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राजगढ़ के 7 साल के बच्चे को एक साल तक पेट दर्द की दवा दी जाती रही, लेकिन असली बीमारी पकड़ में नहीं आई. इंदौर में जांच के बाद पेनक्रियाज की दुर्लभ बीमारी सामने आई. डॉक्टरों ने 4.30 घंटे की सर्जरी कर बच्चे की जान बचाई. अब बच्चे की हालत स्थिर है. डॉक्टरों ने कहा कि ऐसे यह बीमारी आम तौर पर बच्चों में देखने को नहीं मिलती है, लेकिन सतर्कता से किए गए जांच रिपोर्ट में यह बीमारी पकड़ में आ गई थी.
राजगढ़ के बच्चे का इंदौर में सफल ऑपरेशन किया गया.
इंदौर/राजगढ़. मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले से चौंकाने वाला मामला सामने आया है जहां एक 7 साल के मासूम को लगातार पेट दर्द होता रहा, जिसे परिवार ने सामान्य समस्या समझकर अलग-अलग शहरों में इलाज कराया. करीब एक साल तक इलाज चलता रहा, लेकिन असली बीमारी का पता नहीं चल सका. इस दौरान बच्चे की हालत धीरे-धीरे बिगड़ती गई, पेट में सूजन और गांठ बनने लगी. आखिरकार जब परिवार बच्चे को इंदौर के सुपर स्पेशलिटी अस्पताल लेकर पहुंचा, तब जांच में बड़ा खुलासा हुआ. डॉक्टरों ने बताया कि बच्चे को पेनक्रियाज से जुड़ी दुर्लभ बीमारी है, जिसे समय रहते पकड़ना बेहद मुश्किल होता है. इस केस में भी यही हुआ. लंबे समय तक बीमारी छिपी रही और जब तक सही जांच नहीं हुई, तब तक सही इलाज संभव नहीं हो पाया.
बच्चे के पिता रतनलाल ने बताया कि हमारा बेटा पहले सामान्य बच्चों की तरह ही था, उसे कोई परेशानी नहीं थी. अचानक वह पेट दर्द की शिकायत करने लगा. शुरू शुरू में हमने इसे गंभीरता से नहीं लिया, कुछ घरेलू उपाय किए. इससे उसकी परेशानी कम नहीं हुई, कुछ दिन बाद वह पेट दर्द के कारण बहुत ज्यादा परेशान हुआ और रोने लगा. इसके बाद हमने पीने का पानी और साफ-सफाई का जमकर ध्यान रखा. अलग-अलग शहरों में भी हर बड़े डॉक्टर को दिखाया, लेकिन कोई आराम नहीं लगा.
मध्य प्रदेश और राजस्थान के शहरों में कराया इलाज
राजगढ़ जिले के जीरापुर क्षेत्र के 7 साल के बच्चे को लंबे समय से पेट दर्द की शिकायत थी. परिवार ने इसे सामान्य समझकर झालावाड़ और कोटा सहित कई शहरों में इलाज कराया. दवाएं दी गईं, लेकिन समस्या जस की तस बनी रही. पिता रतनलाल ने बताया कि डॉक्टरों की तारीफ सुनकर हम उनके पास जाते थे और दवा लेकर वापस आ जाते थे. बच्चे की हालत लगातार बिगड़ती रही. लगातार दर्द के साथ बच्चे के पेट में सूजन बढ़ने लगी. कुछ समय बाद गांठ जैसी स्थिति बनने लगी. इसके बाद परिवार चिंतित हुआ और बेहतर इलाज के लिए इंदौर का रुख किया.
इंदौर में खुला बीमारी का राज
इंदौर के सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में विस्तृत जांच के दौरान डॉक्टरों ने पाया कि बच्चे को पेनक्रियाज की दुर्लभ बीमारी है. जांच में पेनक्रियाज के कार्य में असामान्यता और द्रव्य भरी सिस्ट पाई गई. डॉक्टरों के अनुसार बच्चे को क्रॉनिक पेनक्रिएटाइटिस के साथ पेनक्रियाज सिस्ट थी. यह बीमारी बच्चों में बेहद कम पाई जाती है. कुछ मामलों में यह जन्मजात होती है, जबकि कुछ में जेनेटिक कारण भी जिम्मेदार होते हैं.
परिवार ने कहा बस आप तो बच्चे को सही कर दो
15 अप्रैल को डॉक्टरों की टीम ने करीब 4.30 घंटे तक जटिल सर्जरी की. सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ अशोक लड्डा के नेतृत्व में टीम ने सफल ऑपरेशन कर बच्चे की जान बचाई. ऑपरेशन के बाद बच्चे को ऑब्जर्वेशन में रखा गया. इस सर्जरी में डॉ बी के लाहोटी, डॉ पूजा तिवारी, डॉ निलक्षी जाखोटिया, डॉ अदिति शर्मा, डॉ ऐश्वर्या गुप्ता, डॉ विधि देसी और डॉ अध्यता सरकार शामिल रहे. एनेस्थीसिया टीम में डॉ दीप्ति सक्सेना और डॉ सौम्या की भूमिका भी अहम रही.
अब कैसी है बच्चे की हालत
अस्पताल प्रबंधन के अनुसार सर्जरी के बाद बच्चे की हालत स्थिर है. धीरे-धीरे रिकवरी हो रही है और फिलहाल कोई खतरा नहीं है. यह मामला बताता है कि बच्चों के लंबे समय तक बने रहने वाले लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. समय पर सही जांच और विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह बेहद जरूरी है.
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सुमित वर्मा, News18 में 4 सालों से एसोसिएट एडीटर पद पर कार्यरत हैं. बीते 3 दशकों से सक्रिय पत्रकारिता में अपनी अलग पहचान रखते हैं. देश के नामचीन मीडिया संस्थानों में सजग जिम्मेदार पदों पर काम करने का अनुभव. प…और पढ़ें