खंडवा के इमलीपुरा स्थित अवैध घी फैक्ट्री के संचालक अनवर कुरैशी को शुक्रवार को पशु परीक्षण एक्ट के तहत गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। प्रशासन अब आरोपी पर रासुका (NSA) लगाने की तैयारी कर रहा है। मोघट रोड थाना पुलिस की पूछताछ में खुलासा हुआ है कि मवेशियों की चर्बी से बने इस घी को होटल-ढाबों, आइसक्रीम बनाने और कपड़ा मिलों में सप्लाई किया जा रहा था। वहीं, आरोपी के परिवार में वकीलों की फौज है। उसके तीन सगे भाई वकालत करते हैं। कार्रवाई के दौरान आरोपी के तीन वकील भाइयों द्वारा सिटी मजिस्ट्रेट को फर्जी दस्तावेज दिखाकर रिश्वत देने की कोशिश की बात सामने आई है। धागे की फिनिशिंग और आइसक्रीम तक पहुंची चर्बी आरोपी ने चर्बी खपाने के नेटवर्क का खुलासा करते हुए बताया कि घी की तरह दिखने वाले तेल की सप्लाई मुख्य रूप से बुरहानपुर के एक कपड़ा उद्योग में होती थी। इसका इस्तेमाल कॉटन से कपड़ा और धागा बनाते वक्त फिनिशिंग के लिए किया जाता था। इसके अलावा यह चर्बी ढाबों और आइसक्रीम बनाने में भी उपयोग की जा रही थी। 138 मवेशी काटे गए, चमड़ा गलाने में मिला सरकारी नमक मौके से भारी मात्रा में सरकारी राशन दुकान से बांटा जाने वाला नमक बरामद हुआ है, जिसकी जांच के लिए खाद्य एवं आपूर्ति विभाग को बुलाया गया। पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. नवीन तिवारी ने बताया कि इस नमक का उपयोग चमड़े को पिघलाकर चर्बी बनाने के लिए होता है। एक जानवर से लगभग 10 किलो चर्बी निकलती है। प्रशासन को जो 1380 किलो चर्बी मिली है, उस आधार पर 138 जानवरों को काटे जाने का अनुमान है। वकील भाइयों ने कहा- जो फीस है देंगे, कार्रवाई खत्म कर दो आरोपी के तीनों भाई पेशे से वकील हैं। उन्होंने प्रारंभिक जांच में फर्जी पाए गए लाइसेंस और अनुमति संबंधी दस्तावेज दिखाते हुए मजिस्ट्रेट से कहा था कि जो भी फीस है ले लें, लेकिन कार्रवाई यहीं रोक दें। पूरी घटना पर सिटी मजिस्ट्रेट बजरंग बहादुर ने कहा, गुरुवार देर रात 11 बजे उन्हें शिकायत मिली थी। इसकी तस्दीक के लिए वे शुक्रवार सुबह ही मौके पर पहुंच गए। उन्होंने साथ में सीएसपी अभिनव बारंगे को लिया। मौके पर गए तो शिकायत सही पाई गई। इसके बाद निगम के डिप्टी कमिश्नर सचिन सिटोले को मौके पर बुलाया। इस दौरान अनवर के वकील भाईयों ने कार्रवाई का विरोध किया। हमने सख्ती बरती और उन्हें दूर हटाया, हमें प्रलोभन देने की कोशिश भी की गई। नगर निगम अधिकारियों को थी जानकारी, फिनायल छिड़ककर लौट जाते थे प्रारंभिक प्रशासनिक जांच के अनुसार, इस अवैध कारोबार की जानकारी नगर निगम अधिकारियों और संबंधित पुलिस को थी। रहवासियों की शिकायत पर जब निगम की टीम आती थी, तो वे इस कारोबार को वैध बताकर दुर्गंध मिटाने के लिए सिर्फ फिनायल का छिड़काव करवाकर लौट जाते थे। 2017 में 3 डंपर खालें मिली थीं, एक साल बाद फिर चालू हुआ काम साल 2017 में भी तत्कालीन एसपी रुचिवर्धन मिश्र के नेतृत्व में इसी मकान से 3 डंपर भरकर मवेशियों की खालें बरामद हुई थीं। कार्रवाई के बाद एक साल तक कामकाज बंद रहा, लेकिन फिर से यह अवैध धंधा शुरू कर दिया गया। कल 3,350 लीटर घी हुआ था जब्त, लैब रिपोर्ट का इंतजार गुरुवार को हुई मूल कार्रवाई में 69 टीन और 9 ड्रमों में भरा कुल 3,350 लीटर चर्बी युक्त घी, 4 ट्रक खाल और 3 ट्रक अवशेष मिले थे। साल 2015 से चल रही इस फैक्ट्री के मामले में विधायक कंचन तनवे ने गोवंश हत्या के आरोप लगाए हैं। प्रशासन ने सभी सैंपल लैब भेज दिए हैं, रिपोर्ट आने के बाद ही मवेशियों की असल प्रजाति स्पष्ट होगी। वर्तमान में पूरे नेटवर्क की सप्लाई चेन को खंगालने के लिए जीएसटी और पशुपालन विभाग भी जांच में जुटे हैं। ये खबर भी पढ़िए… मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में मजिस्ट्रेट बजरंग बहादुर के नेतृत्व में प्रशासन ने अवैध घी फैक्ट्री पर छापेमारी की। इस दौरान जानवरों की चर्बी मिलाकर तैयार किया गया करीब 3,350 लीटर घी बरामद हुआ। यह घी 69 टीन के डिब्बों और 9 नीले ड्रमों में भरा था… पूरी खबर पढ़िए
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