ग्वालियर के पुलिस ट्रेनिंग स्कूल (पीटीएस) तिघरा में एक अनूठी पहल शुरू की गई है। राजस्थान पुलिस से आए 1020 नवआरक्षकों के बैच में से 25 प्रशिक्षुओं को चुना गया है, जिन्हें पेंटिंग का शौक है। ये नवआरक्षक पीटीएस परिसर की 350 से अधिक दीवारों पर चित्रकारी कर रहे हैं। यह रचनात्मक कार्य प्रशिक्षण के साथ-साथ परिसर को आकर्षक बना रहा है और नवाचार का उदाहरण पेश कर रहा है। पीटीएस परिसर की दीवारें अब कैनवास बन गई हैं, जिन पर रंगों के माध्यम से संस्कृति, परंपरा और सामाजिक संदेश उकेरे जा रहे हैं। प्रशिक्षु आरक्षक कड़ी धूप में भी दिन-रात वॉल पेंटिंग का काम कर रहे हैं। अब तक 50 से अधिक दीवारों पर चित्रकारी पूरी हो चुकी है। इन चित्रों में राजस्थान की लोक कला और मध्यप्रदेश की पारंपरिक गोंड कला का संगम देखा जा सकता है। पिछवाई कला, कच्ची घोड़ी जैसी कलाओं को उकेरा दीवारों पर नाथद्वारा की पिछवाई कला, शेखावाटी क्षेत्र की कच्ची घोड़ी और बीकानेर की उस्ता कला को बारीकी से दर्शाया है। मध्यप्रदेश की गोंड कला भी इन चित्रों में प्रमुखता से शामिल है। कलाकार नवआरक्षक पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक जागरूकता जैसे विषयों पर भी चित्रों के माध्यम से संदेश दे रहे हैं। प्रशिक्षु आरक्षकों ने बताया कि उन्हें पीटीएस की इंस्ट्रक्टर निरीक्षक नीलम तंवर ने इस कार्य के लिए प्रेरित किया। एसपी के मार्गदर्शन से उन्हें आगे बढ़ने का हौसला मिला। उन्होंने कहा कि यह उनके लिए गर्व की बात है कि वे अपनी कला के माध्यम से प्रशिक्षण केंद्र को सुंदर बना रहे हैं। एमपी-राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत का प्रदर्शन प्रशिक्षु अजीत ने जानकारी दी कि उनकी टीम पिछले 15-20 दिनों से लगातार वॉल पेंटिंग कर रही है। उन्होंने बताया कि इस प्रयास का उद्देश्य केवल सजावट नहीं, बल्कि राजस्थान और मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को एक साथ प्रदर्शित करना भी है। सभी साथी इस कार्य को टीमवर्क के रूप में पूरा कर रहे हैं।
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