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Ujjain Farmer Protest: उज्जैन के बोरखेड़ा भल्ला सोसायटी गेहूं खरीदी केंद्र पर बारदान की कमी से गुस्साए किसानों ने चक्काजाम कर दिया. यही नहीं, रिश्वत लेकर गेहूं तौल काआरोप लगाया. चक्काजाम की वजह से नागदा-उन्हेल मार्ग पर करीब एक घंटे तक यातायात ठप रहा, जिससे वाहनों की लंबी कतारें लग गईं.
किसानों के चक्काजाम के कारण लगा भीषण जाम.
Ujjain News: उज्जैन में गेहूं खरीदी केंद्रों की बदहाली अब किसानों के सब्र का बांध तोड़ रही है. मामला नागदा-उन्हेल मार्ग पर स्थित सोडंग के पास बोरखेड़ा भल्ला सोसायटी का है. यहां बारदान (बोरियों) की भारी किल्लत और केंद्र की अव्यवस्थाओं से नाराज किसानों ने मोर्चा खोल दिया. किसानों ने अपनी ट्रैक्टर-ट्रॉलियां सड़क के बीच खड़ी कर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया.
एक घंटे तक थमा रहा यातायात
किसानों के इस चक्काजाम के कारण करीब एक घंटे तक यातायात पूरी तरह ठप रहा. नागदा और इंदौर की ओर जाने वाले रास्तों पर वाहनों का लंबा जाम लग गया. प्रदर्शनकारी किसान प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी कर रहे थे. मौके पर पहुंची पुलिस ने किसानों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन किसान वरिष्ठ अधिकारियों को मौके पर बुलाने की मांग पर अड़े रहे.
तीन दिनों से नहीं मिल रहा बारदान
इस विरोध प्रदर्शन में सोडंग, चक्रावदा और रामगढ़ सहित आसपास के कई गांवों के किसान शामिल हुए. किसानों का कहना है कि वे पिछले तीन दिन से बारदान उपलब्ध होने का इंतजार कर रहे हैं. किसान अशोक जाट ने अपनी पीड़ा बताते हुए कहा कि बारदान न होने के कारण उनकी ट्रालियों को वापस भेजा जा रहा है. उन्होंने बताया कि अधिकारियों को इस समस्या की जानकारी पहले ही दे दी गई थी, लेकिन कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई.
रिश्वत लेकर हो रही तौल!
किसान अपनी उपज लेकर परेशान हो रहे हैं, लेकिन उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है. किसानों ने भ्रष्टाचार के संगीन आरोप लगाए हैं. कहा, रोज 15 से 20 ट्रालियां रिजेक्ट कर दी जाती हैं. रिजेक्ट की गई ट्रॉली को पास करने के लिए दलाल 2000 से 3000 रुपये की मांग करते हैं. रिश्वत देने पर खराब या मिट्टी वाली ट्रॉली भी तुरंत तौल ली जाती है.
सीएम के वादों और हकीकत में अंतर
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि मुख्यमंत्री लाइव आकर वादा करते हैं कि 50% तक खराब हुआ गेहूं भी खरीदा जाएगा. हल्की-फुल्की मिट्टी या कतरन होने पर भी खरीद के निर्देश हैं. लेकिन, उज्जैन के वेयरहाउस में इन नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं. किसानों से सफाई के नाम पर अलग से पैसे लिए जा रहे हैं, फिर भी उनकी फसल रिजेक्ट हो रही है.
सरकार की छवि पर दाग
किसानों का आरोप है कि ये बिचौलिए और दलाल सरकार की छवि खराब कर रहे हैं. तीन दिन से भूखा-प्यासा किसान वेयरहाउस के बाहर खड़ा है, लेकिन सिस्टम की लापरवाही के कारण वह सड़क पर उतरने को मजबूर है. फिलहाल, सड़क पर भारी जाम लगा हुआ है और किसान अपनी मांगों पर अड़े हैं.
भीषण गर्मी और अव्यवस्था की मार
किसानों ने केंद्र पर व्याप्त अव्यवस्थाओं की पोल खोलते हुए बताया कि यहां कुल पांच तौल कांटे हैं, लेकिन उनमें से केवल दो ही चालू हैं. इस कारण भीषण गर्मी के बीच किसानों को दो-दो दिनों तक अपनी बारी का इंतजार करना पड़ रहा है. इतना ही नहीं, कई किसानों ने यह गंभीर आरोप भी लगाया कि उनकी ट्रालियों के गेहूं को खराब बताकर बिना वजह वापस लौटाया जा रहा है.
प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद खुला रास्ता
हालात को बेकाबू होते देख एसडीएम राजाराम करजरे मौके पर पहुंचे. उन्होंने आंदोलनकारी किसानों की समस्याएं सुनीं और स्थिति का जायजा लिया. एसडीएम ने किसानों को भरोसा दिलाया कि अगले एक घंटे के भीतर बारदान की व्यवस्था कर दी जाएगी. इस आश्वासन के बाद किसानों ने सड़क से हटने का फैसला किया और चक्काजाम खत्म हुआ. हालांकि, इस घटना ने सरकारी खरीदी केंद्रों की तैयारियों और दावों पर बड़े सवालिया निशान लगा दिए हैं.
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एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें