वो क्रिकेटर…जो 3 टेस्ट खेलने के बाद बन गया कप्तान, 64 साल से कायम है रिकॉर्ड

वो क्रिकेटर…जो 3 टेस्ट खेलने के बाद बन गया कप्तान, 64 साल से कायम है रिकॉर्ड


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वो क्रिकेटर…जो 3 टेस्ट खेलने के बाद बन गया कप्तान, 64 साल से कायम है रिकॉर्ड

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mansoor ali khan Pataudi youngest test captain of india: मंसूर अली खान पटौदी भारतीय क्रिकेट के इतिहास का वह सुनहरा अध्याय हैं. जिन्होंने न केवल अपनी कप्तानी से टीम इंडिया को विदेशों में जीतना सिखाया, बल्कि व्यक्तिगत त्रासदी को मात देकर मिसाल पेश की. कार हादसे में एक आंख की रोशनी खोने के बावजूद उन्होंने दुनिया के घातक गेंदबाजों का डटकर सामना किया. महज 21 साल की उम्र में टीम की कमान संभालने वाले ‘टाइगर’ पटौदी की कहानी साहस, शाही अंदाज और क्रिकेट के प्रति अटूट समर्पण की एक अद्भुत दास्तान है.

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भारत के सबसे युवा टेस्ट कप्तानी का रिकॉर्ड आज भी मंसूर अली पटौदी के नाम कायम है.

नई दिल्ली. भारतीय क्रिकेट के गलियारों में जब भी साहस और नेतृत्व की बात होती है, तो ‘नवाब’ मंसूर अली खान पटौदी का नाम सबसे ऊपर आता है. क्रिकेट के मैदान पर ‘टाइगर’ के नाम से मशहूर इस खिलाड़ी ने उस दौर में भारतीय टीम की कमान संभाली, जब जीत के लिए संघर्ष करना आम बात थी. उन्होंने न केवल भारत को आत्मसम्मान दिलाया, बल्कि दुनिया को यह भी दिखाया कि अगर जज्बा बुलंद हो, तो शरीर की कमियां कभी बाधा नहीं बन सकतीं.

मंसूर अली खान पटौदी (Mansoor Ali Khan Pataudi) की जिंदगी में सबसे बड़ा मोड़ तब आया, जब एक कार दुर्घटना में उनकी एक आंख की रोशनी चली गई. एक क्रिकेटर के लिए, जिसकी पूरी बल्लेबाजी दृष्टि पर टिकी होती है, यह करियर खत्म होने जैसा था. लेकिन टाइगर पटौदी अलग मिट्टी के बने थे। उन्होंने एक आंख से ही बल्लेबाजी का अभ्यास किया और इंटरनेशनल क्रिकेट में वापसी की. उन्होंने खतरनाक तेज गेंदबाजों की धज्जियां उड़ाते हुए यह साबित कर दिया कि तकनीक और हिम्मत के सामने शारीरिक अक्षमताएं भी हार मान लेती हैं.

भारत के सबसे युवा टेस्ट कप्तानी का रिकॉर्ड आज भी मंसूर अली पटौदी के नाम कायम है.

महज 21 साल में मिली टीम की कमान
साल 1962 में वेस्टइंडीज दौरे के दौरान भारतीय क्रिकेट में एक नाटकीय घटना घटी. टीम के तत्कालीन कप्तान नारी कॉन्ट्रैक्टर एक अभ्यास मैच में तेज गेंदबाज चार्ली ग्रिफिथ की गेंद पर बुरी तरह चोटिल हो गए. कॉन्ट्रैक्टर के बाहर होने के बाद टीम संकट में थी. सीनियर खिलाड़ियों ने जिम्मेदारी लेने से मना कर दिया, ऐसे में 21 साल और 77 दिन की उम्र के युवा पटौदी को नेतृत्व सौंपा गया. उस वक्त वह दुनिया के सबसे युवा टेस्ट कप्तान बने. हालांकि, बाद में तातेंदा ताइबू और राशिद खान जैसे खिलाड़ियों ने इस उम्र के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया, लेकिन भारत के सबसे युवा टेस्ट कप्तान होने का उनका गौरव आज भी बरकरार है. उनकी नियुक्ति ने भारतीय क्रिकेट में एक नए युग की शुरुआत की.

स्पिन की जादुई रणनीति और ऐतिहासिक जीत
टाइगर पटौदी ने भारत में स्तरीय तेज गेंदबाजों की कमी को कमजोरी बनाने के बजाय, स्पिन को अपनी ताकत बनाया. उन्होंने ‘तीन स्पिनर दो से बेहतर हैं’ की रणनीति अपनाई, जिसने भारतीय क्रिकेट की दिशा बदल दी. उनकी ही कप्तानी में भारत ने 1968 में न्यूजीलैंड के खिलाफ विदेशी धरती पर अपनी पहली टेस्ट सीरीज जीती. यह जीत भारतीय क्रिकेट के लिए मील का पत्थर साबित हुई, जिसने टीम को विदेशों में जीतने का आत्मविश्वास दिया.

यादगार पारियां और डॉन ब्रैडमैन से तुलना
पटौदी की बल्लेबाजी में भले ही बहुत निरंतरता न रही हो, लेकिन जब वह खेलते थे, तो उनका अंदाज शाही होता था. 1963-64 में इंग्लैंड के खिलाफ दिल्ली टेस्ट में उन्होंने दोहरा शतक जड़ा. वहीं, 1967 के हेडिंग्ले टेस्ट की 148 रनों की पारी क्रिकेट प्रेमियों के जेहन में आज भी ताजा है. ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मेलबर्न में 75 और 85 रनों की जुझारू पारियों को देखकर पूर्व बल्लेबाज लिंडसे हैसेट ने उनकी तुलना महान डोनाल्ड ब्रैडमैन से कर दी थी. उनके पूरे करियर को देखें तो उन्होंने 46 टेस्ट मैचों में 2,793 रन बनाए, जिसमें 6 शतक शामिल थे.

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Kamlesh Raiचीफ सब एडिटर

कमलेश राय वर्तमान में News18 इंडिया में बतौर चीफ सब-एडिटर कार्यरत हैं. 17 वर्षों से अधिक के अपने सुदीर्घ पत्रकारीय सफर में उन्होंने डिजिटल मीडिया की बारीकियों और खबरों की गहरी समझ के साथ एक विशिष्ट पहचान बनाई ह…और पढ़ें



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