प्रदेश में हर 8वां फूड सैंपल फेल: आपकी थाली में शुद्धता कम, प्रोटीन गायब और सेहत बिगाड़ने वाला ‘धीमा जहर’ है ज्यादा – Bhopal News

प्रदेश में हर 8वां फूड सैंपल फेल:  आपकी थाली में शुद्धता कम, प्रोटीन गायब और सेहत बिगाड़ने वाला ‘धीमा जहर’ है ज्यादा – Bhopal News




आप जो खा रहे हैं, क्या वह वाकई आपको सेहत दे रहा है या चुपके से बीमार बना रहा है? मध्य प्रदेश में खाद्य सुरक्षा के दावों की पोल खुद सरकारी आंकड़े ही खोल रहे हैं। प्रदेश में साल भर के भीतर करीब 13 हजार 920 नमूने लिए गए, जिनमें से 1635 नमूने अमानक (घटिया या मिलावटी) पाए गए। यानी आपकी थाली तक पहुंचने वाला हर 8वां सैंपल फेल हो रहा है। डराने वाली बात यह है कि बाजार में ‘धीमा जहर’ परोसने वाले इन मिलावटखोरों पर सिस्टम का शिकंजा बेहद ढीला है; 1600 से ज्यादा नमूने फेल होने के बावजूद महज 22 मामलों में ही आपराधिक केस दर्ज हो सके हैं। आईसीएमआर की चेतावनी इस खतरे को और बड़ा कर देती है। आहार से प्रोटीन गायब हो रहा है और उसकी जगह रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट ले रहा है, जो वक्त से पहले गंभीर बीमारियों की ओर धकेल रहा है।
आपकी डाइट में 70% हिस्सा सिर्फ कार्ब्स और शुगर का: भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के ‘इंडिया डायबिटीज’ अध्ययन में देश के 18 हजार से अधिक लोगों के खान-पान का विश्लेषण किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय थाली में पोषण का संतुलन पूरी तरह बिगड़ चुका है।
हमारे शरीर को रोज जितनी ऊर्जा (कैलोरी) चाहिए, उसका 60 से 70 फीसदी हिस्सा हम केवल रिफाइंड चावल, गेहूं और अतिरिक्त शर्करा (चीनी) जैसे ‘लो-क्वालिटी’ कार्बोहाइड्रेट से ले रहे हैं। इसके साथ ही डाइट में ‘सैचुरेटेड फैट’ यानी संतृप्त वसा का स्तर तो बढ़ा है, लेकिन शरीर के निर्माण के लिए जरूरी प्रोटीन की मात्रा बहुत कम हो गई है। रिपोर्ट साफ तौर पर चेतावनी देती है कि खान-पान का यही पैटर्न सीधे तौर पर टाइप-2 डायबिटीज, पेट के मोटापे और हृदय संबंधी बीमारियों (कार्डियोमेटाबोलिक डिजीज) के जोखिम को बढ़ा रहा है। तीन साल से सैंपल की संख्या में लगातार गिरावट प्रदेश में पैकेटबंद और अन्य खाद्य पदार्थों की शुद्धता का ग्राफ साल दर साल गिर रहा है। 2021-22 में हालत सबसे खराब रही, जब 16059 सैंपल में 2900 फेल मिले। इसके बाद सैंपल लेने की संख्या ही हर साल कम होती गई, यह गिरावट लगातार तीन साल से जारी है। 2023-24 में 13998 सैंपल, 2024-25 में 13920 सैंपल और 2025-26 में यह संख्या घटकर 8236 रह गई है। इसी दौरान फेल सैंपल भी घटे हैं। वर्ष 2023-24 में 2022, वर्ष 2024-25 में 1635 और 2025-26 में 418 सैंपल फेल हुए। हालांकि 2025-26 का आंकड़ा पूरे साल का नहीं है, इसमें परिवर्तन संभव है, पर ये इतना तो बताता ही है कि साल दर साल सैंपल की संख्या कम हो रही है।



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