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Hardik Pandya Statement: मुंबई इंडियंस की लगातार विफलता के बाद कप्तान हार्दिक पांड्या ने टीम की कमियों को बेबाकी से स्वीकार किया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि अब ‘ड्राइंग बोर्ड’ पर लौटकर रणनीतियों और व्यक्तिगत प्रदर्शन की समीक्षा करने का समय आ गया है. पांड्या के मुताबिक, टीम को अब कुछ कड़े और चुनौतीपूर्ण फैसले लेने होंगे. उन्होंने विपक्षी टीम के श्रेष्ठ प्रदर्शन की सराहना करते हुए खिलाड़ियों को अपनी जिम्मेदारी समझने और हार पर भी नसीहत दी, ताकि टीम दोबारा वापसी कर सके.
पंजाब से हार के बाद हार्दिक पंड्या ने कहा कि उन्हें समझ नहीं आ रहा कि वो इसपर क्या कहें.
नई दिल्ली. हार्दिक पांड्या का यह बयान सिर्फ एक कप्तान की हताशा नहीं, बल्कि मुंबई इंडियंस के उस दौर का प्रतिबिंब है जहां ‘सफलता का जादू’ कहीं खो गया. वानखेड़े स्टेडियम की चकाचौंध के पीछे छिपी उस रात की कहानी कुछ इस तरह बुनी जा सकती है. मैच खत्म होने के बाद जब लाइट्स हल्की होने लगीं, तो मैदान पर सन्नाटा पसर गया था. डगआउट में बैठे हार्दिक पांड्या की नजरें घास पर टिकी थीं, लेकिन दिमाग कहीं और था. विपक्षी टीम पंजाब किंग्स जीत का जश्न मना रही थी, वहीं मुंबई के फैंस भारी मन से स्टैंड्स खाली कर रहे थे. जब पांडया पोस्ट-मैच प्रेजेंटेशन के लिए माइक पर आए, तो उनके शब्दों में वह पुराना ‘स्वैग’ नहीं, बल्कि गुस्सा था.
हार्दिक पांडया (Hardik Pandya) ने ईमानदारी से हार को स्वीकार किया. पंजाब किंग्स के खिलाफ सात विकेट से हार के बाद पंड्या ने कहा, ‘सच कहूं तो, अभी मेरे पास कहने के लिए बहुत कुछ नहीं है. यह एक ऐसे कप्तान के बोल थे जो हार की वजहों के मलबे में सुराग तलाश रहा था. उन्होंने साफ किया कि अब वक्त मैदान पर पसीना बहाने से ज्यादा ‘ड्राइंग बोर्ड’ पर लौटने का है. टीम को यह समझना होगा कि कमी कहां है और क्या खिलाड़ी व्यक्तिगत रूप से फेल हो रहे हैं? क्या टीम का तालमेल बिगड़ गया है? या फिर हमारी रणनीतियां ही जंग खा चुकी हैं?
पंजाब से हार के बाद हार्दिक पंड्या ने कहा कि उन्हें समझ नहीं आ रहा कि वो इसपर क्या कहें.
‘सिक्का’ पलटने की कोशिश और कड़वा सच
मैच के विश्लेषण में हार्दिक ने तकनीकी पहलुओं पर भी बात की. उन्होंने पंजाब किंग्स टीम की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने हर विभाग में मुंबई को पछाड़ दिया. पांड्या ने कहा,’ जब गेंद रिवर्स स्विंग होने लगी, तो विपक्षी गेंदबाजों ने उसका बखूबी फायदा उठाया. ओस आने के बावजूद, जिससे बल्लेबाजी आसान होनी चाहिए थी, मुंबई के बल्लेबाज संघर्ष करते रहे. पांड्या ने बेबाकी से माना कि पंजाब किंग्स के गेंदबाजों ने मुंबई के बॉलर्स से बेहतर गेंदबाजी की, बेहतर बल्लेबाजी की और निश्चित रूप से बेहतर फील्डिंग की. यह हार सिर्फ रनों के अंतर की नहीं, बल्कि कौशल और जज्बे की हार थी.’
कठिन फैसलों का समय
कहानी का सबसे अहम मोड़ तब आया जब हार्दिक ने ‘कठिन फैसलों’ का जिक्र किया. आईपीएल जैसे बड़े टूर्नामेंट में जब टीम लगातार हारती है, तो कप्तान और मैनेजमेंट के सामने दो रास्ते होते हैं. या तो पुराने ढर्रे पर चलते रहें और चमत्कार की उम्मीद करें. या फिर कुछ कड़े फैसले लें, चाहे वह टीम कॉम्बिनेशन को लेकर हों या बड़े खिलाड़ियों को बाहर बैठाने को लेकर. हार्दिक के शब्दों में एक चेतावनी छिपी थी.अब जवाबदेही तय होगी. उन्होंने जोर देकर इस बात को कहा. यह संदेश टीम के हर सदस्य के लिए था कि हार का ठीकरा किसी एक पर नहीं फोड़ा जा सकता, लेकिन हर किसी को अपनी जिम्मेदारी लेनी होगी.
पंजाब ने 3 विकेट खोकर लक्ष्य हासिल कर लिया
पंजाब ने मुंबई के 196 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए प्रभसिमरन की 39 गेंद में 11 चौकों और दो छक्कों से नाबाद 80 रन की पारी और कप्तान श्रेयस अय्यर (66 रन, 35 गेंद, पांच चौके, चार छक्के) के साथ उनकी तीसरे विकेट के लिए 139 रन की साझेदारी की बदौलत 16.3 ओवर में तीन विकेट पर 198 रन बनाकर आसान जीत दर्ज करने में सफल रही. इससे पहले मौजूदा सत्र में अपना पहला मैच खेल रहे क्विंटन डिकॉक ने 60 गेंद में सात छक्कों और आठ चौकों से नाबाद 112 रन की पारी खेलने के अलावा नमन धीर (50 रन, 31 गेंद, तीन चौके, तीन छक्के) के साथ तीसरे विकेट के लिए 122 रन की साझेदारी की. जिससे मुंबई ने छह विकेट पर 195 रन बनाए. ये दोनों उस समय साथ आए जब टीम 12 रन पर दो विकेट गंवाने के बाद संकट में थी.
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करीब 15 साल से पत्रकारिता में सक्रिय. दिल्ली यूनिवर्सिटी से पढ़ाई. खेलों में खासकर क्रिकेट, बैडमिंटन, बॉक्सिंग और कुश्ती में दिलचस्पी. IPL, कॉमनवेल्थ गेम्स और प्रो रेसलिंग लीग इवेंट्स कवर किए हैं. फरवरी 2022 से…और पढ़ें