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Jabalpur Veterinary University Topper: जबलपुर के वेटरनरी कॉलेज के शपथ ग्रहण समारोह में जब इशिता ने डिग्री हाथ में ली, तो उनके कानों में वो शब्द गूंज रहे थे, जो कभी उन्हें समाज ने दिए थे. नीट की परीक्षा पास करने के बाद इशिता के पास कई विकल्प थे, लेकिन उन्होंने उस राह को चुना, जिसे आज भी संकुचित मानसिकता वाले लोग ‘छोटा’ समझते हैं.
Jabalpur News: अगर आप इंसानों के डॉक्टर हैं तो सम्मान, लेकिन आप पशुओं के डॉक्टर हैं तो ‘ढोर डॉक्टर’ कहे जाएंगे. चौंकिए नहीं, ये समाज की एक कड़वी सच्चाई है, जिसका सामना एक बेटी अर्से से करती आ रही है. लेकिन, अब उसने उसी समाज को करारा जवाब दिया है, जो उसको ताने मारता था. जबलपुर वेटरनरी यूनिवर्सिटी की टॉपर इशिता बैश ने जब स्टेटथोस्कोप थामने का फैसला किया था, तब उसके आसपास के लोगों ने तारीफ की, लेकिन जैसे ही पता चला कि इशिता पशुओं की डॉक्टरी करेगी तो ‘ढोर डॉक्टर’ कहकर जलील किया.
डिग्री लेते वक्त कानों में गूंज रहे थे वो शब्द
दरअसल, इशिता ने वेटरनरी यूनिवर्सिटी से टॉप किया है. जबलपुर के वेटरनरी कॉलेज के शपथ ग्रहण समारोह में जब इशिता ने डिग्री हाथ में ली, तो उनके कानों में वो शब्द गूंज रहे थे, जो कभी उन्हें समाज ने दिए थे. नीट की परीक्षा पास करने के बाद इशिता के पास कई विकल्प थे, लेकिन उन्होंने उस राह को चुना, जिसे आज भी संकुचित मानसिकता वाले लोग ‘छोटा’ समझते हैं.
इतनी होनहार लड़की होकर गाय-भैंसों का इलाज करोगी?
इशिता बेस ने लोकल 18 से बताया, लोग कहते थे लड़की होकर जानवरों का इलाज करोगी? रिश्तेदारों ने मजाक उड़ाया, पड़ोसियों ने ‘ढोर डॉक्टर’ कहां. लिहाजा, नीट में अच्छी रैंक आने के बाद जब उन्होंने वेटरनरी साइंस को चुना, तो लोगों ने हैरानी जताई. लोग कहते थे, इतनी होनहार लड़की होकर गाय-भैंसों का इलाज करोगी? गोबर और कीचड़ में काम करना पड़ेगा. लेकिन, इशिता के मन में उन बेजुबानों के प्रति करुणा थी, जो अपना दर्द बोलकर नहीं बता सकते. पहले साल में ये बातें बहुत चुभती थीं, लेकिन फिर मैंने सोचा कि बेजुबानों की सेवा से बड़ा धर्म और क्या होगा? इन्हीं तानों से सफर चुनौतियों भरा था.
5 साल की कड़ी तपस्या लाई, फिर प्रदेश में टॉप
इशिता ने एक तरफ पशु चिकित्सा की कठिन पढ़ाई की और दूसरी तरफ ‘स्टीरियोटाइप’ समाज को पीछे छोड़ा, जो मानता है कि बड़े जानवरों का इलाज करना सिर्फ मर्दों का काम है. इस मिथक को जड़ से उखाड़ फेंका. इतना हीं नहीं, प्रदेश भर में टॉप भी किया. उन्होंने बताया 5 साल की कड़ी तपस्या अब रंग लाई है. जहां नाम के आगे अब गर्व से ‘डॉक्टर’ लग चुका है. लेकिन, यहीं रुकने वाली नहीं हूं. अब वेटरनरी सर्जरी और मेडिसिन में पीजी करना चाहती हूं. उन बेजुबानों की आवाज बनना है, जो अपना दर्द खुद बयां नहीं कर सकते. इशिता का कहना है कि कोई भी पेशा छोटा या बड़ा नहीं होता है.
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एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें