अस्पताल के गेट पर थमीं बुजुर्ग की सांसें, 3 झटकों ने लौटाई जिंदगी, हैरान करने वाली घटना

अस्पताल के गेट पर थमीं बुजुर्ग की सांसें, 3 झटकों ने लौटाई जिंदगी, हैरान करने वाली घटना


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ग्वालियर के जिला अस्पताल मुरार में डॉक्टरों ने कमाल कर दिया. अस्पताल पहुंचते ही कार्डियक अरेस्ट का शिकार हुए एक 70 वर्षीय बुजुर्ग की धड़कनें पूरी तरह रुक चुकी थीं. लेकिन, डॉक्टरों ने उन्हें मौत के मुंह से बाहर निकाल लिया. जानें क्या हुआ था…

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Gwalior News: ग्वालियर के जिला अस्पताल मुरार में बीते मंगलवार की सुबह किसी फिल्मी सीन जैसी रही, जहां डॉक्टरों ने अपनी सूझबूझ से एक 70 साल के बुजुर्ग को मौत के दरवाजे से वापस खींच लिया. यहां डॉक्टरों ने ‘देवदूत’ की भूमिका निभाते हुए एक ऐसी जिंदगी बचा ली, जिसकी उम्मीद लगभग खत्म हो चुकी थी.

एंट्री करते ही गिरे बुजुर्ग
मुरार के रहने वाले एक बुजुर्ग सुबह करीब 9 बजे इलाज के लिए जिला अस्पताल पहुंचे थे. वे जैसे ही इमरजेंसी वार्ड के दरवाजे के अंदर आए, अचानक बेहोश होकर गिर पड़े. अस्पताल की दहलीज पर कदम रखते ही उन्हें गंभीर कार्डियक अरेस्ट आया था.

डॉक्टरों ने संभाला मोर्चा
ड्यूटी पर तैनात मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. मुकेश तोमर ने बिना एक पल गंवाए मोर्चा संभाला. शुरुआती जांच और ECG रिपोर्ट ने डॉक्टरों के होश उड़ा दिए. बुजुर्ग को बहुत ही सीवियर हार्टअटैक आया था. उनकी नब्ज गिर रही थी और सांसें लगभग थम चुकी थीं. मरीज पूरी तरह मौत के करीब पहुंच चुके थे.

3 झटकों में लौटी धड़कन
डॉ. मुकेश तोमर और उनकी टीम ने तुरंत सीपीआर (CPR) देना शुरू किया. हालात बिगड़ते देख मरीज को बचाने के लिए इलेक्ट्रिक शॉक यानी डिफिब्रिलेटर का सहारा लिया गया. डॉ. तोमर ने बताया कि उन्होंने 2-2 मिनट के अंतराल पर मरीज को तीन बार बिजली के झटके दिए. इन कोशिशों के बाद चमत्कार हुआ और बुजुर्ग की धड़कनें धीरे-धीरे वापस आने लगीं.

वेंटिलेटर सपोर्ट और शिफ्टिंग
धड़कन लौटने के बाद डॉ. तोमर ने हार्ट ब्लॉकेज के लिए खून पतला करने का जरूरी इंजेक्शन दिया. फौरन एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. दिलीप पंडोलिया को बुलाया गया. उन्होंने मरीज को वेंटिलेटर सपोर्ट पर लिया और जीवन रक्षक दवाएं शुरू कीं. जब मरीज की हालत थोड़ी स्थिर हुई, तो उन्हें आगे के इलाज के लिए जेएएच (JAH) के कार्डियोलॉजी विभाग में सुरक्षित शिफ्ट कर दिया गया.

गोल्डन ऑवर सबसे महत्वपूर्ण
सिविल सर्जन डॉ. राजेश कुमार शर्मा के मुताबिक, हार्ट अटैक के मामलों में शुरुआती समय यानी ‘गोल्डन ऑवर’ सबसे महत्वपूर्ण होता है. अगर डॉक्टरों की टीम ने तुरंत रिस्पॉन्स न दिया होता, तो बुजुर्ग की जान बचाना नामुमकिन था. अस्पताल में मौजूद संसाधनों और डॉक्टरों की फुर्ती ने इस बुजुर्ग को नई जिंदगी दे दी.

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Rishi mishra

एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें



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