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मंदिर के पुजारी सुंदर दामोदर दास के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण, राधारानी, जगन्नाथ और नरसिंह भगवान को ठंडक देने के लिए प्रतिदिन करीब 30 किलो चंदन से विशेष लेप तैयार किया जाता है. इस लेप को बनाने में चार लोगों की टीम रोजाना जुटी रहती है, जिससे भगवान को भीषण गर्मी में शीतलता मिल सके.वहीं महाकाल मंदिर में भगवान महाकाल का 11 पवित्र नदियों के जल से अभिषेक किया जा रहा है.
उज्जैन के मंदिरों में चंदन लेप
महाकाल की नगरी उज्जैन इन दिनों भीषण गर्मी की चपेट में है,जहां तापमान 42 से 43 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है. इस तेज गर्मी से जहां आमजन परेशान हैं, वहीं मंदिरों में भगवान की सेवा में भी विशेष सावधानी बरती जा रही है. श्रद्धालु और पुजारी मिलकर भगवान को गर्मी से राहत देने के लिए अनोखे और पारंपरिक उपाय अपना रहे हैं, जो आस्था और भक्ति का अद्भुत उदाहरण बनकर सामने आ रहे हैं.
उज्जैन के प्रसिद्ध इस्कॉन मंदिर में भगवान को तपिश से बचाने के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं. यहां सामान्य चंदन की बजाय उड़ीसा के मलय पर्वत से लाया गया खास चंदन लेप भगवान को लगाया जा रहा है. मंदिर परिसर में एयर कंडीशनर की सुविधा भी दी गई है, ताकि वातावरण ठंडा बना रहे है. इसके साथ ही भगवान को शीतल भोग अर्पित किया जा रहा है.
भीषण गर्मी में भगवान की सेवा
मंदिर के पुजारी सुंदर दामोदर दास के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण, राधारानी, जगन्नाथ और नरसिंह भगवान को ठंडक देने के लिए प्रतिदिन करीब 30 किलो चंदन से विशेष लेप तैयार किया जाता है. इस लेप को बनाने में चार लोगों की टीम रोजाना जुटी रहती है, जिससे भगवान को भीषण गर्मी में शीतलता मिल सके.वहीं महाकाल मंदिर में भगवान महाकाल का 11 पवित्र नदियों के जल से अभिषेक किया जा रहा है. इस विशेष पूजा से भगवान को ठंडक प्रदान की जा रही है और भक्तों की आस्था भी मजबूत हो रही है.
मंदिरों में चंदन लेप और शीतल भोग
सांदीपनि आश्रम में भी भगवान श्रीकृष्ण, बलराम, सुदामा और गुरु सांदीपनि को ठंडे भोग अर्पित किए जा रहे हैं. यहां दही, छाछ, श्रीखंड, तरबूज, आम और अन्य शीतल पेय पदार्थ भगवान को समर्पित किए जा रहे हैं। साथ ही नियमित रूप से चंदन लेप भी किया जा रहा है.गोपाल मंदिर में भी भगवान को गर्मी से राहत देने के लिए ठंडी लस्सी, दूध और शीतल प्रसाद चढ़ाया जा रहा है.भीषण गर्मी के इस दौर में उज्जैन के मंदिरों में किए जा रहे ये विशेष इंतजाम न सिर्फ धार्मिक आस्था को दर्शाते हैं, बल्कि यह भी बताते हैं कि श्रद्धालु अपने आराध्य की सेवा में किसी भी प्रकार की कमी नहीं छोड़ते है.