Success Story: आज हम आपको एक ऐसी बेटी की कहानी बताने जा रहे हैं. जिनकी परवरिश तो गांव में रहकर हुई, लेकिन सपने बड़े थे. मध्य प्रदेश के सागर जिले की भारती ठाकुर, जिन्होंने कक्षा 12वीं के दौरान डॉक्टर बनने का सपना देखा था. सरकारी कॉलेज न मिलने की वजह से उन्होंने सागर के डॉ हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय से ही बीएससी-एमएससी की पढ़ाई पूरी की. जब डॉक्टर बनने का सपना टूट गया तो उन्होंने डिप्टी कलेक्टर बनने का सोचा, लेकिन पहले प्रयास में उन्हें सफलता नहीं मिली. इसके बाद उन्होंने इंदौर में रहकर तैयारी की और चौथे प्रयास में जनपद सीईओ के पद पर चयनित हुईं.
किसान परिवार में पली-बढ़ी
भारती बताती हैं कि वह सागर जिले के केसली तहसील के जनकपुर गांव से आती हैं. उनके पिता चंद्रभान सिंह एक किसान हैं वहीं मां गृहिणी हैं. उनका परिवार गांव में रहता था तो उनकी प्रारंभिक शिक्षा भी गांव में ही रहकर हुई. प्राइमरी एजुकेशन की बात करें तो उन्होंने सरस्वती शिशु मंदिर से पढ़ाई की है. इसके बाद शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में 12वीं तक पढ़ाई की.
सरकारी कॉलेज में पढ़ीं
भारती ठाकुर बताती हैं कि मैंने 11वीं कक्षा में बायो स्ट्रीम चुनी, क्योंकि मुझे डॉक्टर बनना था. इसके लिए मैंने मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम भी दिया. लेकिन सरकारी एमबीबीएस कॉलेज नहीं मिल रहा था. बीडीएस के सरकारी कॉलेज मिल रहे थे. लेकिन ये मुझे नहीं करना था. मैंने सेंट्रल यूनिवर्सिटी का एंट्रेंस एग्जाम भी दे रखा था तो फिर मैंने डॉ हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय सागर में एडमिशन ले लिया. यहां से मैंने केमिस्ट्री, बॉटनी और जूलॉजी से बीएससी कोर्स कंप्लीट किया. इसके बाद यहीं साल 2017 में बॉटनी से एमएससी पूरा किया. बीएससी कोर्स में एडमिशन लिया तो था. एमबीबीएस का एंट्रेंस एग्जाम भी देना था, लेकिन फिर इसी में आगे बढ़ गई और एमएससी कंप्लीट कर लिया.
सेल्फ स्टडी से क्रैक किया
एमएससी कंप्लीट होने के बाद बहुत सारे कंपीटीटिव एग्जाम सर्च किए. किस एग्जाम की तैयारी करनी चाहिए? कुछ महीने यही सोचती रही लेकिन फिर मैंने एमपीपीएससी राज्य सेवा परीक्षा देनी की सोची.
साल 2018 में फर्स्ट अटेम्प्ट
पहली बार साल 2018 में एमपी पीएससी राज्य सेवा परीक्षा दी थी. जिसके लिए मैंने 3 महीने ही तैयारी की थी. प्रीलिम्स परीक्षा का कट ऑफ बहुत हाई गया था फिर भी मेरा प्री क्वालिफाई हो गया था. इससे मेरा भी कॉन्फिडेंस बढ़ा और पापा भी उत्साहित थे कि बेटी इस एग्जाम को पक्का क्रैक करेगी. इसलिए प्रीलिम्स क्लियर होने के बाद इंदौर में जाकर कोचिंग ज्वाइन की, लेकिन मेंस क्लीयर नहीं हुआ. मैंने कुछ ही महीनों में कोचिंग छोड़ दी. क्योंकि मुझे समझ आ गया था कि ये एग्जाम अपनी ही बनाई स्मार्ट स्ट्रेटजी से निकलेगा. कोचिंग में समय खराब करने से कोई मतलब नहीं है. इसलिए मैंने खुद ही तैयारी शुरू कर दी.
साल 2019 में सेकंड अटेम्प्ट
साल 2019 में एक बार फिर से एग्जाम दिया. इस अटेम्प्ट में प्री परीक्षा के साथ मेंस परीक्षा भी पास की और इंटरव्यू तक पहुंची लेकिन मेरिट में नाम नहीं आया. बहुत निराश हुई लेकिन फिर खुद को मोटिवेट किया और एक बार फिर से तैयारी में जुट गई.
साल 2022 में थर्ड अटेम्प्ट
साल 2022 में फिर से प्री-परीक्षा में अपीयर हुई. पिछली बार की तरह इस बार भी इंटरव्यू तक पहुंची, लेकिन फाइनल सेलेक्शन नहीं हुआ. दो बार इंटरव्यू तक पहुंची लेकिन जब दोनों बार मेरिट में नाम नहीं आया, तो मेरा विश्वास भी डगमगाने लगा था. हालांकि, मन में उम्मीद की किरण थी कि अगली बार पक्का क्लीयर हो जाएगा लेकिन फेल होने का डर भी था. इन असफलताओं के दौरान ये भी सोचती थी कि जितना समय तैयारी में दिया है अगर एमबीबीएस ही कर लेती, तो डॉक्टर बनकर लाइफ सेट हो जाती. लेकिन मम्मी-पापा ने एक बार फिर मन का हौसला बढ़ाया और एग्जाम देने के लिए मेंटली तैयार किया.
साल 2023 के तीसरे इंटरव्यू में मिली सफलता
साल 2023 में एक बार फिर से इंटरव्यू तक पहुंची. फाइनल रिजल्ट आने से पहले मन में एक डर था कि फिर से फाइनल सेलेक्शन न रुक जाए. मेरिट सूची जारी की गई. लिस्ट में जैसे ही रोल नंबर के साथ भारती ठाकुर नाम देखा तो खुशी के मारे फूली नहीं समा रही थी. साल 2018 से 2023 आ गया. इतने सालों की मेहनत का नतीजा सालों बाद मिला. हालांकि, मेरी पहली प्राथमिकता डिप्टी कलेक्टर बनने की थी. वहीं दूसरी प्राथमिकता जनपद सीईओ, सीएमओ थी.
साल 2026 में मिली पोस्टिंग
अप्रैल 2026 में फील्ड पर मेरी पहली पोस्टिंग छतरपुर जिले के लवकुश नगर में जनपद सीईओ के पद पर हुई है. ग्रामीण क्षेत्रों के लिए जो भी योजनाएं संचालित होती हैं, उनका सही से क्रियान्वयन हो यही मेरा उद्देश्य है.
हिंदी मीडियम से दी परीक्षा
भारती बताती हैं कि मैंने हिंदी माध्यम से ही मेंस परीक्षा दी थी. इसलिए हिंदी मीडियम के एसपिरेंट्स भी इसमें सबसे ज्यादा सफल होते हैं. उन्हें भी मेंस में अच्छे मार्क्स मिलते हैं.
डिप्टी कलेक्टर बनना है ख्वाहिश
भारती बताती हैं कि अभी मेरी उम्र 27 साल है. फिलहाल अभी पढ़ाई तो जारी रहेगी इसलिए एक बार फिर से एमपी पीएससी राज्य सेवा परीक्षा देनी है क्योंकि डिप्टी कलेक्टर बनने की ख्वाहिश अभी बाकी है.