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Ujjain News: मान्यता है कि नरसिंह द्वादशी (नरसिंह जयंती) का व्रत रखने से साधक पर भगवान विष्णु की विशेष कृपा बनी रहती है. इस व्रत से पापों का नाश होता है और मन से भय दूर होता है. सच्चे मन से व्रत रखने वाले भक्त की रक्षा स्वयं भगवान नरसिंह करते हैं, जैसे उन्होंने भक्त प्रह्लाद की रक्षा की थी.
उज्जैन. हिंदू धर्म में नरसिंह (नृसिंह) चतुर्दशी का खास महत्व माना जाता है. यह व्रत भगवान नरसिंह को समर्पित है. वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर नरसिंह जयंती का पर्व बड़े श्रद्धा और भक्ति भाव से मनाया जाता है. साल 2026 में यह पावन उत्सव 30 अप्रैल को पड़ रहा है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी दिन भगवान विष्णु ने अपने भक्त प्रह्लाद की रक्षा और अधर्म के विनाश के लिए नरसिंह रूप में अवतार लिया था, जो आधा मनुष्य और आधा सिंह स्वरूप है. यह अवतार उनके उग्र और शक्तिशाली रूप का प्रतीक माना जाता है. नरसिंह भगवान की पूजा करने से भक्तों को साहस, ज्ञान और सुरक्षा का आशीर्वाद मिलता है. साथ ही नकारात्मक शक्तियों और शत्रुओं का भय भी समाप्त होता है. उज्जैन के ज्योतिषाचार्य आनंद भारद्वाज से जानते हैं नरसिंह जयंती की पूजा विधि और महत्व.
वैदिक पंचांग के अनुसार, वैशाख मास के शुक्लपक्ष की चतुर्दशी तिथि पर भगवान विष्णु के नरसिंह अवतार की जयंती मनाई जाती है. इस बार वह 29 अप्रैल 2026 को सायंकाल 07 बजकर 51 मिनट से प्रारंभ होकर अगले दिन 30 अप्रैल 2026 को रात्रि 09 बजकर 12 मिनट पर समाप्त होगी. इस प्रकार उदयातिथि को आधार मानते हुए नरसिंह जयंती का पावन पर्व 30 अप्रैल दिन गुरुवार को मनाया जाएगा.
इस दिन व्रत रखने का महत्व
मान्यता है कि नरसिंह द्वादशी का व्रत रखने से साधक पर भगवान विष्णु की विशेष कृपा बनी रहती है. इस व्रत से पापों का क्षय होता है और मन से भय दूर होता है. माना जाता है कि सच्चे मन से व्रत करने वाले भक्त की रक्षा स्वयं भगवान नरसिंह करते हैं, जैसे उन्होंने भक्त प्रह्लाद की रक्षा की थी. उनकी पूजा से घर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है, शत्रुओं का प्रभाव कम होता है और व्यक्ति को अंततः मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग मिलता है.
नरसिंह द्वादशी की पूजा विधि
नरसिंह द्वादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठें और स्नान कर स्वच्छ पीले वस्त्र धारण कर लें. घर के पूजा स्थल को साफ कर लें और भगवान नरसिंह की प्रतिमा या चित्र को स्थापित कर विधिपूर्वक पूजा शुरू करें. पूजा में भगवान को फूल, फल, मिष्ठान और पंचामृत आदि अर्पित करें. फिर पूर्व या उत्तर दिशा में अपना मुख पूजा करें और भगवान के प्रति पूरी श्रद्धा रखें. इसके बाद विष्णु सहस्त्रनाम, नरसिंह स्तोत्र के साथ ही भगवान विष्णु की आरती कर पूजा को पूरा करें. भगवान को अर्पित किए भोग को परिवार में बांटें.
नरसिंह द्वादशी पर करें इन मंत्रों का जाप
1. नरसिंह सुरक्षा मंत्र
ॐ उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम्।
नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्युं मृत्युं नमाम्यहम्॥
2. नरसिंह गायत्री मंत्र
ॐ वज्र-नखाय विद्महे, तीक्ष्ण-द्रंष्टाय धीमहि।
तन्नो नारसिंह: प्रचोदयात्।।
3. नरसिंह स्तुति
नमस्ते नरसिंहाय प्रह्लादाह्लाद-दायिने।
हिरण्यकशिपोर्वक्षः-शिला-टङ्क-नखालये।।
इतो नृसिंहः परतो नृसिंहो यतो यतो यामि ततो नृसिंहः।
बहिरनृसिंहो हृदये नृसिंहो नृसिंहमादि शरणं प्रपद्ये॥
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राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.