मध्यप्रदेश में अब व्यापारियों के माल से भरे वाहनों को मनमाने ढंग से रोकना आसान नहीं होगा। कमर्शियल टैक्स विभाग ने नया सर्कुलर जारी कर स्पष्ट किया है कि जीएसटी एक्ट के तहत कार्रवाई का अधिकार मुख्य रूप से उसी विभाग के पास रहेगा। अब यदि पुलिस या कोई अन्य विभाग किसी वाहन को रोकता है, तो उसे पूरी प्रक्रिया का रिकॉर्ड रखना होगा। केवल गाड़ी का नंबर, ड्राइवर का नाम या अधूरी जानकारी के आधार पर कार्रवाई नहीं की जा सकेगी। संबंधित अधिकारी को यह स्पष्ट करना होगा कि वाहन को किस सूचना के आधार पर, कब और क्यों रोका गया। साथ ही, पहले की तरह वाहन रोककर बाद में कमर्शियल टैक्स विभाग को सूचना देकर कार्रवाई करने का दबाव बनाने की प्रक्रिया भी अब खत्म कर दी गई है। इनफार्मर पर भी सख्ती
नई व्यवस्था में सूचना देने वाले (इनफार्मर) की जवाबदेही भी तय की गई है। यदि जांच में सूचना गलत पाई जाती है, तो संबंधित व्यक्ति को दस्तावेजों के साथ बुलाया जा सकता है। इससे विभाग को उम्मीद है कि झूठी या अपुष्ट सूचनाओं में कमी आएगी। कारोबारियों को राहत
अब टैक्स चोरी की सूचना पर छापा या जब्ती की कार्रवाई करने से पहले संबंधित सर्किल प्रभारी को वेब पोर्टल पर इसकी जानकारी दर्ज करनी होगी। इस व्यवस्था से पारदर्शिता बढ़ेगी और व्यापारियों को अनावश्यक परेशानियों से राहत मिलेगी।
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