बड़वानी जिले के पाटी ब्लॉक में सड़क न होने के कारण ग्रामीण मरीजों को कपड़े की झोली में डालकर मुख्य सड़क तक ले जाने को मजबूर हैं। ग्राम पंचायत पीपरकुंड के वन कुंडी फलिया जिला मुख्यालय से करीब 55 किलोमीटर दूर है और विकास से अछूता है। वन कुंडी फलिया में 100 से अधिक परिवार रहते हैं, लेकिन आज तक यहां सड़क नहीं पहुंच पाई है। गांव तक पहुंचने का लगभग 6 से 7 किलोमीटर का रास्ता कच्चा, उबड़-खाबड़ और दुर्गम है। इस रास्ते पर चार पहिया वाहन तो दूर, एंबुलेंस का पहुंचना भी असंभव है। इसी वजह से बीमार लोगों को पक्के रास्ते तक पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को उन्हें कंधों पर उठाकर ले जाना पड़ता है। हाल ही में, गुरुवार को गांव के प्रदीप ने बताया कि वन कुंडी फलिया में एक 14 वर्षीय बच्चे की अचानक तबीयत खराब हो गई। उसे कपड़े की झोली में डालकर मुख्य सड़क तक लाया गया, जिसके बाद उसे पाटी अस्पताल में इलाज के लिए भेजा गया। रास्ते में हो जाती है डिलीवरी ग्रामीणों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति बीमार पड़ता है या किसी गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाना होता है, तो उन्हें 6 से 7 किलोमीटर तक बिना सड़क के सफर करना पड़ता है। इस दौरान कई बार गर्भवती महिलाओं की रास्ते में ही डिलीवरी हो चुकी है, और दुर्भाग्यवश कई जानें भी जा चुकी हैं। सड़क न होने का असर केवल स्वास्थ्य सुविधाओं तक ही सीमित नहीं है। यहां के आदिवासी परिवार सरकारी योजनाओं का लाभ भी ठीक से नहीं ले पाते। राशन की दुकानें चार से पांच किलोमीटर दूर हैं, जिससे राशन लाने के लिए या तो अतिरिक्त खर्च करना पड़ता है या उसे सिर पर ढोकर लाना पड़ता है। गांव के फतिया ने बताया कि इस क्षेत्र के लोग पिछले कई सालों से सड़क की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कई बार नेताओं और अधिकारियों से संपर्क किया है, लेकिन उनकी मांगें अनसुनी रह गई हैं। बड़वानी जिले से कई बड़े नेता और मंत्री रहे हैं, लेकिन उनके कार्यकाल में भी इन गांवों तक विकास नहीं पहुंच सका है, जिससे शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाएं भी दूर हैं। धरती आभा योजना में गांवों को चिह्नित किया बड़वानी एसडीएम भूपेंद्र रावत ने बताया कि धरती आभा योजना अंतर्गत कुछ गांवों को चिह्नित किया गया है। जहां 100 से ज्यादा की आबादी है, उन गांवों को सड़क से जोड़ने के लिए सड़क बनाई जाएंगी।
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