सावधान! गेहूं का नया भूसा जानवरों के लिए खतरा, जान लें इसे देने का सही तरीका

सावधान! गेहूं का नया भूसा जानवरों के लिए खतरा, जान लें इसे देने का सही तरीका


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सावधान! गेहूं का नया भूसा जानवरों के लिए खतरा, जान लें इसे देने का सही तरीका

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Sidhi News: डॉ वीरेंद्र विक्रम सिंह ने लोकल 18 से कहा कि अगर पुराने चारे की कमी हो और नया भूसा देना ही पड़े, तो इसे सीधे नहीं देना चाहिए. इसे हरे चारे के साथ बराबर मात्रा में मिलाकर देना सबसे कारगर तरीका माना जाता है. हरा चारा पाचन को आसान बना देता है और भूसा पेट में रुककर दिक्कत पैदा नहीं करता.

सीधी. मध्य प्रदेश में इस समय गेहूं की कटाई तेजी पर है और इसके साथ ही घर-घर नया भूसा पहुंच रहा है. अधिकांश पशुपालक इसे ताजा समझकर तुरंत चारे के रूप में इस्तेमाल करने लगते हैं लेकिन यही जल्दबाजी कई बार पशुओं की सेहत पर भारी पड़ जाती है. नया भूसा अगर सही तरीके से न दिया जाए, तो यह फायदे की जगह नुकसान भी पहुंचा सकता है. सीधी के पशु अस्पताल के चिकित्सक डॉ वीरेंद्र विक्रम सिंह ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए बताया कि गेहूं से निकला नया भूसा काफी सख्त होता है और इसमें फाइबर और लिग्निन की मात्रा ज्यादा रहती है. यही कारण है कि पशु इसे आसानी से पचा नहीं पाते. यदि इसे अधिक मात्रा में अकेले ही खिला दिया जाए, तो पशुओं में पेट फूलना, कब्ज, गोबर कम होना, अपच और गैस बनने जैसी समस्याएं शुरू हो सकती हैं. कई बार पशुपालक यह सोचकर ज्यादा मात्रा में नया भूसा दे देते हैं कि यह ताजा है, इसलिए ज्यादा फायदेमंद होगा लेकिन बिना संतुलन के यह नुकसानदेह साबित हो सकता है.

डॉ सिंह बताते हैं कि अगर पुराने चारे की कमी हो और नया भूसा देना ही पड़े, तो इसे सीधे नहीं खिलाना चाहिए. इसे हरे चारे के साथ बराबर मात्रा में मिलाकर देना सबसे बेहतर तरीका माना जाता है. हरा चारा पाचन को आसान बनाता है और भूसा पेट में रुककर समस्या पैदा नहीं करता. इससे पशु आराम से जुगाली कर पाते हैं और उनका पाचन तंत्र संतुलित बना रहता है. यह छोटी सी सावधानी पशुओं को कई बीमारियों से बचा सकती है.

भूसा खिलाने का सबसे असरदार तरीका
उन्होंने कहा कि नया भूसा खिलाने का सबसे असरदार तरीका है कि इसे पहले पानी में भिगो लिया जाए. भिगोने से भूसा नरम हो जाता है, जिससे पशु इसे आसानी से चबा और पचा लेते हैं. पशु चिकित्सक के अनुसार, इसमें मिनरल मिक्सचर या थोड़ा गुड़-पानी मिलाने से इसका पोषण और बढ़ जाता है. इससे पाचन बेहतर होता है और पेट से जुड़ी समस्याएं कम होती हैं. खासकर दूध देने वाले पशुओं के लिए भिगोया हुआ भूसा अधिक लाभकारी माना जाता है.

नया भूसा पूरी तरह नुकसानदेह नहीं
डॉ वीरेंद्र विक्रम सिंह ने आगे कहा कि नया भूसा पूरी तरह नुकसानदेह नहीं है बल्कि इसे सही तरीके से देने पर यह काफी फायदेमंद साबित हो सकता है. यदि पशुपालक हरा चारा, सूखा चारा, मिनरल मिक्सचर और पर्याप्त पानी का संतुलन बनाकर पशुओं को खिलाएं, तो उनकी सेहत बेहतर रहती है. पाचन सही रहने पर पशु अधिक पोषण लेते हैं, जिसका सीधा असर दूध उत्पादन पर भी पड़ता है. ऐसे में जरूरी है कि पशुपालक जल्दबाजी में केवल नया भूसा न दें बल्कि थोड़ी समझदारी से इसका उपयोग करें. सही संतुलन और उचित तरीके से दिया गया यही भूसा पशुओं की सेहत सुधारने, दूध उत्पादन बढ़ाने और पशुपालन की लागत कम करने में अहम भूमिका निभा सकता है.

About the Author

Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.



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