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राजगढ़ के एक संपन्न दंपती ने अंधविश्वास की हद पार करते हुए अपनी गोद ली ढाई साल की बच्ची को ‘मनहूस’ मान लिया. व्यापार में नुकसान का दोष मासूम पर डालते हुए उसे श्योपुर के हाईवे पर छोड़ दिया गया. पुलिस ने मामले का खुलासा कर दंपती को गिरफ्तार कर लिया है. घटना ने समाज में संवेदनहीनता और अंधविश्वास पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में एक युवक ने बच्ची को बचाने की जानकारी दी थी.
राजगढ़/श्योपुर. करोड़ों का कारोबार करने वाला एक संपन्न दंपती अपनी ही गोद ली गई ढाई साल की बच्ची को ‘अपशगुन’ मान बैठा और उसे हाईवे पर लावारिस छोड़ आया. श्योपुर जिले के मानपुर थाना क्षेत्र में नेशनल हाईवे-552 पर मिली इस बच्ची को एक युवक ने बचाया और इस बच्ची की जानकारी लेने के संबंध में एक वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट किया. इधर, पुलिस भी इस बच्ची को लेकर जांच में जुट गई. पुलिस को पता चला कि राजगढ़ के दंपति ने इस बच्ची को छोड़ दिया था. अब इस अपराध के लिए दोनों पर पुलिस ने एक्शन लिया है. बताया जा रहा है कि राजगढ़ के जाने-माने कारोबारी मूंदड़ा दंपती ने इस बच्ची को गलत तरीके से गोद लिया था.
इस बारे में मानपुर थाना टीआई सतीश दुबे का कहना है कि, प्रारंभिक जांच में राजगढ़ निवासी दंपत्ति आकाश मूंदड़ा और उसकी पत्नी कृतिका को गिरफ्तार किया है, उनसे पूछताछ की जा रही है, वह यात्रा करने के लिए जा रहे थे, इस दौरान उन्होंने बालिका को हाईवे पर छोड़ दिया था, आगे की कार्रवाई की जा रही है. बताया जा रहा है कि अपने व्यापार में आई गिरावट का दोष इस मासूम पर डालते हुए उसे सुनसान हाईवे पर छोड़ देने वाले दंपति करोड़ों के कारोबारी हैं लेकिन जब नुकसान हुआ, तो उसी बच्ची को ‘मनहूस’ मान लिया गया. यह सोच न केवल कानूनी रूप से गलत है, बल्कि सामाजिक और नैतिक रूप से भी बेहद चिंताजनक है.
हाईवे पर मिली मासूम, ऐसे खुला राज
श्योपुर जिले के मानपुर थाना क्षेत्र में नेशनल हाईवे-552 पर एक छोटी बच्ची अकेली भटकती मिली. राहगीरों ने पुलिस को सूचना दी. पुलिस मौके पर पहुंची और बच्ची को सुरक्षित अपने संरक्षण में लिया. शुरुआत में यह मामला सामान्य लावारिस बच्चे का लग रहा था. लेकिन जांच के दौरान कई सवाल खड़े हुए. बच्ची की पहचान के लिए सोशल मीडिया पर अभियान चलाया गया. धीरे-धीरे सुराग मिलने लगे.
जांच में सामने आया राजगढ़ और भोपाल का कनेक्शन
पुलिस की गहराई से जांच में सामने आया कि बच्ची राजगढ़ के एक व्यापारी दंपती के पास रह रही थी. जब दंपती से गोद लेने के दस्तावेज मांगे गए, तो वे कोई ठोस कागजात पेश नहीं कर सके. इससे यह मामला कानूनी रूप से भी संदिग्ध हो गया. जांच का दायरा बढ़ाया गया, जिसमें भोपाल के कोहेफिजा क्षेत्र से भी लिंक सामने आया है. पुलिस ने कहा है कि अभी जांच की जा रही है और बच्ची के माता-पिता सहित अन्य जानकारी निकाली जा रही है. ऐसी आशंका है कि यह ह्यूमन ट्रैफिकिंग का मामला भी हो सकता है.
धार्मिक यात्रा के दौरान छोड़ी बच्ची
पुलिस पूछताछ में सामने आया कि दंपती धार्मिक यात्रा पर निकले थे. वे खाटू श्याम और मेहंदीपुर बालाजी जा रहे थे. इसी दौरान श्योपुर के पास सुनसान जगह देखकर बच्ची को सड़क किनारे छोड़ दिया गया. इतनी कम उम्र की बच्ची को इस तरह छोड़ देना गंभीर अपराध है. पुलिस ने इसे अमानवीय और आपराधिक कृत्य माना है. सीसीटीवी फुटेज, टोल नालों पर गाड़ी की लोकेशन आदि लेकर राजगढ़ दंपति तक पुलिस पहुंची.
नुकसान का ठीकरा मासूम पर फोड़ा
पूछताछ में दंपती ने स्वीकार किया कि उन्होंने बच्ची को कुछ समय पहले अपने पास रखा था. लेकिन जब उनके कारोबार में गिरावट आई, तो उन्होंने अंधविश्वास के चलते बच्ची को अशुभ मान लिया. इस सोच के कारण उन्होंने यह कठोर फैसला लिया. पुलिस ने बच्ची के संबंध में कई सवाल दंपति से किए हैं. अफसर ने बताया कि दंपति गोलमोल जवाब देकर पुलिस को गुमराह कर रहे हैं.
केयरटेकर ने खोले राज
मामले में एक केयरटेकर युवती ने अहम भूमिका निभाई. उसने बच्ची की पहचान से जुड़ी जानकारी पुलिस को दी. साथ ही उसने बताया कि बच्ची की देखभाल के लिए उसे हायर किया गया था. दंपती पर आरोप लगाया कि बच्ची के साथ शुरू से भेदभाव किया जाता था. यह खुलासा जांच में अहम साबित हुआ और पुलिस को दंपती तक पहुंचने में मदद मिली. मूंदड़ा परिवार इलाके के बड़े व्यापारिक घरानों में गिना जाता है. पेट्रोल पंप समेत कई व्यवसाय उनके पास हैं.
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सुमित वर्मा, News18 में 4 सालों से एसोसिएट एडीटर पद पर कार्यरत हैं. बीते 3 दशकों से सक्रिय पत्रकारिता में अपनी अलग पहचान रखते हैं. देश के नामचीन मीडिया संस्थानों में सजग जिम्मेदार पदों पर काम करने का अनुभव. प…और पढ़ें