सिंगरौली में बैढ़न स्थित बैंक ऑफ महाराष्ट्र से 5 हथियारबंद बदमाश 15 करोड़ का सोना और 20 लाख कैश लेकर भागे थे।
मध्य प्रदेश के सिंगरौली में 15 करोड़ की डकैती मामले में पुलिस ने भले ही एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन चार अभी भी फरार हैं। सोना और पूरी रकम भी बरामद नहीं की जा सकी है। गिरफ्तार आरोपी कमलेश 8 दिन की पुलिस रिमांड पर है।
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दैनिक भास्कर ने मामले की पड़ताल की, तो तीन लापरवाही सामने आईं। पहली- बैंक में शुरुआत से ही गार्ड तैनात नहीं थे। दूसरी- पुलिस डकैती की सूचना मिलने के 20 मिनट देरी से पहुंची और तीसरी लापरवाही यह रही कि बदमाश चेक पॉइंट से आसानी से भाग निकले।
इससे बैंक की सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस की मुस्तैदी पर सवाल खड़े हो गए हैं। बता दें कि शुक्रवार दोपहर करीब 1 बजे बैढ़न स्थित बैंक ऑफ महाराष्ट्र से 5 हथियारबंद बदमाश करीब 10 किलो सोना और 20 लाख कैश लेकर भाग गए थे। सोने की कीमत करीब 15 करोड़ आंकी गई है। पढ़िए, रिपोर्ट…
बैंक ऑफ महाराष्ट्र से डकैत करीब 10 किलो सोना और 20 लाख रुपए लेकर भागे थे।
पिछले आठ साल से बैंक में सिक्योरिटी गार्ड नहीं
सिंगरौली के विंध्य नगर क्षेत्र में 2018 में बैंक ऑफ महाराष्ट्र की छोटी ब्रांच खोली गई थी। यह अभी तक किराए की बिल्डिंग में चल रही है। शाखा में सुरक्षा के नाम पर सीसीटीवी कैमरे तो हैं, लेकिन सिक्योरिटी गार्ड शुरुआत से ही नहीं हैं। बैंक के अंदर मैनेजर, डिप्टी मैनेजर, कैशियर और एक चपरासी रहता है। बैंक रोजाना सुबह 9 बजे खुलती है और करीब 4 बजे बंद हो जाती है।
स्थानीय निवासी बबलू शुक्ला बताते हैं कि 2018 से ही वह बैंक के ग्राहक हैं। इस दौरान कभी गार्ड नहीं देखा। जोनल ऑफिसर ओंकार प्रसाद ने बताया कि पहले बैंक में गार्ड रखने की व्यवस्था थी। बाद में बैंक मैनेजमेंट ने अपना प्रॉफिट दिखाने और खर्च कम करने के लिए गार्ड की नियुक्ति बंद कर दी। हालांकि, एटीएम में गार्ड की व्यवस्था होती है।
सूचना के बाद 20 मिनट देरी से पहुंची पुलिस
फोर लेन पर स्थित बैंक से थाना करीब डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर है। थाने से बैंक तक आने में करीब 7-8 मिनट लगते हैं। इसके बावजूद डकैती की सूचना पर पुलिस को यहां तक पहुंचने में करीब 20 मिनट लगे।
वारदात के बाद 1 बजकर 10 मिनट पर पुलिस को सूचना मिल गई थी, लेकिन यहां 12 बजकर 30 मिनट पर पहुंची। नतीजा, बदमाश आसानी से भागने में सफल रहे।
एक पुलिस अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि आरोपियों के हथियारबंद होने की जानकारी थी, जिसके चलते तैयारी में समय लगा।

