आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को हाईकोर्ट से राहत, मानदेय बहाल, 6% ब्याज के साथ एरियर्स देने आदेश

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को हाईकोर्ट से राहत, मानदेय बहाल, 6% ब्याज के साथ एरियर्स देने आदेश


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मध्यप्रदेश की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं और मिनी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है. कोर्ट ने उनका घटाया गया मानदेय बहाल करने के साथ ही सरकार को एरियर्स ब्याज सहित चुकाने के निर्देश दिए हैं.

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Jabalpur High Court

जबलपुर स्थित हाईकोर्ट ने मध्यप्रदेश की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं और मिनी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के पक्ष में अहम फैसला सुनाया है. कोर्ट ने जून 2019 से जून 2023 के बीच घटाए गए मानदेय को बहाल करने का आदेश दिया है, जिससे हजारों कार्यकर्ताओं को बड़ी राहत मिली है.

दरअसल, राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2019 में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय में कटौती की गई थी. जिसे लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था. प्रभावित कार्यकर्ताओं ने इस फैसले को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट ने पाया कि मानदेय में कटौती उचित नहीं थी.

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को हाईकोर्ट से बड़ी राहत
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार को 48 माह यानी चार साल की अवधि का एरियर्स 120 दिनों के भीतर चुकाना होगा. इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है कि इस राशि पर 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी दिया जाए। इससे कार्यकर्ताओं को आर्थिक रूप से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है.इसके अलावा कोर्ट ने रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली ग्रेच्युटी को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्देश दिए है. हाईकोर्ट ने कहा है कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को ग्रेच्युटी एक्ट के फार्मूले के अनुसार भुगतान किया जाए, जिससे उन्हें उनके सेवाकाल के अनुरूप उचित लाभ मिल सके.

6% ब्याज के साथ एरियर्स देने के आदेश
इस फैसले को आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के अधिकारों की दिशा में एक बड़ी जीत माना जा रहा है. लंबे समय से वे अपने मानदेय और अन्य लाभों को लेकर संघर्ष कर रही थी. कोर्ट के इस निर्णय से न केवल उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि उनके मनोबल में भी वृद्धि होगी.अब राज्य सरकार के सामने कोर्ट के आदेशों का पालन करने की जिम्मेदारी है. यदि तय समय सीमा में एरियर्स और अन्य भुगतान नहीं किया जाता, तो आगे कानूनी कार्रवाई की संभावना भी बन सकती है.कुल मिलाकर, हाईकोर्ट का यह फैसला आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए राहत और न्याय का प्रतीक बनकर सामने आया है, जो उनके लंबे संघर्ष का परिणाम है



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