कान्हा टाइगर रिजर्व में अमाही बाघिन T-141 की बुधवार सुबह करीब 9:30 बजे मुक्की क्वॉरेंटाइन सेंटर में इलाज के दौरान मौत हो गई। कान्हा नेशनल पार्क के डिप्टी डायरेक्टर (कोर) प्रकाश कुमार वर्मा ने इसकी पुष्टि की। उन्होंने बताया कि प्रोटोकॉल के अनुसार पोस्
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बाघिन T-141 के तीन शावकों की भी हाल ही में मौत हो चुकी है। सरही परिक्षेत्र में 21 अप्रैल को पहले शावक का शव मिला था। इसके बाद 24 अप्रैल को दूसरे और 25 अप्रैल को तीसरे शावक की मौत हुई। लगातार हो रही इन मौतों के बाद पार्क प्रबंधन ने बाघिन और उसके एकमात्र बचे शावक को ट्रेंकुलाइज कर मुक्की क्वॉरेंटाइन सेंटर में स्थानांतरित किया था, जहाँ उनका उपचार चल रहा था।
पहला शावक 21 अप्रैल को अमाही नाला के पास मिला था।

9 दिन में तीन बाघ शावकों के शव मिले हैं।
शावकों की मौत भूख के कारण हुई थी
शावकों की मौत के अलग-अलग कारण सामने आए थे। पहले दो शावकों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उनके पेट खाली पाए गए थे, जिससे भूख को मौत का संभावित कारण माना गया।
तीसरे शावक का शव जांच के लिए जबलपुर स्थित स्कूल ऑफ वाइल्ड लाइफ फॉरेंसिक एंड हेल्थ भेजा गया था। इस दौरान पीसीसीएफ वाइल्डलाइफ डॉ. समिता राजौरा ने शावक के फेफड़ों में संक्रमण होने की जानकारी दी थी।

मृत शावकों का अंतिम संस्कार कर दिया गया है।
नौ दिनों में तीन शावकों और एक बाघिन की मौत
बाघिन T-141 की मौत के बाद कान्हा प्रबंधन पर सवाल उठने लगे हैं। पिछले नौ दिनों में तीन शावकों और एक बाघिन की मौत से कान्हा टाइगर रिजर्व की वन्यजीव सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर चिंता बढ़ गई है। पार्क प्रबंधन अब बाघिन की मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है।