सूचना के बाद पुलिस करीब 20 मिनट देरी से मौका-ए-वारदात पर पहुंची।
चेक पॉइंट से निकलकर आसानी से भागे बदमाश
सीसीटीवी कैमरों में बदमाश बाइक से भागते हुए नजर आ रहे हैं। वारदात के बाद वे मस्जिद तिराहा, अंबेडकर चौक से होकर शहर से बाहर निकल गए। यहां पुलिस के चेक पॉइंट भी रहते हैं, लेकिन समय पर इन्हें अलर्ट नहीं किया गया, जिससे आरोपियों को भागने में आसानी हुई। शुरुआती समय में पुलिस को स्पष्ट नहीं था कि आरोपी किस दिशा में भागे हैं।
आरोपी दो बाइक से चेक पॉइंट मस्जिद तिराहे से तुलसी मार्ग होते हुए दूसरे चेक पॉइंट अंबेडकर चौक पहुंचे। यहां से बीजपुर रोड होते हुए छत्तीसगढ़ की सीमा में प्रवेश कर गए। यह दूरी करीब 35 किलोमीटर की है, जिसे आरोपियों ने बाइक से 20-25 मिनट में तय किया होगा। जब तक सीसीटीवी फुटेज जुटाए गए, तब तक देर हो चुकी थी। सवाल उठ रहा है कि वायरलेस के माध्यम से अन्य चेक पॉइंट्स को अलर्ट क्यों नहीं किया गया?

अंबेडकर चौराहे पर लगे सीसीटीवी कैमरे में आरोपी बाइक से भागते नजर आ रहे हैं।
बैंक में अलार्म भी दिखावे का
बैंक में अलर्ट करने के लिए अलार्म लगा है, यह भी सिर्फ दिखावे का है। इसके तीन स्विच हैं। पहला मैनेजर, दूसरा कैशियर और तीसरा डिप्टी मैनेजर के पास रहता है।
जोनल मैनेजर ओंकार प्रसाद का कहना है कि अगर अलार्म बजा भी देते हैं, तो कोई नहीं आता। यह लगा जरूर है, लेकिन दिखावे का है। कारण कि यहां गार्ड नहीं है। इसे पुलिस कंट्रोल रूम में होना चाहिए।
उन्होंने बताया कि पुणे स्थित बैंक मुख्यालय को जानकारी दे दी गई है। सेंट्रलाइज्ड मॉनिटरिंग सिस्टम लागू करने की योजना पर विचार किया जा रहा था, जिसे अब लागू किया जा सकता है। इससे सभी शाखाओं की गतिविधियों पर मुख्यालय से नजर रखी जा सकेगी।
सामान्य कपड़े, नए आईफोन से शक
आरपीएफ थाना प्रभारी रामविलास के मुताबिक, सिंगरौली-पटना ट्रेन में गार्ड को एक शख्स सामान्य कपड़े पहने दिखा लेकिन उसके पास नया आईफोन था। गार्ड को यह बात खटकी। उसके पास गए, तो वह असहज हो गया। उसके पास एक झोला भी था, जिसे उसने गोद में ले रखा था।
गार्ड ने मुझे सूचना दी। मैंने उस पर नजर रखने के लिए कहा। शक के आधार पर रेहड़ी स्टेशन पर उसे उतार लिया। उसने भागने का प्रयास किया, तो शक मजबूत हो गया। आरपीएफ थाने लेकर आए। उसने अपना नाम कमलेश कुमार निवासी नालंदा बताया।

कोर्ट ने आरोपी कमलेश को 8 दिन की पुलिस रिमांड पर सौंपा है।
आरोपी बोला- मां के इलाज के लिए रुपए लाया हूं
थाना प्रभारी रामविलास ने बताया कि कमलेश के पास से 15 लाख 20 हजार रुपए और 61 ग्राम सोना मिला। पूछताछ में उसने गुमराह करने की कोशिश की। कहा- मैं कर्ज लेकर रुपए लाया हूं। घर पर मां बीमार है, उसका इलाज कराना है।
जांच के दौरान मोबाइल में कमलेश के भाई का नंबर मिला। उसी के मोबाइल से फोन किया। पुलिस ने जब मां के बीमार होने की बात बताई, तो उसने मना कर दिया। इसके बाद पुलिस ने सख्ती की, तो कमलेश ने डकैती की कहानी उगल दी।
सूत्रों के मुतबिक, इसी ट्रेन में उसका दूसरा साथी भी था, जो पुलिस को देखकर भाग गया। बाकी तीन आरोपी छत्तीगढ़ की तरफ भागे हैं।
सीएसपी उमेश प्रजापति ने बताया कि आसपास के राज्यों में आरोपियों के फोटो सर्कुलेट करवा दिए हैं। जल्द ही सभी को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
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