चंबल में अवैध रेत खनन पर सुप्रीम सख्ती, निरीक्षण किया: सीईसी टीम मुरैना पहुंची, 20 किमी क्षेत्र का दौरा किया, घड़ियाल क्षेत्र भी देखा – Morena News

चंबल में अवैध रेत खनन पर सुप्रीम सख्ती, निरीक्षण किया:  सीईसी टीम मुरैना पहुंची, 20 किमी क्षेत्र का दौरा किया, घड़ियाल क्षेत्र भी देखा – Morena News




चंबल नदी में वन्य जीवों के संरक्षण के लिए रेत उत्खनन पर प्रतिबंध होने के बावजूद बड़े पैमाने पर अवैध खनन जारी है, जिसे लेकर मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। कोर्ट की सख्त नाराजगी के बाद केंद्रीय सशक्त समिति (CEC) की टीम निरीक्षण के लिए मौके पर पहुंची। टीम ने राजस्थान और मध्यप्रदेश के प्रशासनिक व वन विभाग के अधिकारियों के साथ चंबल के राजघाट क्षेत्र में नाव के जरिए करीब 20 किलोमीटर तक दौरा कर जमीनी हकीकत देखी। निरीक्षण के दौरान घड़ियालों के संवेदनशील क्षेत्रों का भी जायजा लिया गया और अवैध खनन रोकने के उपायों पर चर्चा की गई। सुप्रीम कोर्ट ने तीन राज्यों को लगाई थी फटकार हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने अवैध रेत उत्खनन को लेकर राजस्थान, मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश सरकारों को फटकार लगाई थी और सख्ती से रोक लगाने के निर्देश दिए थे।
इसी क्रम में सीईसी कमेटी के सदस्य चंद्र प्रकाश गोयल निरीक्षण के लिए पहुंचे। निरीक्षण के दौरान मप्र और राजस्थान के वन विभाग, प्रशासन और पुलिस के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। इसके बाद देवरी घड़ियाल केंद्र पर बैठक भी आयोजित की गई। टीम ने करीब 20 किलोमीटर तक नाव से निरीक्षण किया। इस दौरान उन स्थानों का भी जायजा लिया गया, जहां मादा घड़ियाल अंडे देती हैं। इन क्षेत्रों को अत्यंत संवेदनशील माना जाता है। वन विभाग ने सुरक्षा बढ़ाने की रखी मांग अवैध रेत उत्खनन रोकने के लिए वन विभाग ने अतिरिक्त संसाधनों की मांग रखी। इसमें चंबल किनारे 16 नई पोस्ट, 3 चौकियां, संवेदनशील क्षेत्रों में हथियार और अतिरिक्त बल की तैनाती की बात शामिल है।
साथ ही 240 वन विभाग और एसएएफ जवानों की अतिरिक्त तैनाती की मांग की गई, ताकि चौकियों पर शिफ्टवार निगरानी हो सके। डीएफओ हरिश्चंद्र बघेल के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर यह निरीक्षण किया गया है। इसकी रिपोर्ट गोपनीय रूप से सुप्रीम कोर्ट को सौंपी जाएगी। वन विभाग ने अपने स्तर पर सुझाव और मांगें रखी हैं, ताकि अवैध रेत उत्खनन पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।



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