2600 साल पहले उज्जैन था व्यापार का केंद्र, गढ़कालिका की खुदाई में सामने आया था सच

2600 साल पहले उज्जैन था व्यापार का केंद्र, गढ़कालिका की खुदाई में सामने आया था सच


Last Updated:

Ujjain History: महाकाल की नगरी उज्जैन अपने रहस्यों से आज भी चौंकाती है. कभी यह वैश्विक व्यापार का प्रमुख केंद्र था, जहां दूर देशों, यहां तक कि रोम से भी व्यापारी आते थे. गढ़कालिका क्षेत्र में मिले सिक्के, बर्तन के अवशेष इस इतिहास की गवाही देते हैं.

Ujjain News: विश्व प्रसिद्ध बाबा महाकाल की नगरी में कई ऐसे रहस्य हैं, जो समय-समय पर लोगों को चौंका देते हैं. उज्जैन का गढ़कालिका क्षेत्र भी ऐसे ही रहस्यों से भरा है. 1957 में यहां हुई खुदाई ने एक रोचक इतिहास पर से पर्दा हटाया था. आज भी उसके अवशेष यहां पर मिलते रहते हैं. बता दें, प्राचीन समय में उज्जैन केवल एक नगर नहीं, बल्कि व्यापार का प्रमुख केंद्र था. यहां दूर-दूर से व्यापारी आते थे और साथ में अनोखी वस्तुएं लाते थे.

गढ़कालिका क्षेत्र में आज भी उस गौरवशाली अतीत के निशान बिखरे पड़े हैं. पुरानी ईंटें, मिट्टी के बर्तन और अलग-अलग कालों के सिक्के, जो इतिहास की कहानी सुनाते हैं. कहा जाता है कि जब पुरातत्व विभाग ने यहां खुदाई की, तो एक खास रोमन बर्तन ‘एम्फोरे’ मिला. यह खोज चौंकाने वाली थी, क्योंकि इससे पता चला कि उज्जैन का व्यापार सिर्फ भारत तक सीमित नहीं था, बल्कि रोम जैसे दूर देशों से भी जुड़ा हुआ था. यह कहानी बताती है कि उज्जैन कभी वैश्विक व्यापार का चमकता हुआ केंद्र था.

उज्जैन में 600 ईसा पूर्व में बसाहट
अवंतिका नगरी सिर्फ आस्था का नहीं, इतिहास का भी जीवंत शहर है. मान्यता है कि इसकी जड़ें सृष्टि की शुरुआत तक जाती हैं, लेकिन जब मानव बसाहट की बात आती है, तो करीब 600 ईसा पूर्व यहां जीवन आकार लेने लगा. समय के साथ यह नगर व्यापार का बड़ा केंद्र बन गया, जहां दूर-दूर से लोग आते थे. विभिन्न संस्कृतियों के मेल से उज्जैन ने एक अनोखी पहचान बनाई, जो आज भी इसकी गलियों और परंपराओं में झलकती है. करीब 2600 साल पहले उज्जैन व्यापार का बड़ा केंद्र बन चुका था, जहां देश ही नहीं, दूर-दराज के व्यापारी भी पहुंचते थे. कहते हैं, रोमन व्यापारी भी यहां तक आते थे. 1957 में गढ़कालिका क्षेत्र में हुई खुदाई ने इस कहानी को सच साबित कर दिया, जहां मिले अवशेष आज भी उज्जैन के समृद्ध व्यापारिक इतिहास की गवाही देते हैं.

हज़ारों वर्ष पुराना गढ़कालिका का इतिहास
पुराविद् एवं दिल्ली विश्वविद्यालय में हिंदी के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. शुभम केवलिया ने बताया कि करीब 2600 साल पहले, जब समय की धारा 600 ईसा पूर्व की ओर बहती थी, तब शिप्रा नदी के किनारे एक जीवंत नगरी बस रही थी. अवंतिका यही क्षेत्र आज गढ़कालिका के नाम से जाना जाता है. यहां धीरे-धीरे जनजीवन आकार लेने लगा, लोग बसे, परंपराएं जन्मीं और अलग-अलग संस्कृतियां फलने-फूलने लगीं. इतिहास की यह भूमि आज भी उस प्राचीन सभ्यता की कहानियां अपने भीतर समेटे हुए है.

उज्जैन से चारों दिशाओं में व्यापार
कभी प्राचीन भारत में एक ऐसा शहर था, जो व्यापार की धड़कन माना जाता था. उज्जैन, यहां से उत्तर-दक्षिण और पूर्व-पश्चिम तक सामान जाता था. समय बदला, पर इतिहास आज भी इन टीलों में सांस लेता है. लोग बताते हैं कि बारिश होते ही जमीन से पुराने सिक्के और अवशेष झलकने लगते हैं. मानो धरती खुद गौरवशाली अतीत की कहानी सुनाना चाहती हो, जहां हर कण में व्यापार और समृद्धि की गूंज बसती है.

About the Author

Rishi mishra

एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें



Source link