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मध्यप्रदेश के उज्जैन में भीषण गर्मी के बीच एक साधु की कठोर तपस्या चर्चा में है. योगी विष्णु नाथ, जो 12 वर्षों से अखंड खड़े रहकर साधना कर रहे हैं, 29 अप्रैल से श्मशान घाट पर 21 दिवसीय अष्टधूनी तप कर रहे हैं. दोपहर की प्रचंड धूप में अग्नि के बीच एक पैर पर खड़े रहकर वे सनातन धर्म और गौ रक्षा का संकल्प निभा रहे हैं.
महाकाल की नगरी उज्जैन की तपती दोपहर, जब तापमान 40 डिग्री के पार पहुंच चुका है और लोग घरों में कैद रहने को मजबूर हैं.उसी समय शहर के श्मशान घाट पर एक अद्भुत दृश्य देखने को मिल रहा है. धधकती चिताओं और जलती रेत के बीच एक साधु, अवधूत बाबा, अष्टधूनि तपस्या में लीन हैं. चारों ओर अग्नि की लपटें और ऊपर से बरसती आग जैसी धूप फिर भी उनके चेहरे पर अद्भुत शांति है. इस कठिन तपस्या को देखने और बाबा के दर्शन पाने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है. इसे आस्था, विश्वास और तप की अनोखी मिसाल मान रहे हैं. उज्जैन की इस भीषण गर्मी में बाबा की तपस्या अब रहस्य और श्रद्धा का केंद्र बन चुकी है.
उज्जैन की तपोभूमि में आस्था और साधना का अद्भुत दृश्य देखने को मिल रहा है. अघोरी संत योगी बम बम नाथ के शिष्य योगी विष्णु नाथ पिछले 12 वर्षों से खड़े रहकर अखंड खड़ेश्वर तपस्या में लीन हैं. अब वे 29 अप्रैल से श्मशान घाट पर 21 दिवसीय ‘अष्टधूनी तपस्या’ कर रहे हैं, जो 19 मई तक चलेगी. भीषण गर्मी में रोज दोपहर 12 से 3 बजे तक, चारों ओर जलती धूनी के बीच, एक पैर पर खड़े होकर वे साधना करते हैं. यह कठिन तपस्या उनकी अटूट श्रद्धा, आत्मबल और आध्यात्मिक समर्पण का प्रतीक बन चुकी है.
क्या है तपस्या का रहस्य
उज्जैन के श्मशान घाट पर इन दिनों एक अद्भुत दृश्य देखने को मिल रहा है. विष्णुनाथ जी की कठोर अष्टधूनी तपस्या ने श्रद्धालुओं को आकर्षित कर लिया है. दूर-दूर से लोग उनकी साधना को देखने पहुंच रहे हैं. चारों ओर धधकती अग्नि, शांत वातावरण और गूंजते मंत्र इस तपस्या को दिव्यता प्रदान करते हैं. मान्यता है कि पंचतत्व अग्नि, जल, पृथ्वी, वायु और आकाश को साक्षी मानकर की गई यह साधना आत्मशुद्धि और तांत्रिक सिद्धियों की राह खोलती है. विष्णुनाथ जी अपनी तपस्या भगवान काल भैरव और अष्टभैरव को समर्पित कर, अध्यात्म की एक अनोखी मिसाल पेश कर रहे हैं.
क्यों कर रहे है यह तपस्या
उज्जैन की पावन भूमि पर तप और त्याग की एक अद्भुत कहानी आकार ले रही है. अघोर अखाड़ा से लोग बताते है कि, सनातन धर्म और गौ माता की रक्षा के संकल्प के साथ खड़ेश्वरी अघोरी बाबा विष्णु नाथ और योगी सोम नाथ जी कठोर तपस्या में लीन हैं. चारों ओर आठ दिशाओं में प्रज्वलित अग्नि धूनियां, और नवां स्थान सूर्य देव को समर्पित इस दिव्य साधना का दृश्य मन को स्तब्ध कर देता है. भीषण गर्मी के बीच अग्नि के मध्य खड़े और बैठे ये साधक अडिग आस्था और तप की मिसाल बनकर आध्यात्मिक शक्ति का संचार कर रहे हैं.
12 साल के लिए एक और तपस्या का पर्ण
अघोर अखाड़े के विष्णु नाथ जी ने बताया कि वह बम बम नाथ जी के चेले है उनके मार्गदर्शन मे ही बहुत कुछ सिखने को मिला है. करीब 26 महीने पहले बाबा बम बम नाथ के आर्शीवाद से मेने एक तपस्या की शुरुआत करि थी. जो दो साल से ज्यादा हो गए है. मेने तपस्या मे 12 साल का प्रव्य लिया है कि मे 12 साल तक खडे रहुगा धुप हो या बरसात हमेशा खडे ही रहुगा.