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Agri Tips: कृषि एक्सपर्ट के अनुसार कद्दू वर्गीय फसलों पर फल मक्खी का खतरा तेजी से बढ़ रहा है. यह कीट 40-50 दिन जीवित रहती है और मादा 500 से अधिक अंडे देती है. नरम छिलके में अंडे देने के बाद 24-30 घंटे में लार्वा बन जाते हैं, जो फल के अंदरूनी हिस्से को खाकर उसे सड़ा देते हैं. जानें बचाव…
Agri Tips: मध्य प्रदेश में गर्मी का मौसम कद्दू वर्गीय सब्जियों जैसे कद्दू, लौकी, तोरई और खीरा की खेती के लिए सबसे अच्छा माना जाता है. कम समय में ज्यादा उत्पादन और बेहतर मुनाफे की उम्मीद में किसान बड़े पैमाने पर इन फसलों की खेती करते हैं. लेकिन, यह मौसम जितना फायदेमंद है, उतना ही चुनौतीपूर्ण भी साबित हो रहा है. इन दिनों किसानों के सामने सबसे बड़ी समस्या फल मक्खी के रूप में उभरकर सामने आई है, जो देखते ही देखते पूरी फसल को बर्बाद कर देती है.
कृषि विशेषज्ञ अवनीश पटेल के अनुसार, फल मक्खी कद्दू वर्गीय फसलों की सबसे खतरनाक कीट है. एक वयस्क मक्खी करीब 40 से 50 दिनों तक जीवित रहती है और एक मादा अपने जीवनकाल में 500 से अधिक अंडे दे सकती है. ये मक्खी 24 घंटे में 50 से 100 अंडे देती है. खास बात यह है कि यह मक्खी अपने ओविपोसिटर के जरिए फलों के नरम छिलके के अंदर अंडे देती है, जो 24 से 30 घंटे में लार्वा यानी मैगट में बदल जाते हैं. ये कीड़े फल के अंदरूनी हिस्से को खाकर उसे पूरी तरह सड़ा देते हैं.
50 से 80 प्रतिशत नुकसान
गर्मी में जब फल छोटे और कोमल होते हैं, तभी फल मक्खी सबसे ज्यादा सक्रिय रहती है. संक्रमित फल बाहर से सामान्य दिखते हैं, लेकिन अंदर से पूरी तरह खराब हो जाते हैं. इसका असर यह होता है कि फल समय से पहले पीले होकर गिर जाते हैं या टेढ़े-मेढ़े हो जाते हैं. यदि समय रहते नियंत्रण न किया जाए तो 50 से 80 प्रतिशत तक फसल का नुकसान हो सकता है.
ट्रैप का करें इस्तेमाल, घर पर ही बनाएं
इस समस्या से बचाव के लिए विशेषज्ञ थेमिथाइल यूजेनॉल ट्रैप के इस्तेमाल की सलाह देते हैं. एक एकड़ खेत में कम से कम 5 ट्रैप लगाने से मक्खियों की संख्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है. ये ट्रैप मक्खियों को आकर्षित कर उन्हें खत्म करने के साथ ही उनके प्रजनन चक्र को भी तोड़ते हैं. किसान इस ट्रैप को घर पर भी आसानी से तैयार कर सकते हैं. इसके लिए मिथाइल यूजेनॉल 4 भाग, एथिल अल्कोहल 6 भाग और मैलाथियान 2 भाग मिलाकर घोल तैयार किया जाता है. इसके बाद 5×5×5 सेंटीमीटर के प्लाईवुड के टुकड़ों को इस घोल में 24 घंटे तक भिगोया जाता है. जब इन्हें खेत में लगाया जाता है, तो इसकी गंध से फल मक्खियां आकर्षित होकर संपर्क में आते ही मर जाती हैं.
ये काम भी करें
विशेषज्ञों का कहना है कि केवल ट्रैप लगाना ही काफी नहीं है, बल्कि खेत की साफ-सफाई भी बेहद जरूरी है. गिरे हुए और संक्रमित फलों को इकट्ठा कर गहरी मिट्टी में दबा देना चाहिए, ताकि उनमें मौजूद कीड़े दोबारा विकसित न हो सकें. साथ ही बेलों को जमीन पर फैलाने के बजाय मचान विधि से ऊपर चढ़ाने से भी कीटों का प्रकोप कम किया जा सकता है.
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एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें