5 लाख कर्मचारियों को MP हाई कोर्ट से राहत, न्यूनतम वेतन-स्थायी नौकरी की जगी उम्मीद

5 लाख कर्मचारियों को MP हाई कोर्ट से राहत, न्यूनतम वेतन-स्थायी नौकरी की जगी उम्मीद


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मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने संविदा कर्मचारियों के नियमितिकरण पर स्टे देने से इनकार कर दिया है. 10 साल से अधिक सेवा देने वाले कर्मचारियों के लिए राहत की खबर है. इस फैसले के बाद करीब 5 लाख कर्मचारियों में खुशी की लहर है. अब सरकार को सिंगल बेंच के समक्ष अपना पक्ष रखना होगा और आगे की प्रक्रिया तय होगी.

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हाई कोर्ट के फैसले से एमपी में संविदा कर्मियों में खुशी की लहर है.

जबलपुर/भोपाल. मध्यप्रदेश में वर्षों से संविदा और आउटसोर्स व्यवस्था में काम कर रहे लाखों कर्मचारियों के लिए राहत की बड़ी खबर सामने आई है. हाईकोर्ट की सिंगल बेंच के आदेश पर स्टे देने से इनकार कर दिया है. इस आदेश में 10 साल से अधिक सेवा दे चुके संविदा कर्मचारियों के नियमितिकरण पर विचार करने की बात कही गई थी. कोर्ट के इस फैसले के बाद प्रदेश के करीब 5 लाख कर्मचारियों में उम्मीद की नई किरण जगी है और लंबे समय से चल रही मांग को मजबूती मिली है. कर्मचारी संगठनों ने मांग की है कि नियमितिकरण के साथ उन्हें वेतनमान, महंगाई भत्ता और वार्षिक वेतन वृद्धि का लाभ दिया जाए. उनका कहना है कि लंबे समय से उन्हें इन सुविधाओं से वंचित रखा गया है.

सरकार ने इस फैसले के खिलाफ डिवीजन बेंच में याचिका लगाकर रोक की मांग की थी, लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह मामला बड़ी संख्या में कर्मचारियों से जुड़ा है, इसलिए इस पर तत्काल रोक लगाना उचित नहीं है. कोर्ट ने सरकार को सिंगल बेंच के समक्ष अपना पक्ष रखने को कहा है. इस टिप्पणी ने यह संकेत दिया है कि लंबे समय तक संविदा पर काम कराना स्थायी आवश्यकता को दर्शाता है, जिससे कर्मचारियों का पक्ष मजबूत हुआ है. अब सरकार को सिंगल बेंच में अपना पक्ष दोबारा रखना होगा. वहीं कर्मचारी संगठन चाहते हैं कि सरकार जल्द से जल्द आदेश का पालन करे. इस मामले में आगे की सुनवाई और निर्णय पर सभी की नजरें टिकी हैं.

क्या है पूरा मामला
यह मामला 2020 से न्यायालय में लंबित है. राधेश्याम वर्मा सहित कई कर्मचारियों ने याचिका दायर कर नियमितिकरण की मांग की थी. उनका कहना था कि वर्षों से एक ही कार्य करने के बावजूद उन्हें स्थायी कर्मचारी का दर्जा नहीं दिया जा रहा. 9 अप्रैल 2023 को सिंगल बेंच ने कर्मचारियों के पक्ष में फैसला सुनाया था. कोर्ट ने कहा था कि 10 साल से अधिक सेवा देने वाले कर्मचारियों के नियमितिकरण पर विचार किया जाना चाहिए. इसी आदेश के खिलाफ सरकार ने डिवीजन बेंच में अपील की थी.

हाईकोर्ट का सख्त रुख
डिवीजन बेंच ने सरकार की स्टे याचिका को खारिज करते हुए कहा कि सरकार की दलीलें पर्याप्त नहीं हैं. जस्टिस विशाल धगत ने 7 अक्टूबर 2016 की नीति का हवाला देते हुए कहा कि यदि किसी कर्मचारी से 10 वर्षों से अधिक समय तक संविदा पर काम लिया जा रहा है, तो यह उस कार्य की स्थायी आवश्यकता को दर्शाता है. इस फैसले के बाद प्रदेश के लगभग 2 लाख संविदा और 3 लाख आउटसोर्स कर्मचारियों में उत्साह है. कर्मचारी संगठनों ने इसे बड़ी जीत बताया है. महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष रमेश राठौर ने कहा कि वर्षों से शोषण झेल रहे कर्मचारियों के लिए यह फैसला उम्मीद लेकर आया है.

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Sumit verma

सुमित वर्मा, News18 में 4 सालों से एसोसिएट एडीटर पद पर कार्यरत हैं. बीते 3 दशकों से सक्रिय पत्रकारिता में अपनी अलग पहचान रखते हैं. देश के नामचीन मीडिया संस्‍थानों में सजग जिम्‍मेदार पदों पर काम करने का अनुभव. प…और पढ़ें



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