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रतलाम में चार साल से फरार इनामी चोर को पुलिस ने गिरफ्तार किया है. आरोपी साधु बनकर इंदौर के मंदिरों में रह रहा था. ट्रैक्टर चोरी के मामले में फरार विक्रम ने अपनी पहचान बदल ली थी. साइबर सेल की मदद से पुलिस ने उसे पकड़ लिया. एडिशनल एसपी रतलाम विवेक कुमार ने कहा कि पुलिस लगातार सूचना लेकर छापे मारी कर रही थी, अब उसे सफलता मिली है.
रतलाम पुलिस ने इंदौर के मंदिर से बाबा के भेष में छिपे चोर को गिरफ्तार किया है.
रतलाम. मध्य प्रदेश पुलिस ने एक ऐसे आरोपी को गिरफ्तार किया है, जिसने अपनी पहचान छिपाने के लिए साधु का भेष अपना लिया था. चार साल से फरार चल रहा यह शातिर चोर मंदिरों में ‘विष्णु महाराज’ बनकर रह रहा था और पुलिस को लगातार चकमा दे रहा था. बाबा का भेष और दाढ़ी रख लेने के कारण उसकी पहचान आसान हो गई. पुलिस को जानकारी मिली थी कि शातिर चोर इंदौर के मंदिर में साधु बनकर छिपा हुआ है. इसके बाद लगातार पता लगाते हुए पुलिस उस तक पहुंच गई. आखिरकार पुलिस की सतर्कता और साइबर इनपुट के चलते उसका भेद खुल गया. इस गिरफ्तारी ने एक बार फिर साबित कर दिया कि अपराधी चाहे जितनी चालाकी कर ले, कानून के हाथ लंबे होते हैं.
एडिशनल एसपी रतलाम विवेक कुमार ने बताया कि फरार आरोपी की तलाश में पुलिस लंबे समय से सक्रिय थी. यह मामला इसलिए भी दिलचस्प है क्योंकि आरोपी ने खुद को साधु बनाकर समाज की आस्था का सहारा लिया और पुलिस की नजरों से बचता रहा. चार साल पहले ट्रैक्टर चोरी की घटना के बाद वह गायब हो गया था जबकि उसका एक साथी पकड़ा गया था. उस पर 2 हजार रुपये का इनाम भी घोषित था. अब उसकी गिरफ्तारी के बाद पूरे मामले की कड़ियां जुड़ गई हैं और पुलिस को बड़ी सफलता मिली है. पुलिस ने जांच के दौरान चोरी किया गया ट्रैक्टर पहले ही बरामद कर लिया था. वह एक खरीदार के पास मिला था, जिसने आरोपी से इसे खरीदा था.
कौन है आरोपी विक्रम
गिरफ्तार आरोपी की पहचान विक्रम उर्फ विष्णु महाराज (41) के रूप में हुई है. वह राजस्थान के भीलवाड़ा का निवासी है. 9 अगस्त 2022 को पीएंडटी कॉलोनी निवासी आफताब अब्बासी ने ट्रैक्टर चोरी की शिकायत दर्ज कराई थी. पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू की थी.
भेष बदलकर बन गया ‘महाराज’
चोरी के बाद आरोपी ने साधु का भेष धारण कर लिया. उसने लंबी दाढ़ी बढ़ाई और खुद को विष्णु महाराज बताने लगा. इंदौर के मंदिरों में रहकर वह पहचान छिपाता रहा. पुलिस को कई बार उसकी लोकेशन मिली, लेकिन हर बार वह फरार हो गया. इसी वजह से उस पर 2 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था. आखिरकार पुलिस को इंदौर के मंदिरों में रह रहे एक संदिग्ध साधु की सूचना मिली. पूछताछ में उसके जवाब बदलने लगे. सख्ती से पूछताछ करने पर उसकी असली पहचान सामने आई.
पुलिस की रणनीति आई काम
इस पूरे ऑपरेशन में साइबर सेल और स्थानीय पुलिस की टीम ने मिलकर काम किया. संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखते हुए आरोपी तक पहुंच बनाई गई. यह मामला दिखाता है कि अपराधी किस तरह पहचान बदलकर लंबे समय तक कानून से बच सकते हैं. साथ ही यह भी साबित करता है कि पुलिस की लगातार निगरानी और तकनीकी मदद से ऐसे आरोपियों को पकड़ा जा सकता है.
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सुमित वर्मा, News18 में 4 सालों से एसोसिएट एडीटर पद पर कार्यरत हैं. बीते 3 दशकों से सक्रिय पत्रकारिता में अपनी अलग पहचान रखते हैं. देश के नामचीन मीडिया संस्थानों में सजग जिम्मेदार पदों पर काम करने का अनुभव. प…और पढ़ें