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Satna News: गुड़हा सेव को पूरी तरह ठंडा होने देना बहुत जरूरी है. ठंडा होने के बाद यह कुरकुरा और अलग-अलग हो जाती है. सेव को स्टील या कांच के एयरटाइट कंटेनर में स्टोर किया जाए, तो यह एक से दो महीने तक सुरक्षित रहता है.
सतना. गर्मी की छुट्टियां आते ही बघेलखंड के गांवों में एक बार फिर बचपन की मीठी यादें ताजा होने लगती हैं. दादी-नानी के आंगन में खिलखिलाते बच्चों के बीच पारंपरिक मिठाइयों की खुशबू अब भी वैसी ही बनी हुई है. इन्हीं स्वादों में से एक गुड़हा सेव कभी हर घर की पहचान हुआ करती थी. बदलते समय में जहां बच्चों की पसंद फास्टफूड की ओर झुक गई है, वहीं गांवों और छोटे कस्बों में आज भी यह देसी मिठास अपनी जगह बनाए हुए है. गुड़, आटा और देसी घी से बनने वाली यह डिश न सिर्फ स्वाद में लाजवाब होती है बल्कि गर्मियों में शरीर को तुरंत ऊर्जा देने का भी काम करती है.
बघेलखंड क्षेत्र में गुड़हा सेव सिर्फ एक मिठाई नहीं बल्कि तब के समय में एनर्जी का भी अच्छा सोर्स हुआ करता था. लोग इसी को खाने के बाद पानी पीते थे. वहीं जब बच्चे गर्मी की छुट्टियों में अपने ननिहाल या ददिहाल पहुंचते हैं, तो उनका स्वागत भी लाई या गुड़हा सेव से किया जाता है. लोकल 18 से बातचीत में स्थानीय निवासी मीना द्विवेदी बताती हैं कि यह व्यंजन पीढ़ियों से घरों में बनता आ रहा है और इसका स्वाद आज भी वैसा ही है, जैसा पहले हुआ करता था. खास बात यह है कि इसे लंबे समय तक स्टोर करके भी खाया जा सकता है, जिससे यह यात्रा या छुट्टियों के लिए एक आदर्श स्नैक्स बन जाता है.
गुड़हा सेव बनाने की रेसिपी
गुड़हा सेव बनाना जितना आसान है, उतना ही ध्यान देने वाला भी है. इसे बनाने के लिए सबसे पहले एक बर्तन में बेसन लिया जाता है. फिर इसमें दो से तीन चम्मच तेल का मोयन और स्वादानुसार नमक मिलाया जाता है. इसके बाद थोड़ा-थोड़ा पानी डालकर नरम आटा गूंथा जाता है, ठीक वैसे जैसे रोटी का आटा तैयार किया जाता है. इस आटे को करीब 15 से 20 मिनट के लिए ढककर रख दिया जाता है ताकि यह अच्छी तरह सेट हो जाए.
सेव बनाने की प्रक्रिया
अब सेव बनाने की प्रक्रिया शुरू होती है. इसके लिए सेव मशीन या हाथों की मदद ली जा सकती है. कढ़ाई में तेल गर्म करें और मध्यम आंच पर आटे को मशीन से दबाकर या हाथों से आकार देते हुए तेल में डालें. अब सेव को तब तक तलें, जब तक वह सुनहरे और कुरकुरे न हो जाएं. तलने के बाद इन्हें निकालकर ठंडा होने दें और छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ लें. अब बारी आती है गुड़ की चाशनी तैयार करने की. एक कड़ाही में थोड़ा पानी डालकर उसमें गुड़ मिलाएं और धीमी आंच पर पकाएं. जब गुड़ पूरी तरह पिघल जाए, तो चाशनी को तब तक पकाएं, जब तक वह सॉफ्ट बॉल कंसिस्टेंसी में न आ जाए यानी ठंडे पानी में डालने पर वह इकट्ठा होने लगे. इसके बाद गैस बंद करें और तैयार सेव को इस चाशनी में डालकर अच्छी तरह मिलाएं ताकि हर सेव पर गुड़ की परत चढ़ जाए.
स्टोरेज और सेहत का खजाना
गुड़हा सेव को पूरी तरह ठंडा होने देना बेहद जरूरी है. ठंडा होने के बाद यह कुरकुरी और अलग-अलग हो जाती है. इसे स्टील या कांच के एयरटाइट कंटेनर में स्टोर किया जाए, तो यह एक से दो महीने तक सुरक्षित रहती है. सेहत के लिहाज से भी यह स्वीट डिश काफी फायदेमंद है. गुड़ आयरन और ग्लूकोज का अच्छा स्रोत होता है, जो गर्मी में शरीर को तुरंत ऊर्जा देता है और थकान दूर करता है. यही वजह है कि यह पारंपरिक स्नैक्स आज भी बघेलखंड में खास महत्व रखता है.
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राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.