गया कि बड़े रिटेल नेटवर्क में रोजाना हजारों ग्राहक खरीदारी करते हैं, ऐसे में सिस्टम को अद्यतन न रखना गंभीर लापरवाही है। आयोग ने स्पष्ट संदेश दिया है कि “छोटी रकम की अनदेखी” अब बड़े दंड का कारण बन सकती है।
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