भिंड जिले की सिंध नदी में पनडुब्बी डालकर अवैध रेत उत्खनन किए जाने के विरोध में संत समाज ने मोर्चा खोल दिया है। प्रशासन की अनदेखी और एनजीटी (NGT) के नियमों का उल्लंघन होने पर संत समिति ने नदी संरक्षण सहित 7 सूत्रीय उद्देश्यों को लेकर जिलेभर में ‘सनातन पदयात्रा’ शुरू की है। पदयात्रा पहले दिन भिंड से फूप तक पहुंची है और आज (शनिवार) फूप से उमरी तक जाएगी। संत गांव-गांव पहुंचकर लोगों को नदियों को बचाने और सामाजिक बुराइयों को खत्म करने का संदेश दे रहे हैं।
पनडुब्बी से रेत खनन, प्रशासन को जानकारी फिर भी नियमों की अनदेखी भिंड में सिंध नदी में पनडुब्बी डालकर रेत का अवैध तरीके से उत्खनन किया जा रहा है। इसकी जानकारी प्रशासनिक अफसरों को होने के बावजूद एनजीटी के नियमों का पालन नहीं कराया जा रहा है। रेत खदानों का टेंडर लेने वाली कंपनी ने सभी नियमों को ताक पर रख दिया है। इसी कारण नदियों के संरक्षण की चिंता भिंड के संत समाज को सताने लगी है, जिसके चलते उन्होंने लोगों को जागरूक करने के लिए सनातन पदयात्रा निकाली है। पहले दिन की पदयात्रा में प्रमुख तौर पर दंदरौआ धाम के संत महामंडलेश्वर रामदास महाराज मौजूद रहे। उन्होंने नदियों के संरक्षण और अवैध उत्खनन पर रोक की बात कहते हुए इस पदयात्रा की प्रशंसा की। संत समिति अध्यक्ष ने बताए यात्रा के 7 प्रमुख उद्देश्य संत समिति के अध्यक्ष कालीदास महाराज ने पदयात्रा के 7 प्रमुख उद्देश्य बताए हैं। इनमें पहला उद्देश्य नदियों का संरक्षण और अवैध उत्खनन रोकना है। दूसरा- गांव की बेटी को अपनी बेटी मानना, तीसरा- गो रक्षा, चौथा- नशा बंदी, पांचवां- झूठी शान में लड़ाई-झगड़े पर रोक, छठवां- घरों में धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन, सातवां- छोटी उम्र के बच्चों को मोबाइल की लत से दूर कर संस्कारों की शिक्षा देना है। महाराज इन विषयों पर गांव-गांव पहुंचकर लोगों से चर्चा कर रहे हैं। “नदियां हमारी मां हैं, अवैध उत्खनन से मूल स्वरूप खत्म हो जाएगा” दैनिक भास्कर से चर्चा के दौरान संत समिति के अध्यक्ष कालीदास महाराज ने कहा, “नदियां हमारी संस्कृति का हिस्सा है। इन नदियों के संरक्षण को लेकर काम नहीं हो रहा है। नदियों से रेत को गलत तरीके से निकाली जा रही है। ये हमारी मां है। पूर्वज इनका संरक्षण करते आए है। जिस तरह से सिंध नदी में रेत का अवैध उत्खनन हो रहा है। इससे नदी का मूल स्वरूप खत्म हो जाएगा। जिले की प्राकृत्तिक संरचना खत्म हो जाएगी। नदियों के संरक्षण व अवैध उत्खनन के लिए लोगों को जागना होगा।” “जब तक गांव की बेटी को अपनी नहीं मानेंगे, दुष्कर्म बंद नहीं होंगे” कालीदास महाराज ने सामाजिक बुराइयों पर प्रहार करते हुए कहा, “गांव की बेटी हमारी बेटी होती है। ये भाव हमें सभी लोगों के बीच जगाना होगा। जब तब हम पड़ोसी, मोहल्ले या गांव की बेटी को अपनी बेटी की तरह नहीं मानेंगे। पूजेंगे तब तक दुष्कर्म जैसी घटनाएं बंद नहीं होगी। हम सभी को बेटियों के सम्मान के लिए आगे आना होगा। बुराई को दूर भगाना होगा।” गो रक्षा के लिए अभयारण्य बनाने और गायों का जीवन सुरक्षित करने की मांग सरकार से करते हुए महाराज ने कहा, “मेरा उद्देश्य है कि गांव गांव में नशाखोरी बंद हो। इस पर प्रतिबंध लगे। कारण यह है कि नशे के कारण परिवार उजड़ रहे है। लोग नशे की लत में अपराध भी कर रहे हैं। ये सामाजिक बुराई है। इसे खत्म करना होगा।” झूठी शान और मोबाइल की लत से बचाने की पहल महाराज ने आगे कहा, “भिंड जिले में लोगों के बीच झूठी शान में जीने की प्रवृत्ति है। अपना रौब व रूतबे दिखाने के लिए टशन लेकर चलते है। लड़ाई झगड़ा करते है मुकदमा वाजी होती है। ऐसे विचारों को त्यागने के लिए लोगों के बीच भाई चारे का संदेश दिया जाएगा।” उन्होंने बताया कि पहले घरों में शाम को रामचरित मानस पढ़ा जाता था, जो अब धीरे-धीरे बंद होता जा रहा है। लोगों को घरों में धार्मिक ग्रंथ पढ़ने और सनातन संस्कृति को प्रबल बनाने का संदेश दिया जाएगा। उन्होंने कहा, “आज के समय में छोटी उम्र के बच्चों में मोबाइल की लत लगती जा रही है। ये शारीरिक व मानसिक विकास में अवरोध पैदा कर रहा है। ऐसे बच्चों में सनातन व संस्कारों को जोड़ने के लिए प्रेरित किया जाए।”
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