Last Updated:
भोपाल में बढ़ते अपराधों के बीच पुलिस कमिश्नरेट ने बड़ा कदम उठाया है. शहर के सभी 36 थानों में ग्रेडिंग सिस्टम लागू किया जाएगा. हर महीने अपराध नियंत्रण, शिकायत निपटान, पेट्रोलिंग और रिस्पॉन्स टाइम के आधार पर रैंकिंग होगी. बेहतर थानों को इनाम मिलेगा, जबकि खराब प्रदर्शन पर ट्रेनिंग और कार्रवाई की जाएगी.
भोपाल के सभी 36 थानों में जल्द ही “ग्रेडिंग सिस्टम” लागू किया जाएगा.
शिवकांत आचार्य
भोपाल. राजधानी में लगातार बढ़ती आपराधिक घटनाओं ने कानून व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. पिछले एक महीने में लूट, चाकूबाजी, गोलीबारी और हत्या जैसी कई घटनाओं ने शहरवासियों की चिंता बढ़ाई है. अलग-अलग थाना क्षेत्रों से सामने आए मामलों ने यह संकेत दिया है कि अपराधियों के हौसले बुलंद हैं. ऐसे माहौल में अब भोपाल पुलिस कमिश्नरेट ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाने का फैसला किया है. शहर के सभी 36 थानों में जल्द ही “ग्रेडिंग सिस्टम” लागू किया जाएगा, ताकि थानों की जवाबदेही तय हो सके और पुलिसिंग में सुधार लाया जा सके.
यह मॉडल पहले से इंदौर में लागू है और वहां इसके सकारात्मक नतीजे सामने आने का दावा किया जा रहा है. अब उसी तर्ज पर भोपाल में हर थाने के प्रदर्शन को अंकों के आधार पर परखा जाएगा. बेहतर काम करने वाले थानों को पुरस्कृत किया जाएगा, जबकि खराब प्रदर्शन करने वालों को प्रशिक्षण और कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है. पुलिस अधिकारियों का मानना है कि इससे थानों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, रिस्पॉन्स टाइम सुधरेगा और अपराध नियंत्रण में मदद मिलेगी.
क्यों जरूरी पड़ा यह फैसला
भोपाल में हाल के दिनों में कई गंभीर वारदातें सामने आई हैं. अलग-अलग इलाकों में लूट, हमले और हत्या के मामलों ने पुलिस की रणनीति पर सवाल उठाए हैं. अधिकारियों का मानना है कि केवल कार्रवाई नहीं, बल्कि सिस्टम आधारित मॉनिटरिंग की भी जरूरत है. इंदौर में इसी तरह का सिस्टम पहले से लागू है. वहां थानों के बीच बेहतर प्रतिस्पर्धा और कार्यप्रणाली में सुधार की बात कही जाती है.
क्या है ग्रेडिंग सिस्टम
ग्रेडिंग सिस्टम के तहत शहर के सभी 36 थानों को हर महीने अलग-अलग पैरामीटर पर अंक दिए जाएंगे. इन अंकों के आधार पर थानों की रैंकिंग तैयार होगी. शीर्ष प्रदर्शन करने वाले थानों को सम्मानित किया जाएगा. थानों का मूल्यांकन अपराध नियंत्रण, शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई, केस डिस्पोजल, पेट्रोलिंग और संवेदनशील मामलों में रिस्पॉन्स टाइम जैसे बिंदुओं पर किया जाएगा. यानी सिर्फ अपराध दर्ज करना ही नहीं, बल्कि समाधान की गति भी मायने रखेगी.
खराब प्रदर्शन पर क्या होगा
सबसे नीचे रहने वाले थाना प्रभारियों और स्टाफ को 10 दिन की ट्रेनिंग दी जाएगी. लगातार लापरवाही मिलने पर सख्त प्रशासनिक कार्रवाई भी संभव है. सूत्रों के अनुसार, जरूरत पड़ने पर निलंबन तक की कार्रवाई हो सकती है. भोपाल में भी उम्मीद है कि यह मॉडल स्थानीय जरूरतों के अनुसार असर दिखाएगा.
पूर्व अफसर ने किया स्वागत, बताया वक्त की जरूरत
सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी सलीम खान ने इसे सकारात्मक पहल बताया है. उनका कहना है कि जवाबदेही तय होने से काम में तेजी आएगी. विशेषज्ञ मानते हैं कि डेटा आधारित मूल्यांकन आधुनिक पुलिसिंग का अहम हिस्सा है. ग्रेडिंग सिस्टम की घोषणा के बाद अब सबसे बड़ा सवाल इसके क्रियान्वयन का है. नागरिकों को उम्मीद है कि यह केवल कागजी योजना बनकर न रह जाए. अगर सिस्टम पारदर्शी और सख्ती से लागू हुआ तो अपराध नियंत्रण में असर दिख सकता है.
About the Author
सुमित वर्मा, News18 में 4 सालों से एसोसिएट एडीटर पद पर कार्यरत हैं. बीते 3 दशकों से सक्रिय पत्रकारिता में अपनी अलग पहचान रखते हैं. देश के नामचीन मीडिया संस्थानों में सजग जिम्मेदार पदों पर काम करने का अनुभव. प…और पढ़ें